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चंडीगढ़ स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता: वर्षों से खाली पड़े हैं 121 सरकारी आवास, किसी को नहीं किए जा रहे अलॉट  

Mon, 21 Feb 2022 10:47 AM IST
निवेदिता वर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 21 Feb 2022 10:47 AM IST
सार

कर्मचारियों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग जानबूझकर उन आवासों को अलॉट नहीं कर रहा है, क्योंकि अगर डॉक्टरों के आवास उनके रहने योग्य नहीं है तो उसे अन्य कर्मचारियों को अलॉट किया जा सकता है। इससे साफ पता चलता है कि ये आवास स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण खाली पड़े हैं।

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More than 121 government houses allotted to Health Department of Chandigarh have been lying vacant 
चंडीगढ़ में खाली पड़े सरकारी आवास। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ जैसे आधुनिक शहर में घर होने का सपना हर कोई देखता है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग का रवैया इस मामले में बेहद निराशाजनक है। उसे अलॉट किए गए 121 से ज्यादा सरकारी आवास वर्षों से खाली पड़े हैं। इनमें डॉक्टरों के 65 व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के 56 आवास शामिल हैं। कर्मचारियों के आवास पांच साल से ज्यादा जबकि डॉक्टरों के आवास लंबे समय से खाली पड़े हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इसके अतिरिक्त 2018 में स्वास्थ्य विभाग 42 घरों को प्रशासन को सरेंडर कर चुका है। इससे एक बात साफ हो गई है कि उच्च अधिकारियों को सरकारी संपत्ति के नुकसान और आर्थिक हानि से कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। जबकि आरटीआई में स्वास्थ्य विभाग ने माना भी है कि काफी आवास खाली पड़े हैं।

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इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों का कहना है कि टाइप 10 के आवास डॉक्टरों को अलॉट किए गए हैं। ऐसे में उन आवासों में डॉक्टर भला कैसे रह सकते हैं। वहीं दूसरी तरफ यह भी समझना बेहद जरूरी है कि चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी जो एक कमरे के आवास के लिए 10,000 रुपये से ज्यादा किराया अदा कर रहे हैं, उन्हें भी आवास नहीं दिया जा रहा। ये कर्मचारी लगातार इसके लिए उच्च अधिकारियों से आग्रह कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग जानबूझकर उन आवासों को अलॉट नहीं कर रहा है, क्योंकि अगर डॉक्टरों के आवास उनके रहने योग्य नहीं है तो उसे अन्य कर्मचारियों को अलॉट किया जा सकता है। इससे साफ पता चलता है कि ये आवास स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण खाली पड़े हैं।

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आरटीआई एक्टिविस्ट आरके गर्ग बोले- यहां ढूंढे नहीं मिल रहे मकान और उधर...

आरटीआई एक्टिविस्ट आरके गर्ग का कहना है कि चंडीगढ़ जैसे आधुनिक शहर में लोगों को किराए पर रहने के लिए आवास नहीं मिल रहे हैं। कम वेतन वाले कर्मचारी 15 से 20,000 रुपये मासिक किराया देकर मकानों में रहने को मजबूर हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के तहत 100 से ज्यादा मकानों का खाली रहना बेहद दुखद है। स्वास्थ्य विभाग के साथ ही प्रशासन को भी इस ओर गंभीरता से सोचने की जरूरत है, क्योंकि इससे सरकारी धन की भी क्षति हो रही है। उन मकानों की मरम्मत करवाकर उसे उपयोग में लाया जाना बेहद जरूरी है। प्रशासन स्वास्थ्य विभाग के साथ ही अन्य विभागों में भी खाली पड़े आवासों की सूची तैयार कर उसकी मरम्मत करवाएं और उसे जरूरतमंद कर्मचारियों को अलॉट करें, ताकि उससे आर्थिक क्षति रोकने के साथ ही सरकारी संपत्ति की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सके।

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इन कर्मचारियों से किया वादा भी तोड़ दिया

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अनुबंधित कर्मचारियों ने कई वर्षों से स्वास्थ्य विभाग में खाली पड़े मकानों को एनएचएम कर्मचारियों को किराए पर देने की मांग की थी। इस मांग को पूर्व निदेशक, स्वास्थ्य डॉ. अमनदीप कौर कंग द्वारा एनएचएम यूनियन के साथ जुलाई 2021 में हुई मीटिंग के दौरान स्वीकृति भी दे दी गई थी, परंतु अभी तक कर्मचारियों के हाथ कुछ नहीं लगा है। कर्मचारियों का कहना है कि विभाग द्वारा बार बार यही कहा जा रहा है कि फाइल को स्वास्थ्य सचिव के पास भेजा गया है। कर्मचारियों के अनुसार एनएचएम कर्मचारियों की मांग को मानते हुए अगर उन खाली आवासों को उन्हें किराए पर दिए जाय तो विभाग की आय बढ़ेगी और जर्जर हालत में मकान की देखभाल सही ढंग से हो पाएगी।

यहां खाली पड़े हैं आवास

स्वास्थ्य विभाग के तहत सेक्टर 24, सिविल अस्पताल मनीमाजरा, आयुर्वेदिक डिस्पेंसरी सेक्टर- 28, सेक्टर- 35 और सेक्टर- 19 के सरकारी आवास शामिल हैं।
 

स्वास्थ विभाग के तहत खाली आवासों की संख्या काफी ज्यादा बताई जा रही है। कुछ संख्या में आवास खाली हैं, जिसके लिए अलग-अलग कारण जिम्मेदार हैं। जहां तक उसे अलॉट न करने के कारण की बात है तो उस संबंध में सोमवार को पता किया जाएगा। -डॉ. सुमन सिंह, स्वास्थ्य निदेशक 

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