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एनटीए का कमाल : बॉटनी के समान प्रश्न के नंबर कटे पर एक की रैंक 212 तो दूसरे की 284

Thu, 06 Jun 2024 05:54 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 06 Jun 2024 05:54 AM IST
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Miracle of NTA: In the same question of Botany, marks were cut but one's rank was 212 and the other's was 284.
चंडीगढ़। एमबीबीएस एस्पिरेंट दीपांशु और कृष ने इस साल नीट-यूजी की परीक्षा दी। दोनों का एक बॉटनी का प्रश्न गलत हुआ, जिसके पांच अंक कटे। समान प्रश्न के अंक कटने के बावजूद दीपांशु की ऑल इंडिया रैंक 212 और कृष की 285 आई है। एनटीए ने किस आधार पर विद्यार्थियों की मेरिट तैयार की, एक ही सेंटर से आठ विद्यार्थियों की रैंक एक कैसे आ गई, कितनों को ग्रेसिंग मार्क्स मिले आदि ऐसे कई आशंकाएं हैं, जो देशभर के लाखों विद्यार्थियों को परेशान कर रही हैं।
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लोकसभा चुनाव के परिणाम घोषित होने के दिन ही अचानक राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा नीट-यूजी का परिणाम घोषित किया। पहली बार 67 विद्यार्थियों की ऑल इंडिया रैंक 1 आई, जिसमें से आठ विद्यार्थी हरियाणा के एक ही सेंटर के हैं। इस पर शिक्षकों द्वारा आपत्ति जताई जा रही है कि एक ही सेंटर से इतने टॉपर कैसे निकल सकते हैं। 720 अंक के पेपर में इस बार दो हजार से अधिक विद्यार्थियों के 700 या उससे अधिक अंक आए हैं। विद्यार्थियों के अंक समान होने के बावजूद उनकी रैंकिंग में बहुत फर्क है। बुधवार को सोशल मीडिया पर कई शिक्षकों और विद्यार्थियों ने एनटीए के परिणामों में आई अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए गए। इस बार विद्यार्थियों के 718-719 अंक भी आए हैं जोकि मुमकिन नहीं है क्योंकि एक सही प्रश्न के पांच अंक मिलते हैं और नेगेटिव मार्किंग में चार या पांच अंक कटते हैं। इस पर एनटीए ने स्पष्टीकरण डाला कि कुछ विद्यार्थियों के पेपर शुरू होने में हुए विलंब और उसके कारण उनका समय बर्बाद होने पर उन्हें ग्रेसिंग मार्क्स दिए हैं, जिसके तहत उनके 718-19 अंक आ सकते हैं। हालांकि कितने विद्यार्थियों को ग्रेसिंग मार्क्स मिले, किस आधार पर मिला इसे लेकर कोई जानकारी नहीं मिली है।
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पेपर आसान था लेकिन इतना भी नहीं कि दो हजार से ज्यादा के 700 से ज्यादा अंक आ जाएं :
नीट का इस बार का पेपर तुलनात्मक रूप से आसान था लेकिन इतना भी नहीं था कि दो हजार से ज्यादा बच्चों के 720 में से 700 या उससे अधिक नंबर आए जाएं। 700 नंबर लाने पर मेरी 1761 रैंक आई है, जबकि समान अंक वालों की 1500 के करीब रैंक भी आई है। अपनी रैंक से खुश नहीं हूं और न ही एनटीए के परिणामों से। पहले 600 नंबरों तक सेंटर के कॉलेज मिल जाते थे। अब राज्य के कॉलेज में दाखिला लेना पड़ेगा। -अंगद वीर सिंह, नीट एस्पिरेंट, एआईआर 1761
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विद्यार्थी होने के नाते स्पष्ट परीक्षा और परिणाम की अपेक्षा :
ग्यारहवीं में कैथल से शिफ्ट होकर चंडीगढ़ में नीट की तैयारी करने आया था ताकि अच्छी पढ़ाई हो सके। 720 में से 710 अंक आए हैं और एआईआर 388 है, जबकि समान अंक वालों का रैंक 325 भी है। पहले एनटीए ने अपनी वेबसाइट पर मार्क्स का पीडीएफ अपलोड किया था पर सवाल उठने पर उसे हटा दिया। पेपर लीक की खबर भी सामने आई थी, रैंकिंग पहले कभी इतनी ज्यादा इनफ्लेट नहीं हुई। एक विद्यार्थी होने के नाते मैं इन चीजों का कुछ नहीं कर सकता बस अपेक्षा कर सकता हूं कि एनटीए प्रक्रिया में पारदर्शिता लाए। -सनयम गर्ग, एआईआर 388, नीट एस्पिरेंट

समान अंक होने पर भी रैंकिंग में 600 से ज्यादा का फर्क :
720 अंकों में से 703 अंक प्राप्त कर ऑल इंडिया रैंक 1400 हासिल की है लेकिन मेरे जितने अंक प्राप्त करने वाले अन्य विद्यार्थी की रैंक 813 भी है। रैंकिंग में इतना फर्क कैसे है पता नहीं। कई पेपर में हुई विसंगतियों के बाद दोबारा पेपर करवाने की बात कर रहे हैं। इतनी पढ़ाई कर अब फिर से पेपर देने की हिम्मत नहीं है। 720 में से 718-19 अंक आ जाना पहली बार हुआ है। -रिया, एआईआर 1400, नीट एस्पिरेंट


रैंकिंग के आधार पर मिलेगा दाखिला :
नीट में अच्छे अंक मिलने पर भी विद्यार्थी खुश नहीं हैं क्योंकि उनकी रैंकिंग काफी अधिक है। ऑल इंडिया रैंक एक हासिल करने वाले सभी विद्यार्थियों को भी एम्स दिल्ली में दाखिला नहीं मिल पाएगा। केंद्र के मेडिकल कॉलेजों में विद्यार्थियों की सालाना फीस 4000-5000 रहती है, राज्य के मेडिकल कॉलेजाें में 25 हजार, अर्ध सरकारी कॉलेजों में 8-9 लाख और निजी कॉलेजों में 20-30 लाख। ऐसे में अच्छे अंक लाने के बावजूद भी सरकारी कॉलेजों में दाखिले के लिए विद्यार्थियों को संघर्ष करना पड़ेगा।
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