मोदी सरकार झुकी, भूमि अधिग्रहण बिल में होगा संशोधन
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भूअधिग्रहण बिल के मुद्दे पर चौतरफा आलोचना झेल रही केंद्र सरकार भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक लाने की तैयारी में है। भूअधिग्रहण विधेयक लोकसभा से पास हो चुका है। लिहाजा अब बिल को राज्यसभा में पास करवाना है। इसलिए किसान हित के हर सुझाव को केंद्र सरकार तरजीह देगी।
सरकार विधेयक को पास करवाने की अवधि समाप्त होने के बाद इस मामले पर आम सहमति बनाने का प्रयास करेगी। यह बात बुधवार को यहां पत्रकारों के साथ बातचीत में केंद्रीय ग्रामीण एवं पंचायती राज मंत्री बीरेंद्र सिंह ने कही। उन्होंने कहा कि केंद्र के भूमि अधिग्रहण विधेयक पर विपक्ष की ओर से मिथ्या प्रचार किया जा रहा है।
जबकि इस भूअधिग्रहण विधेयक में किसान को चार गुना मुआवजा देने, पुर्नस्थापन और पुनर्वास को यथावत रखने की बात शामिल है। विधेयक में संशोधन कर अपनी जमीन पर कास्त करने वाले गरीब किसानों के परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का प्रावधान किया गया है।
इस साल बिल में काफी कमियां हैं
उन्होंने कहा कि साल 2013 में जो भूअधिग्रहण बिल बनाया गया था, उसे एक जनवरी, 2014 में लागू किया गया है। उसके मूल्यांकन के बाद यह पाया गया है कि उसमें काफी कमियां हैं। मूल्यांकन के बाद 54 ऐसी कमियां पाई गईं जो टाइपिंग व स्पेलिंग की गलतियों से जुड़ी हैं।
इसी प्रकार कहीं-कहीं कुछ ऐसे शब्दों का प्रयोग किया गया, जिनका प्रयोग नहीं होना चाहिए था। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि यूपीए सरकार ने हड़बड़ाहट में भूअधिग्रहण कानून बनाया।
बीरेंद्र सिंह ने कहा कि किसानों की मर्जी के बिना उनकी किसी भी जमीन का अधिग्रहण नहीं होगी। हमारी कोशिश यह रहेगी कि 50 से 60 प्रतिशत उन किसानों की सहमति ली जाए, जिनका जमीन पर स्वामित्व हो। शहर से बाहर जो भी जमीन होगी, उसे ग्रामीण क्षेत्र में मानकर डबल मुआवजा दिया जाएगा। इसमें सोलेशियम भी दोगुना होगा।