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भारत- पाकिस्तान सीमा पर लगा मोबाइल टावर, बढ़ी खुफिया एजेंसियों की चिंता

Mon, 30 Jul 2018 09:20 AM IST
अनिल कुमार, अमर उजाला, फिरोजपुर (पंजाब)
अनिल कुमार, अमर उजाला, फिरोजपुर (पंजाब) Updated Mon, 30 Jul 2018 09:20 AM IST
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 Mobile towers mounted on Indo-Pak border, increased worries of increased intelligence agencies
सीमा पर लगा मोबाइल टावर
भारत-पाक सीमा के पास एक निजी मोबाइल कंपनी ने अपना टावर खड़ा कर दिया है। देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बीएसएनएल ने पठानकोट में हुए आतंकी हमले के बाद से सीमावर्ती गांवों में लगे अपने सैटेलाइट फोन दुरुपयोग होने की आशंका में बंद कर दिए थे। अब निजी कंपनी का मोबाइल टावर लगने से खुफिया एजेंसियां चिंतित हैं। 
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भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास स्थित गांव जल्लोके में निजी कंपनी ने मोबाइल टावर लगाया है। इस टावर के लगने से सुरक्षा एजेंसियां चिंतित है। सुरक्षा एजेंसियों को चिंता है कि जिस प्रकार से पाकिस्तानी मोबाइल कंपनियों के टॉवरों की रेंज भारतीय सीमावर्ती गांवों तक पहुंचती है और उसका प्रयोग तस्करों व आईएसआई एजेंटों द्वारा किया जाता है, उसी प्रकार से अब उक्त मोबाइल टावर की रेंज पाकिस्तानी हिस्से में जाएगी और इसका दुरुपयोग होने की आशंका बढ़ जाएगी। 
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पठानकोट एयरबेस पर हुए आतंकी हमले के बाद बीएसएनएल ने अपने सभी सैटेलाइट फोन बंद कर दिए थे, जो सीमांत गांवों में लगे थे। बीएसएनएल ने सीमांत गांवों में मोबाइल व लैंड लाइन की सुविधा तक नहीं दी है। ऐसे में एक निजी कंपनी को कैसे मोबाइल टावर लगाने की स्वीकृति मिल गई, यह चिंताजनक है। बीएसएनएल के जीएम पीएन दोहरे ने कहा कि निजी कंपनी के सरहदी हिस्से के गांव में टावर लगाने की स्वीकृत मिली होगी, तभी वह कंपनी अपना टावर लगा रही है।
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 कंपनी स्वयं ही अपने टावर के रेंज को कवर करेगी ताकि उसका दुरुपयोग न हो पाए। सरहदी हिस्सों में बीएसएनएल द्वारा मोबाइल टावर न लगाए जाने के बारे में पूछे गए सवाल पर उन्होंने चुप्पी साध ली। 


बीएसएनएल को पांच साल से नहीं मिली स्वीकृति 
वहीं बीएसएनएल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारत-पाक सरहद और सतलुज दरिया के बीच लगभग 21 गांव व बस्तियां हैं, जिनमें हजारों लोग रहते है। यहां आठ सरकारी प्राइमरी स्कूल, एक सेकेंडरी और एक मिडिल स्कूल है। इन लोगों द्वारा लंबे समय से मोबाइल टॉवर और लैंडलाइन लगाए जाने की मांग की जा रही थी। इस पर बीएसएनएल द्वारा मोबाइल टावर लगाने की स्वीकृति के लिए अपनी फाइल पांच साल पहले गृह मंत्रालय को भेजी गई थी। विभिन्न बैठकों में भी यह बात उठाई गई, परंतु बीएसएनएल को अभी तक टावर लगाए जाने की स्वीकृति नहीं मिली।
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