{"_id":"5de6cb768ebc3e54914278c3","slug":"molestation-and-rape-in-chandigarh-every-other-day-chandigarh-news-pkl358820621","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"चंडीगढ़ में भी सुरक्षित नहीं लड़कियां, अपनों की रहती गंदी नजर, हर दूसरे दिन दुष्कर्म या छेड़छाड़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चंडीगढ़ में भी सुरक्षित नहीं लड़कियां, अपनों की रहती गंदी नजर, हर दूसरे दिन दुष्कर्म या छेड़छाड़
Wed, 04 Dec 2019 11:17 AM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमित गुप्ता/अमर उजाला, चंडीगढ़
अमित गुप्ता/अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Wed, 04 Dec 2019 11:17 AM IST
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
तेलंगाना में महिला डॉक्टर से दुष्कर्म और हत्या के मामले में पूरे देश में आक्रोश है। वहीं, सेफ सिटी मानी जाने वाले चंडीगढ़ में भी दुष्कर्म और छेड़छाड़ के मामले कम नहीं हैं। पुलिस आंकड़ों के मुताबिक जनवरी से अब तक चंडीगढ़ में हर दूसरे दिन छेड़छाड़ या दुष्कर्म की घटनाएं सामने आईं हैं। शहर के सबसे वीआईपी एरिया सेक्टर 17 थाना अंतर्गत सबसे ज्यादा दुष्कर्म के मामले में आए हैं। वहीं, इंडस्ट्रियल एरिया थाना अंतर्गत छेड़छाड़ के मामले सबसे अधिक हैं।
पुलिस आंकड़ों के अनुसार जनवरी वर्ष 2019 से अब तक शहर के अलग-अलग थाना क्षेत्र में दुष्कर्म के 101 मामले दर्ज हुए हैं। इनमें से पुलिस ने 84 केसों को सुलझाकर 85 लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि छेड़छाड़ के 65 मामलों में पुलिस 46 केस सुलझाकर 50 लोगों को सलाखों के पीछे भेज चुकी हैं। दुष्कर्म के सबसे ज्यादा मामले सेक्टर 17, 31, 34, 36, सारंगपुर थाना क्षेत्र में दर्ज हुए हैं, जबकि छेड़छाड़ के मामले इंडस्ट्रियल एरिया, सेक्टर 34, 39, 31, 11 और 36 थाने में दर्ज हुए हैं।
एक अनुमान के अनुसार 336 दिनों में दुष्कर्म और छेड़छाड़ की 166 वारदात घटित हो चुकी हैं। चंडीगढ़ के लिए यह आंकड़े चौंकाने वाले हैं। जब घटनाएं सोशल मीडिया पर वायरल होतीं हैं तो देशभर में आक्रोश फैल जाता है, लेकिन हर रोज महिलाओं और बेटियों के साथ हो रही घटनाओं की ओर शायद किसी का ध्यान नहीं जाता है। यह आंकड़े बताते हैं कि चंडीगढ़ भी महिलाओं केलिए सुरक्षित नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन
पुलिस आंकड़ों के अनुसार जनवरी वर्ष 2019 से अब तक शहर के अलग-अलग थाना क्षेत्र में दुष्कर्म के 101 मामले दर्ज हुए हैं। इनमें से पुलिस ने 84 केसों को सुलझाकर 85 लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि छेड़छाड़ के 65 मामलों में पुलिस 46 केस सुलझाकर 50 लोगों को सलाखों के पीछे भेज चुकी हैं। दुष्कर्म के सबसे ज्यादा मामले सेक्टर 17, 31, 34, 36, सारंगपुर थाना क्षेत्र में दर्ज हुए हैं, जबकि छेड़छाड़ के मामले इंडस्ट्रियल एरिया, सेक्टर 34, 39, 31, 11 और 36 थाने में दर्ज हुए हैं।
विज्ञापन
एक अनुमान के अनुसार 336 दिनों में दुष्कर्म और छेड़छाड़ की 166 वारदात घटित हो चुकी हैं। चंडीगढ़ के लिए यह आंकड़े चौंकाने वाले हैं। जब घटनाएं सोशल मीडिया पर वायरल होतीं हैं तो देशभर में आक्रोश फैल जाता है, लेकिन हर रोज महिलाओं और बेटियों के साथ हो रही घटनाओं की ओर शायद किसी का ध्यान नहीं जाता है। यह आंकड़े बताते हैं कि चंडीगढ़ भी महिलाओं केलिए सुरक्षित नहीं है।
विज्ञापन
60 पीसीआर और 55 चीता स्क्वॉयड, अपराध पर अंकुश नहीं
पुलिस ने क्राइम रोकने के लिए 60 पीसीआर समेत 55 से ज्यादा चीता स्क्वॉयड अलग-अलग थाना क्षेत्रों में मुस्तैद की है। इतनी बड़ी फौज होने के बावजूद अपराध पर लगाम लगाना संभव नहीं हो पा रहा है। अपराधी बेखौफ होकर अपराध कर रहे हैं। शहर की पुलिस का डर शायद उनके मन में है ही नहीं, इसलिए दुष्कर्म और छेड़छाड़ की घटनाओं का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। वहीं, चंडीगढ़ पुलिस पीसीआर स्कूल, कॉलेजों समेत अन्य भीड़भाड़ वाली जगहों पर ज्यादा गश्त करने का दावा करती है।
अपनों के बीच सुरक्षित नहीं हैं महिलाएं
पुलिस आंकड़ों के अनुसार छेड़छाड़ और दुष्कर्म की वारदात में ज्यादातर अपने ही शामिल हैं। इन वारदातों में पुलिस करीब 70 प्रतिशत तक केस को सुलझा चुकी है। ज्यादातर केस में परिजन अपने बच्चों को घर में अकेला छोड़कर काम पर चले जाते हैं। ऐसे में पड़ोसी या फिर रिश्तेदार इसका फायदा उठाकर बच्चों के साथ दुष्कर्म या छेड़छाड़ की घटनाओं को अंजाम देकर फरार हो जाते हैं।
भागदौड़ भरी जिंदगी में परिजन बच्चों पर नहीं दे रहे ध्यान
अधिवक्ता मंजीत कौर का मानना है कि लगातार भागदौड़ भरी जिंदगी में हम बच्चों को समय नहीं दे पा रहे हैं। वहीं, कुछ गरीब तबके के लोग रोजी-रोटी कमाने के चक्कर में बच्चों को घर पर अकेला छोड़ देते हैं। यही मौके होते हैं जब अपराधी घटनाओं को अंजाम देते हैं, इसलिए बच्चों की देखरेख की जिम्मेदारी अब परिजनों को अपने हाथ लेनी होगी। तभी इन घटनाओं पर रोक लगाने में सफलता मिलेगी।
अपनों के बीच सुरक्षित नहीं हैं महिलाएं
पुलिस आंकड़ों के अनुसार छेड़छाड़ और दुष्कर्म की वारदात में ज्यादातर अपने ही शामिल हैं। इन वारदातों में पुलिस करीब 70 प्रतिशत तक केस को सुलझा चुकी है। ज्यादातर केस में परिजन अपने बच्चों को घर में अकेला छोड़कर काम पर चले जाते हैं। ऐसे में पड़ोसी या फिर रिश्तेदार इसका फायदा उठाकर बच्चों के साथ दुष्कर्म या छेड़छाड़ की घटनाओं को अंजाम देकर फरार हो जाते हैं।
भागदौड़ भरी जिंदगी में परिजन बच्चों पर नहीं दे रहे ध्यान
अधिवक्ता मंजीत कौर का मानना है कि लगातार भागदौड़ भरी जिंदगी में हम बच्चों को समय नहीं दे पा रहे हैं। वहीं, कुछ गरीब तबके के लोग रोजी-रोटी कमाने के चक्कर में बच्चों को घर पर अकेला छोड़ देते हैं। यही मौके होते हैं जब अपराधी घटनाओं को अंजाम देते हैं, इसलिए बच्चों की देखरेख की जिम्मेदारी अब परिजनों को अपने हाथ लेनी होगी। तभी इन घटनाओं पर रोक लगाने में सफलता मिलेगी।
थाना---------दुष्कर्म---गिरफ्तार---छेड़छाड़---गिरफ्तार
इंडस्ट्रियल एरिया-- 7----- -6--------- 9------- 4
सेक्टर 3--------- 1------ 1-------- 7------- 4
सेक्टर 11-------- 7------ 7-------- 5------- 4
सेक्टर 17-------- 11----- 3-------- 1------- 1
सारंगपुर----------- 8-----9-----------2------ 2
सेक्टर 19--------- 7-----5---------- 3------ 2
सेक्टर 26--------- 4---- 4---------- 1------ 1
मनीमाजरा---------- 2----2---------- 3------ 2
मौलीजागरां--------- 9---- 9---------- 1----- 1
आईटी पार्क---------3-----3---------- 2------ 2
सेक्टर31---------- 10---- 9-------- 7------- 5
सेक्टर 34---------- 9----- 7------- 7------- 7
सेक्टर 36---------- 8----- 7------- 5------- 5
सेक्टर 39---------- 9----- 6------- 7------ 6
सेक्टर 49--------- 2------ 2------- 2------2
मलोया------------ 4------ 4------- 3----- 2
दुष्कर्म और छेड़छाड़ के ज्यादातर केसों में पीड़ित के करीबी ही होते हैं। पुलिस इनमें से ज्यादातर केसों को सुलझा चुकी है। इसके अलावा हमारी टीम स्कूल और कॉलेजों में गुड और बैड टच की जानकारी भी बच्चियों को देती है। ऐसे केसों में टीम तत्परता से काम करती है।
- नीलांबरी विजय जगदले, एसएसपी चंडीगढ़
इंडस्ट्रियल एरिया-- 7----- -6--------- 9------- 4
सेक्टर 3--------- 1------ 1-------- 7------- 4
सेक्टर 11-------- 7------ 7-------- 5------- 4
सेक्टर 17-------- 11----- 3-------- 1------- 1
सारंगपुर----------- 8-----9-----------2------ 2
सेक्टर 19--------- 7-----5---------- 3------ 2
सेक्टर 26--------- 4---- 4---------- 1------ 1
मनीमाजरा---------- 2----2---------- 3------ 2
मौलीजागरां--------- 9---- 9---------- 1----- 1
आईटी पार्क---------3-----3---------- 2------ 2
सेक्टर31---------- 10---- 9-------- 7------- 5
सेक्टर 34---------- 9----- 7------- 7------- 7
सेक्टर 36---------- 8----- 7------- 5------- 5
सेक्टर 39---------- 9----- 6------- 7------ 6
सेक्टर 49--------- 2------ 2------- 2------2
मलोया------------ 4------ 4------- 3----- 2
दुष्कर्म और छेड़छाड़ के ज्यादातर केसों में पीड़ित के करीबी ही होते हैं। पुलिस इनमें से ज्यादातर केसों को सुलझा चुकी है। इसके अलावा हमारी टीम स्कूल और कॉलेजों में गुड और बैड टच की जानकारी भी बच्चियों को देती है। ऐसे केसों में टीम तत्परता से काम करती है।
- नीलांबरी विजय जगदले, एसएसपी चंडीगढ़