मोहाली ब्लास्ट: रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड के इस्तेमाल से सकते में खुफिया एजेंसियां, 250 मीटर तक में मचा सकता है तबाही
भारत में आतंकियों तक पहुंच गए इस नए हथियार को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों इसलिए भी चिंतित हो उठी हैं, क्योंकि भारत में नेताओं की सुरक्षा के लिए जो मानदंड तय हैं, यह हथियार उसमें सेंध लगा सकता है।
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मोहाली में पंजाब पुलिस के इंटेलिजेंस विंग के मुख्यालय पर हुए हमले ने पंजाब के अलावा राष्ट्रीय खुफिया एजेंसियों को भी सकते में ला दिया है। मंगलवार को एनआईए के साथ-साथ भारतीय सेना के अधिकारियों ने भी घटनास्थल का दौरा करके फीडबैक हासिल किया। हालांकि पंजाब सरकार ने हमले की जांच अब तक एनआईए को नहीं सौंपी है लेकिन जांच के काम में इस राष्ट्रीय एजेंसी का सहयोग लिया जा रहा है।
इस हमले में राष्ट्रीय खुफिया एजेंसियों के लिए खास बात यह है कि पहली बार हमलावरों ने आरपीजी यानी रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड (राकेट के जरिए दागा जाने वाला ग्रेनेड) का इस्तेमाल किया है। पंजाब में आतंकवाद के दौर में भी इस हथियार का उपयोग नहीं हुआ था और पाकिस्तान से भारत में मुंबई समेत अन्य राज्यों में भी आतंकी हमलों के दौरान यह हथियार सामने नहीं आया था। हालांकि जम्मू-कश्मीर में घरों के करीब हमलों के दौरान आतंकियों द्वारा इस हथियार का इस्तेमाल होता रहा है। जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों ने मारे गए आतंकवादियों के पास से आरपीजी बरामद किए हैं और इसके इस्तेमाल के सबूत भी मिले हैं। फिलहाल यह हथियार अफगानिस्तान में आतंकी पाक-अफगान सीमा पर इस्तेमाल करते हैं।
- Prasar Bharati News Services (@pbns_india) 11 May 2022
भारत में आतंकियों तक पहुंच गए इस नए हथियार को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों इसलिए भी चिंतित हो उठी हैं, क्योंकि भारत में नेताओं की सुरक्षा के लिए जो मानदंड तय हैं, यह हथियार उसमें सेंध लगा सकता है। इस तरह देश के गणमान्य व्यक्तियों और उनके घरों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। इधर, पंजाब का इंटेलिजेंस विंग अब तक मिले सुरागों की कड़ियां जोड़ने में जुट गया है। इस हमले को जहां पाकिस्तान में बैठे बब्बर खालसा के हरविंदर सिंह रिंदा के जोड़ा जा रहा है, वहीं राज्य के गैंगस्टरों के विदेशों में संपर्कों को भी खंगाला जा रहा है। फिलहाल इंटेलिजेंस विंग इसे आतंकी हमला मान रहा है।
बख्तरबंद वाहनों और इमारतों को नुकसान पहुंचा सकता है आरपीजी
मोहाली में बरामद हथियार का विस्तृत फॉरेंसिक विश्लेषण किया जा रहा है, लेकिन पहली नजर में विशेषज्ञों का मानना है कि यह आरपीजी पीजी -22 नेटो संस्करण का हथियार है। इस तरह के आरपीजी में एक फ्रंट-लोडिंग ट्यूब होती है, जिससे फायर किया जाता है। यह 250 मीटर की कुल प्रभावी सीमा के साथ 200 मीटर की सीमा तक गंभीर क्षति पहुंचा सकता है। यह 400 मिमी कवच, 1.2 मीटर ईंट या 1 मीटर कंक्रीट में प्रवेश कर सकता है। दरअसल, आरपीजी सोवियत मूल का एक हथियार है जिसका पहली बार उपयोग प्रथम विश्व युद्ध के दौरान हुआ था। इसे हाथ से फेंका जाने वाला टैंकरोधी ग्रेनेड लांचर कहा गया था। यह एक पोर्टेबल, कंधे पर रखकर चलाया जाने वाला हथियार है, जिसे संचालित करना आसान है। यह बख्तरबंद वाहनों और इमारतों के खिलाफ व्यापक क्षति का कारण बन सकता है। आरपीजी का व्यापक रूप से वियतनाम संघर्ष के साथ-साथ अफगानिस्तान, सोमालिया, सीरिया, इराक और यहां तक कि जम्मू-कश्मीर में उपयोग किया जाता रहा है।
मुख्यमंत्री की सुरक्षा बढ़ाई गई
मोहाली में हमले के बाद पंजाब में मुख्यमंत्री की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। राज्य पुलिस के सूत्रों के मिली जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री के निर्देश के कारण अब तक साधारण सुरक्षा कवच ही उपलब्ध कराया गया था लेकिन ताजा हालात की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री को अतिरिक्त एवं वीवीआईपी सुरक्षा प्रदान करने का फैसला किया गया है। नई सुरक्षा व्यवस्था की विस्तृत जानकारी देने से इनकार करते हुए सूत्रों ने केवल इतना ही बताया कि अब मुख्यमंत्री के दौरों और उनसे मिलने वालों के बारे में गहनता से छानबीन होगी और सार्वजनिक दौरों के दौरान सुरक्षा घेरा और सघन होगा।
पाकिस्तान ने बनाया नया आतंकी समूह ‘लश्कर ए खालसा’, आईबी ने किया सतर्क
इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) ने देश की बाकी सभी खुफिया एजेंसियों व राज्यों की पुलिस को ‘लश्कर ए खालसा’ नाम संगठन को लेकर सतर्क किया है। यह समूह पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की शह पर बना और सोशल मीडिया से खालिस्तान और कश्मीरी अलगाव के समर्थकों को भड़का कर भर्ती कर रहा है। आशंका है कि आतंकी गतिविधियों और भारत में शांति व्यवस्था बिगाड़ने में इनका इस्तेमाल होगा।
आईबी के अनुसार संगठन का ‘एलईके’ नाम से सोशल मीडिया ग्रुप बनाया गया। पाकिस्तानी खुफिया विभाग के सदस्य फेसबुक पर ‘अमर खालिस्तानी’ नकली नाम से अकाउंट बनाकर इसकी गतिविधियां बढ़ा रहे हैं। एलईके के जरिए अफगान नागरिकों को भी आईएसआई भर्ती कर भारत के खिलाफ और खासतौर से जम्मू-कश्मीर में इस्तेमाल कर सकती है।