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Hindi News ›   Chandigarh ›   Mother Filed Petition in Punjab Haryana High Court Against Three Daughters

40 करोड़ की मालकिन दवाओं के लिए हुई मोहताज, बेटियों के खिलाफ पहुंची हाईकोर्ट, जानिए मामला

Wed, 24 Apr 2019 11:16 AM IST
खुशबू गोयल विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Wed, 24 Apr 2019 11:16 AM IST
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Mother Filed Petition in Punjab Haryana High Court Against Three Daughters
फाइल फोटो
40 करोड़ से अधिक की प्रॉपर्टी की मालकिन इलाज के लिए दवाओं तक को मोहताज हो गई है। इसलिए वह अपनी तीन बेटियों के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंची है। क्योंकि वह अपनी तीन बेटियों के कारण इलाज के लिए दवाओं तक को मोहताज हो गई है। इसलिए अब अपनों से ही इंसाफ के लिए 83 वर्षीय जोगिंदर कौर ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की शरण ली है। हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रशासक के सलाहकार, गृह सचिव, डीसी व एसएसपी सहित पंजाब के गृह सचिव, मोहाली के एसएसपी व याची की तीनों बेटियों और उनके पतियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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मजदूरी से की थी शुरुआत
याची ने बताया कि वह अपने पति के साथ चंडीगढ़ आई थी तो दोनों ने मजदूरी कर जीवन यापन शुरू किया। छोटे कमरे में रहकर बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाई और धूमधाम से उनकी शादी की। 2011 तक सब ठीक था, लेकिन पति की मौत के बाद सब कुछ बदल गया। बेटियों के केस करने के कारण अब उसकी जिंदगी बदतर हो गई है।  
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किराए के 40 लाख भी रुके
याची ने हाईकोर्ट को बताया कि इंडस्ट्रियल प्लॉट को किराए पर दिया गया है। इस किराए की राशि से ही उसका गुजारा चलता था। बेटियों ने किराएदारों से किराया भी रुकवा दिया। यदि उसको  किराया ही दिलवा दिया जाए तो उसे करीब 40 लाख रुपये बकाया किराए के रूप में ही मिल जाएंगे। हाईकोर्ट ने इस अपील पर किराएदारों को भी नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया है।
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ये है पूरा मामला

याचिका दाखिल करते हुए चंडीगढ़ सेक्टर 22 निवासी जोगिंदर कौर ने एडवोकेट सरोज बाला के माध्यम से हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखा। याची ने बताया कि वह और उसके पति 60 के दशक में चंडीगढ़ आए थे। चंडीगढ़ और मोहाली में इंडस्ट्रियल प्लॉट लिए तथा सेक्टर 22 चंडीगढ़ में एक मकान बनाया। 2011 में पति की मौत के बाद सब कुछ बदल गया।

बेटियों ने प्रॉपर्टी के लिए केस दाखिल कर दिया और दोनों इंड्रस्ट्रियल प्लॉट के किराए भी रुकवा दिए। याची ने बताया कि किराया ही उसकी आय का साधन था। ऐसे में अब वह कौड़ियों की मोहताज हो गई है। याची ने बताया कि उसने मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल में याचिका दाखिल की थी, जो मंजूर तो हो गई लेकिन कोई राहत नहीं दी गई। ऐसे में अब वह दवाओं तक के लिए मोहताज हो गई है।

पीजीआई में दाखिल करवाया गया तो वहां से घर वापस भेज दिया गया और कहा गया कि अब इनकी सेवा की जाए। याची ने कहा कि वह कौड़ियों को मोहताज है तो सेवा कैसे होगी। हाईकोर्ट से याची ने कहा कि उसे लंबित किराया ही दिला दे दिया जाए, ताकि वह सम्मान से जीवन जी सके। हाईकोर्ट ने अब नोटिस जारी कर प्रतिवादियों से जवाब मांग लिया है।
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