फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   mohanveena player vishav mohan bhatt in chandigarh, special interview on classical music

क्लासिकल म्यूजिक पर खुलकर बोले पद्मश्री विजेता आर्टिस्ट, इंटरव्यू

Sat, 05 Nov 2016 10:28 AM IST
शबनम कौर/अमर उजाला, चंडीगढ़
शबनम कौर/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 05 Nov 2016 10:28 AM IST
विज्ञापन
mohanveena player vishav mohan bhatt in chandigarh, special interview on classical music
चंडीगढ़ में मोहनवीणा के साथ प्रस्तुति देते हुए विश्व मोहन भट्ट
50 साल में 83 देशों में परफॉर्म कर चुके ग्रैमी अवार्ड विजेता आर्टिस्ट ने क्लासिकल म्यूजिक पर बोलना शुरू किया तो सब सुनते ही रह गए। ‘संगीत भगवान का आशीर्वाद है और उसकी अपनी भाषा होता है। इसे सीखा नहीं जाता बल्कि यह अपने आप आता है। जिसे भगवान का यह आशीर्वाद मिलता है उसे कुछ मात्रा में सीखने  की जरूरत होती है। क्लासिकल म्यूजिक मास की जगह एक क्लास तक सिमट कर रह चुका है।’
विज्ञापन


यह कहना है जाने माने वादक पदमश्री और ग्रैमी पुरस्कार प्राप्त पंडित विश्व मोहन भट्ट का। वह एक कार्यक्रम के सिलसिले में शुक्रवार को सिटी ब्यूटीफुल आए थे। अमर उजाला के साथ एक खास बातचीत में उन्होंने म्यूजिक के क्षेत्र में अपने अनुभव और अपने वाद्य यंत्र मोहन वीणा के बारे में कुछ बातें साझा कीं। वह 83 देशों में अपनी मोहनवीणा पर प्रस्तुति दे चुके हैं। 1993 में उन्हें ग्रैमी अवॉर्ड और 2002 में पदमश्री से नवाजा गया।
विज्ञापन


मोहनवीणा के बारे में उन्होंने बताया, ‘मैं 15 साल का था जब जर्मनी की एक लड़की मेरे पिता से म्यूजिक सीखने आई। उस लड़की के हाथ में गिटार था। मैं लड़की की खूबसूरती और उस वाद्ययंत्र से बहुत आकर्षित हुआ और उससे संबंधित अपना खुद का वाद्ययंत्र मोहन वीणा का निर्माण करने की सोची। अब मैं 65 वर्ष का हूं और पिछले 50 साल से इसी वाद्ययंत्र को प्ले कर रहा हूं।
विज्ञापन
विज्ञापन


प्रस्तुति का केवल 25 प्रतिशत भाग मंच पर जाने से पहले निर्धारित किया जाता है। उसके बाद का हिस्सा एक खाली कैनवस की तरह होता है उसमें किन स्वरों से रंग भरने है यह मालूम नहीं होता। लेकिन माहौल और आडियंस के हिसाब से अपने आप उस खाली कैनवस में स्वरों के रंग भरने शुरू हो जाते हैं।’

राग पंडित रविशंकर से सीखे
उन्होंने बताया, ‘पंडित रविशंकर से 1983 में सितार की शिक्षा लेनी शुरू की। इस दौरान अगर पांच मिनट भी उनसे बात हो जाती तो अपने आप को धन्य समझता था। रागों की समझ मुझे उनसे मिली। स्वरों का ज्ञान मुझे मां से मिला। यह निराशा की बात है कि आज के समय में शास्त्रीय संगीत की हालत ठीक नहीं है और भविष्य में कभी इसके हालात ठीक होने के आसार भी नहीं है।’


सरकार छोटी, कला बड़ी
उन्होंने कहा कि शास्त्रीय संगीत को बढ़ाने के लिए हम सरकार के भरोसे नहीं रह सकते। आपने देखा होगा कि आर्ट और आर्टिस्ट कभी किसी पोलिटिकल पार्टी के एजेंडे का हिस्सा नहीं होते और न ही कभी कोई कलाकर किसी धरने पर बैठता है। वह अपने ढंग से ही अपना काम करते हैं और अपने काम के प्रति न्योछावर होते है। इसलिए कला सरकार से कहीं ज्यादा बड़ी है। और इसके प्रसार के लिए कलाकराों को स्वयं ही प्रयत्न करना पड़ेगा।

क्या है मोहन वीणा
मोहन वीणा सितार, सरोद, वीणा और गिटार का सुमेल है। इसमें कुल 20 स्ट्रिंग होती हैं जिनमें तीन मैलोडी स्ट्रिंग होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed