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प्रेरणा की दो कहानियां: एक मां 45 दिनों से लंगर में बना रही रोटियां तो दूजी कोरोना के खिलाफ जंग में उतरी
Sun, 10 May 2020 03:45 PM IST
ajay kumar
संवाद न्यूज एजेंसी/ अमर उजाला, चंडीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी/ अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Sun, 10 May 2020 03:45 PM IST
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किशनगढ़ में लंगर के दौरान मनकौर।
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गांव किशनगढ़ में पिछले 45 दिन से चल रहे लंगर में 55 वर्षीय मनकौर सारा दिन लंगर में रोटियां बना रही हैं। मनकौर के पुत्र नरेंद्र लुबाना ने बताया कि उनके लिए गर्व की बात है कि उनकी माता मुश्किल घड़ी में जरूरतमंदों के लिए खाना बना रही हैं। मनकौर जिला परिषद सदस्य भी रह चुकी हैं। जहां माता मनकौर खाना पकाने का काम कर रही हैं तो वही उनके बेटे नरिंदर पाल सिंह लुबाना पिछले 45 दिन से गांव किशनगढ़ में तकरीबन 3000 जरूरतमंद लोगों की खाने की व्यवस्था करवा रहे हैं।
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लुबाना का कहना है कि वह यह कार्य गांव किशनगढ़ के युवा साथियों की आर्थिक व शारीरिक सेवा को साथ लेकर कर पा रहे हैं। गौरतलब है कि जहां एक तरफ चंडीगढ़ में चल रहे कई लंगरों में से एक किशनगढ़ के लंगर में प्रतिदिन 3000 लोगों को खाना दिया जाता है तो वही लुबाना अपने निजी खाते से जरूरतमंद लोगों को सैनिटाइजर व रीयूजएबल मास्क भी प्रदान कर रहे हैं। लुबाना ने कहा कि गांव की अन्य औरतों को साथ में लेकर उनकी मां चपातियां बनाने में उनकी सहायता करती हैं। यह सारी महिलाएं मनकौर की प्रेरणा के बाद ही इस तरह सेवा में जुटी हैं।
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चाहत और हसरत को अपनी मां पर नाज
पीजीआईएमईआर के पुरुष मेडिकल वार्ड में कोरोना मरीजों के बीच ड्यूटी कर रही सीनियर नर्सिंग ऑफिसर प्रवीन कौशल हसरत पर उनकी बेटियों को नाज है। पहले वह मां से हर दिन छुट्टी लेकर घर पर रहने की बात करती थीं लेकिन आज वही बेटियां हर दिन घर से ड्यूटी करने के लिए मां को विदा करती हैं। मां ने ही बच्चों को नहीं समझाया बल्कि बेटियों ने भी मां का हौसला बढ़ाया।
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पंजाब विश्वविद्यालय के कैंपस में सीनियर नर्सिंग ऑफिसर प्रवीन कौशल हसरत रहती हैं। उनके पिता की हाल ही में सर्जरी हुई है। पति चिराग कौशल पीयू के कंप्यूटर सेंटर में टेक्नीशियन हैं। बड़ी बेटी चाहत कौशल 13 साल व छोटी बेटी हसरत कौशल नौ साल की हैं। दोनों को ही इस समय घर में मां की जरूरत है। वहीं, कोरोना का चारों ओर भय है।
चाहत का कहना है कि कोरोना का डर सता रहा था। सभी की मां घर में बच्चों के साथ रहती हैं और मेरी मां ड्यूटी पर। इससे खतरा दोगुना हो रहा था, लेकिन मां व पिता दोनों ने हमें समझाया और हम अब माता-पिता दोनों को ही हर दिन ड्यूटी पर जाने के लिए तैयार कर रहे हैं। देश व दुनिया के हालात देखे तो मां से मैंने ही कहा कि असली सेवा का मौका अभी है। छोटी बेटी हसरत कौशल भी अब मां को ड्यूटी पर रोज भेजती है।