हरियाणा कैबिनेट का फैसला: जमीन अदला-बदली पर नहीं लगेगी स्टांप ड्यूटी, सिर्फ देने होंगे पांच हजार रुपये
टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली हॉकी टीम में हरियाणा के दोनों खिलाड़ियों को ढाई-ढाई करोड़ रुपये और ग्रुप बी की नौकरी देने का फैसला लिया गया। उन्हें खेल विभाग में सीनियर कोच के पद पर नियुक्त किया जाएगा।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हरियाणा में कृषि योग्य भूमि के आदान-प्रदान पर अब सात प्रतिशत स्टांप शुल्क नहीं लगेगा, बल्कि प्रति डीड (रजिस्ट्री) पर पांच हजार रुपये ही देने होंगे। मंत्रिमंडल की बैठक में इस फैसले पर मुहर लगाई गई है। इससे लाखों की संख्या में किसानों को राहत मिलेगी। पंजाब समझौता नियमावली के पैरा 259 में उपबंधित कृषि योग्य भूमि जिसमें बैरानी, सैलाबी, अबी, नहरी और चाही भूमि शामिल है। इसके आदान-प्रदान के संबंध में भारतीय स्टांप अधिनियम,1899 की अनुसूची 1-क के अनुच्छेद 31 के तहत पंजीकरण की प्रति डीड पांच हजार की स्वीकृति प्रदान की गई है। हालांकि, इसमें शर्त ये रहेगी कि कृषि भूमि का आदान-प्रदान उसी राजस्व संपदा में होना चाहिए।
अब डुप्लीकेट पासबुक के लिए जरूरी नहीं पुलिस रिपोर्ट
हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा किसान पास बुक नियम, 1996 के विभिन्न प्रावधानों में संशोधन को मंजूरी दी गई। इन नियमों को हरियाणा किसान पास बुक (संशोधन) नियम, 2021 कहा जाएगा। संशोधनों के अनुसार ’ज्वाइनली’ शब्द को ’ज्वाइंटली’ शब्द से प्रतिस्थापित किया जाएगा। साथ ही ’पासबुक’ शब्दों के स्थान पर ’किसान पासबुक’ शब्द होगा। अगर किसान की पासबुक गुम हो जाती है या क्षतिग्रस्त होती है तो उसे डुप्टीकेट के लिए पुलिस की रिपोर्ट की जरूरत नहीं होगी।
भूमि अधिग्रहण को सरल करने की तैयारी
भूमि अधिग्रहण में आ रही अड़चनों को देखते हुए राज्य सरकार भूमि अधिग्रहण के नियम के सरलीकरण की तैयारी कर रही है। इसके लिए भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन (हरियाणा संशोधन) विधेयक, 2021 में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार’ को तैयार (फ्रेमिंग) करने को मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी है। इसके तहत उचित मुआवजे और पारदर्शिता के अधिकार में संशोधन करने का प्रस्ताव है। पिछले अधिग्रहणों में हरियाणा को गंभीर मुद्दों का सामना करना पड़ रहा है। रेलवे लाइनों या सड़कों के दोनों किनारों पर दो किलोमीटर तक भूमि का अधिग्रहण किया जा सकता है।