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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की टिप्पणी: पति-पत्नी के मामूली झगडे़ आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आधार नहीं

Thu, 20 Jan 2022 07:19 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Thu, 20 Jan 2022 07:19 PM IST
सार

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महिला और उसके माता-पिता की अग्रिम जमानत याचिका मंजूर कर ली। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यह टिप्पणी केवल जमानत के लिए की गई है, केस की मेरिट के आधार पर नहीं। 

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Minor quarrel between husband and wife is not a ground to compel suicide says HC
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पत्नी से दुखी होकर जहर खाकर जान गंवाने के मामले में पत्नी और उसके माता-पिता द्वारा दाखिल की गई अग्रिम जमानत याचिका पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मंजूर कर ली है। हाईकोर्ट ने कहा कि पति-पत्नी के बीच के मामूली झगड़ों के चलते कोई आत्महत्या को मजबूर नहीं होता है। मामला गुरुग्राम का है, जहां 3 फरवरी 2020 को टिंकू नाम का व्यक्ति वुमन सेल में पहुंचता है और बताता है कि उसकी पत्नी ने उसके खिलाफ पानीपत में केस दर्ज करवाया है। जिसके चलते उसने जहर खा लिया है। इसके बाद पुलिस उसे अस्पताल ले जाती है लेकिन उसकी मौत हो जाती है। 

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पुलिस ने इस मामले में टिंकू की पत्नी और सास-ससुर के खिलाफ धारा 306 के तहत मामला दर्ज किया था। इस मामले में अग्रिम जमानत के लिए तीनों ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। हरियाणा सरकार ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि पत्नी और सास- ससुर ने याची का इतना अधिक उत्पीड़न और अपमान किया जिसे वह झेल नहीं सका और आत्महत्या करने को मजबूर हो गया। 
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हाईकोर्ट ने कहा कि जो सबूत सामने मौजूद हैं वे ऐसा कोई संकेत नहीं देते हैं। यह पति-पत्नी के बीच के मामूली झगड़े हैं, जिसे इस स्तर का नहीं माना जा सकता कि किसी को आत्महत्या के लिए मजबूर कर सकें। इस मामले में ठोस सबूत नहीं है कि मृतक को इस स्तर तक प्रताड़ित और अपमानित किया गया कि वह आत्महत्या को मजबूर हो जाए। हाईकोर्ट ने इस टिप्पणी के साथ ही तीनों की अग्रिम जमानत याचिका को मंजूरी दे दी। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह टिप्पणी केवल जमानत के लिए की गई है, केस की मेरिट के आधार पर नहीं। 

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