Ukraine Crisis : पंजाब के 900 से ज्यादा विद्यार्थियों के यूक्रेन में फंसे होने की आशंका
500 पंजाबियों की जानकारी सरकार तक पहुंची। सरकारी अधिकारियों ने कहा है कि संबंधित जिला प्रशासन के साथ साझा किए गए इस ब्योरे को इन विद्यार्थियों की सुरक्षित वापसी के लिए केंद्र सरकार के पास भेज दिया गया है।
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पंजाब सरकार को यूक्रेन में फंसे 500 से अधिक पंजाबी विद्यार्थियों की जानकारी मिल चुकी है। इसके आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि राज्य के 900 से ज्यादा विद्यार्थी यूक्रेन पढ़ने गए हुए हैं। सरकारी अधिकारियों ने कहा है कि संबंधित जिला प्रशासन के साथ साझा किए गए इस ब्योरे को इन विद्यार्थियों की सुरक्षित वापसी के लिए केंद्र सरकार के पास भेज दिया गया है।
जिलों में डीसी और एसपी कार्यालयों में पहुंच रहे विद्यार्थियों के परिजनों से मिल रही जानकारी के आधार पर जो डाटा तैयार किया जा रहा है, उसे कंट्रोल रूम द्वारा कंपाइल करके केंद्र सरकार को भेजा जा रहा है। अब तक मिली जानकारी के अनुसार, कपूरथला जिले के 27, जालंधर के 53, फरीदकोट के 12, नवांशहर के 28, लुधियाना के 38 विद्यार्थियों के यूक्रेन में फंसे होने की सूचना है। जबकि विद्यार्थियों के परिजनों द्वारा कंट्रोल रूम से संपर्क करने का सिलसिला जारी है। उधर, यूक्रेन से लौटी एक छात्रा ने अमृतसर के डीसी को जिले के 52 विद्यार्थियों की सूची सौंपी है, जो वहां फंसे हुए हैं।
कांग्रेस सांसद ने पीएम को लिखा पत्र
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है कि ‘सोशल मीडिया पर विद्यार्थियों के दिल पसीज देने वाले वीडियो सामने आ रहे हैं। हमारे बच्चों के साथ यूक्रेन-पोलैंड सीमा पर बहुत बुरा बर्ताव किया जा रहा है। मैं जानता हूं कि यह मुश्किल घड़ी है, लेकिन हमारे हजारों बच्चे अभी तक यूक्रेन के विभिन्न हिस्सों में फंसे हैं। बच्चों के पास यातायात के साधन नहीं हैं और वे कई दिन से भूखे-प्यासे भी हैं।’
पांच दिन से खारकीव के मेट्रो स्टेशन पर फंसे 100 विद्यार्थियों को निकाला
यूक्रेन और रूस के बीच चल रही जंग के कारण यूक्रेन के खारकीव शहर के एक मेट्रो स्टेशन पर 100 से ज्यादा भारतीय विद्यार्थी पांच दिन तक फंसे रहे। मंगलवार देर रात विद्यार्थियों को वहां से निकाला गया है। बुधवार रात आठ बजे सभी हंगरी बॉर्डर पर पहुंचेंगे। सभी विद्यार्थी सही सलामत हैं, मगर सभी घबराए हुए हैं। जब तक वह सभी अपने घर नहीं पहुंच जाते अभिभावकों में चिंता बनी रहेगी।
शहर के नजदीक हरमिलाप नगर फेज-1 निवासी शेफाली शर्मा यूक्रेन में एमबीबीएस के पांचवें साल की पढ़ाई कर रही है। वह नवंबर में भारत आई थीं और दिसंबर में वापस चली गईं। शेफाली की बहन दीपाली ने बताया कि बहन के यूक्रेन में फंसे होने के कारण उन्हें बहुत ज्यादा चिंता हो रही है। वहीं, सेक्टर-15 निवासी विशु रोहिल्ला भी वहीं पर फंसे हैं। वह भी एमबीबीएस करने के लिए यूक्रेन गए थे।
हर वक्त रहती है टीवी पर नजर
शेफाली की बहन दीपाली ने बताया कि कि चिंता के कारण हर समय टीवी देखते रहते हैं और वहां के हालात का जायजा लेते हैं। इसके अलावा नेटवर्क में दिक्कत होने के कारण शेफाली से भी बात बहुत कम हो पाती हैं। यूक्रेन से निकलने की जद्दोजहद में सभी विद्यार्थी लगे हुए हैं।
बुधवार दोपहर तीन बजे पहुंचे लवीव शहर
खारकीव से ट्रेन के माध्यम से सभी विद्यार्थियों को खारकीव से रवाना किया गया। इसके बाद भारतीय समय के अनुसार बुधवार दोपहर तीन बजे वे सभी लवीव शहर में पहुंचे। वहां से बसों में सवार होकर सभी हंगरी बॉर्डर के लिए रवाना हुए हैं। रात आठ बजे तक हंगरी बॉर्डर पर पहुंचने की उम्मीद है।
एक-दूसरे को हौसला दे काट रहे समय
खारकीव के जिस मेट्रो स्टेशन पर भारतीय विद्यार्थी पांच दिन तक फंसे रहे, वहां गोलियां और बमबारी की आवाज साफ सुनाई दे रही थी। सभी विद्यार्थी सहमे हुए हैं, मगर एक दूसरे को हौसला दे रहे हैं। सभी एक-दूसरे को कह रहे हैं कि वो सही सलामत अपने वतन जरूर लौटेंगे।
सरकार से नहीं मिली खास मदद
दीपाली बताती हैं कि खारकीव में फंसे भारतीय विद्यार्थियों को अभी सरकार से कोई मदद नहीं मिल पाई है। सभी अपने रिस्क पर ही खारकीव छोड़कर हंगरी बॉर्डर पर जा रहे हैं। सरकार से अपील है कि सभी भारतीय विद्यार्थियों की सकुशल वतन वापसी कराई जाए ताकि यहां चिंता में पड़े उनके परिवारों को राहत मिल सके।
पिता करते हैं प्राइवेट नौकरी
शेफाली शर्मा के पिता पवन शर्मा एक कंपनी में नौकरी करते हैं। माता का नाम नीलम शर्मा है। शेफाली तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी है। उससे छोटी बहन दीपाली शर्मा है जो एमबीए कर रही है। सबसे छोटा भाई परिचय शर्मा है।