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'पुलिस-सेना देखती रही और मैंने अपना लाल खो दिया'
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Tue, 23 Feb 2016 04:37 PM IST
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पुलिस और पैरा मिलिट्री के सैकड़ों जवान खडे़ थे। सभी के हाथ में हथियार भी थे। लेकिन सरकार के आदेश नहीं होने का बहाना देकर पूरे शहर को हुड़दंगियों के सहारे छोड़ दिया गया और रक्षक मेरे बेटे की मौत का तमाशा देखते रहे। हुड़दंगियों ने इन रक्षकों के सामने मेरे बेटे को मार डाला। लेकिन गोली चलाना तो दूर ये सैनिक एक तरफ खड़े हो गए। इन्होंने तो हुड़दंगियों को ललकारा तक भी नहीं।
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यह दर्द एक ऐसे पिता का है, जिसके 17 वर्षीय बेटे को उसकी आंखों के सामने पुलिस और पैरा मिलिट्री की मौजूदगी में हुडदंगियों ने गोली मार दी। अस्पताल पहुंचने से पहले ही 17 साल के नितिन ने दम तोड़ दिया। पिता का दर्द प्रशासन के प्रति भी है क्योंकि अब तक कोई अधिकारी उसका दर्द बांटने भी नहीं पहुंचा। पीड़ित परिवार पूछ रहा है कि क्या कर्फ्यू ऐसा होता है।
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बाबरा मोहल्ला निवासी सुरेश ने बताया कि किला रोड पर उनके रिश्तेदार की हैंडलूम शॉप है। जब शहर में हुड़दंगियों ने आतंक मचाया और दुकानों को लूटा और जलाया तो वे शनिवार दोपहर करीब सवा तीन बजे हैंडलूम शॉप से सामान घर लाने के लिए किला रोड पहुंचे। वहां कई पुलिसकर्मी और पैरा मिलिट्री के जवान खड़े थे। इसलिए हमें किसी बात का खौफ नहीं था।
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उम्मीद थी कि हम आराम से सामान निकल कर ले जाएंगे। लेकिन तभी करीब तीन से चार हजार की तादाद में हुड़दंगी आए। लगभग सभी के हाथों में हथियार थे। हम कुछ समझ पाते कि इससे पहले ही उन्होंने फायर करना शुरू कर दिए। मैं और मेरा बेटा नितिन अलग अलग दिशाओं में भागे।
भीड़ में से किसी ने उस पर गोली चलाई जो उसके पेट के एक तरफ लगी और आरपार हो गई। मैं बदहवास सा देखता रहा। मेरा बेटा जमीन पर पड़ा तड़पता रहा। लेकिन वहां मौजूद पुलिस और पैरा मिलिट्री के जवान भी तमाशबीन बने रहे।
खासी तादाद में होने के बाद भी उन्होंने मेरे बेटे की मौत का तमाशा खामोशी से देखा। न हुड़दंगियों को रोका और न टोका। वे लोग मौत का खेल खेल कर आगे बढ़ गए और मैं अपने बेटे की ओर लपका। कुछ लोगों की मदद से उसे पीजीआई लेकर गया, लेकिन मेरा नितिन नहीं बच सका।
घर में सबसे छोटा था नितिन
सुरेश ने बताया कि नितिन उसका सबसे छोटा बेटा था। नितिन का बड़ा भाई 20 वर्ष का है। दो बहनें हैं। एक की शादी हो गई। नितिन ने 10वीं की परीक्षा दी थी, लेकिन उसे री-अपीयर आ गई थी। गैप लेकर वह री की परीक्षा देने की तैयारी में था। लेकिन अब सारे अरमान, ख्वाब खाक हो गए।