मातृ दिवस: एक साल से इन मांओं की कोरोना के खिलाफ जंग जारी...महामारी पर ममता भारी
डॉक्टर कंग अपने परिवार के साथ समय भी नहीं गुजार पातीं। ऐसे में वे अस्पताल से ही चंद मिनटों का समय निकालकर अपनी बेटी, बेटे व पति को कॉल कर उनका हालचाल लेती हैं। उन्होंने अपनी सूझबूझ और मेहनत के बल पर कोरोना से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग को हर तरह से मजबूत बनाने का प्रयास शुरू किया, जो अब तक जारी है।
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कोरोना की वजह से सबसे अहम जिम्मेदारी डॉ. अमनदीप कंग के पास है। स्वास्थ्य निदेशक होने के नाते कोरोना की रोकथाम, मरीजों की पहचान, इलाज व तमाम टीमों का मैनेजमेंट संभाल रही हैं। ऐसी विषम परिस्थितियों के बावजूद वे डटकर खड़ी हैं। ड्यूटी के कारण लगातार सुबह से देर शाम तक व्यस्त रहने के बाद डॉक्टर कंग अपने परिवार के साथ समय भी नहीं गुजार पातीं। ऐसे में वे अस्पताल से ही चंद मिनटों का समय निकालकर अपनी बेटी, बेटे व पति को कॉल कर उनका हालचाल लेती हैं।
उन्होंने अपनी सूझबूझ और मेहनत के बल पर कोरोना से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग को हर तरह से मजबूत बनाने का प्रयास शुरू किया, जो अब तक जारी है। उनका कहना है कि इन कठिन परिस्थितियों में अपने घर का ख्याल रख पाना थोड़ा मुश्किल होता है। एक मिनट का भी खाली समय नहीं है। जब भी वक्त मिलता है तो बेटी व बेटे से फोन पर ही बात कर लेती हूं। उनकी बेटी जीना जीएमसीएच-32 में डॉक्टर हैं, वहीं बेटा संतोष कनाडा में इंजीनियर है। जबकि पति परमजीत सिंह आईपीएस अधिकारी रह चुके हैं।
दूसरों के दर्द दूर करती हैं डॉ. काजल
पीजीआई ट्रॉमा सेंटर के ओटी और आईसीयू में 24 घंटे मरीज को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। कोविड-19 का समय हो या सामान्य दिन यहां गंभीर मरीजों के आने का सिलसिला हमेशा जारी रहता है। ट्रॉमा सेंटर की प्रभारी की जिम्मेदारी निभाते हुए डॉ. काजल जैन 14 महीनों से लगातार गंभीर मरीजों का इलाज निर्बाध जारी रखने के लिए दिन रात जुटी हुई हैं।
वहीं दूसरी तरफ इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को निभाते हुए डॉक्टर काजल एक अच्छी मां और अच्छी पत्नी के तौर पर भी खुद को साबित कर रही हैं। उनकी दोनों बेटियां रिया और समायरा व उनके पति तेजिंदर शर्मा की देखभाल का जिम्मा डॉक्टर काजल के कंधों पर ही है। उन्होंने बताया कि बच्चों की इस समय ऑनलाइन पढ़ाई चल रही है। ऑनलाइन पढ़ाई में आने वाली दिक्कतों को दूर करने की जिम्मेदारी भी उनके पास है। ट्रॉमा सेंटर और घर की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बना पाना मुश्किल हैं लेकिन नामुमकिन नहीं।
दोहरी जिम्मेदारी को हंसकर निभाती हैं डॉ. चारू
जीएमएसएच-16 में कई सालों तक एनेस्थीसिया विभाग की कमान संभालते हुए डॉ. चारू ने खुद को एक सफल नारी के तौर पर पेश किया। जहां तक घर की जिम्मेदारी की बात है तो इनके बेहतर तालमेल और प्यार का ही नतीजा है कि ये खुद एक जिम्मेदार अधिकारी हैं और इनके पति डॉक्टर नीरज ऑर्थोपेडिक सर्जन हैं, वहीं बेटा तुषार बंगलूरू में और बेटी शिरीन गुप्ता जीएमसीएच 32 में डॉक्टर हैं।
कोविड के दौरान संक्रमण की चपेट में आ चुकी डॉक्टर चारू ने एनएचएम नोडल जैसे महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी मिलने पर खुशी जाहिर की और उसके कार्यों को बखूबी अंजाम देने में जुटी हुई हैं। एक बार संक्रमण की चपेट में आ चुकी डॉक्टर चारू अपने परिवार की सेहत को लेकर बेहद सचेत रहती हैं। ऐसे में वे अपनी व्यस्तता के बीच भी अपने परिवार के लिए अपने हाथों से खाना बनाकर ही ड्यूटी पर जाती हैं। उनका मानना है कि परिवार स्वस्थ व खुश हो तो व्यक्ति निश्चिंत होकर अपना हर फर्ज पूरा कर सकता है। मौजूदा समय में डॉ. चारू एनएचएम के साथ ही कोविड से जुड़े महत्वपूर्ण कई अन्य कार्यों में भी अहम भूमिका सफलतापूर्वक निभा रही हैं।
मां अन्नपूर्णा का आशीर्वाद डॉ. श्वेता पर
कोविड के दौरान जब लॉकडाउन हुआ तो कई मरीजों के खाने पर संकट आ खड़ा हुआ। उस दौरान पीजीआई की संयुक्त चिकित्सा अधीक्षक और हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर तैनात डॉ. श्वेता पीजीआई में भर्ती मरीजों के लिए मां अन्नपूर्णा के रूप में नजर आईं।
उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना लॉकडाउन के दौरान पीजीआई में भर्ती सैकड़ों मरीजों के लिए भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित करवाई। यह क्रम अब भी जारी है। इसके साथ ही डॉक्टर श्वेता के जिम्मे मेन ऑपरेशन थियेटर कांप्लेक्स के संचालन की भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
डॉक्टर श्वेता के पति डॉ. आशीष पीजीआई में ही कार्यरत हैं। वहीं बेटे अक्षत की जिम्मेदारी भी श्वेता के ही कंधों पर है। अपनी तमाम व्यस्तता के बावजूद भी डॉक्टर श्वेता अपने घर के बड़े की बातों को नजरअंदाज नहीं करती। ऊंचे ओहदे पर होने के बावजूद भी वह बड़ों को सम्मान और छोटों को प्यार देना नहीं भूलतीं।