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Chandigarh News: बीमार पिता को लिवर दान करने की अनुमति के लिए नाबालिग की हाईकोर्ट से गुहार
Wed, 07 Aug 2024 09:54 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 07 Aug 2024 09:54 PM IST
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अपने बीमार पिता को लिवर दान करने की अनुमति के लिए नाबालिग ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए गुहार लगाई है। हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए प्राधिकरण समिति को एक सप्ताह में आवेदन पर निर्णय लेने का आदेश दिया है।
याचिका दाखिल करते हुए लुधियाना निवासी रूद्र कपूर ने एडवोकेट मुकुल अहुजा के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि उसके पिता बीमार हैं और डॉक्टरों ने लिवर ट्रांसप्लांट की सलाह दी है। याची अपना लिवर अपने पिता को देना चाहता है और ऐसे में इसके लिए हाईकोर्ट उचित आदेश जारी करे। केंद्र सरकार ने बताया कि बीएल कपूर मेमोरियल हॉस्पिटल इसके लिए प्राधिकरण समिति है।
याची ने वहां आवेदन नहीं किया और सीधे हाईकोर्ट आ गया। याची ने बताया कि वह आवेदन के लिए गया था, लेकिन मौखिक तौर पर यह कह कर उसे वापिस भेज दिया गया कि वह नाबालिग है और अंगदान नहीं कर सकता। हाईकोर्ट ने कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है और याची के पिता को जल्द लीवर की जरूरत है। ऐसे में प्राधिकरण समिति के समक्ष याची एक सप्ताह के भीतर आवेदन दे और इस आवेदन पर एक सप्ताह के भीतर निर्णय लिया जाए। यदि उनके फैसले से याची संतुष्ट न हो तो अपीलेट अथॉरिटी के समक्ष आवेदन दें और अथॉरिटी तीन सप्ताह के भीतर इस पर फैसला ले।
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याचिका दाखिल करते हुए लुधियाना निवासी रूद्र कपूर ने एडवोकेट मुकुल अहुजा के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि उसके पिता बीमार हैं और डॉक्टरों ने लिवर ट्रांसप्लांट की सलाह दी है। याची अपना लिवर अपने पिता को देना चाहता है और ऐसे में इसके लिए हाईकोर्ट उचित आदेश जारी करे। केंद्र सरकार ने बताया कि बीएल कपूर मेमोरियल हॉस्पिटल इसके लिए प्राधिकरण समिति है।
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याची ने वहां आवेदन नहीं किया और सीधे हाईकोर्ट आ गया। याची ने बताया कि वह आवेदन के लिए गया था, लेकिन मौखिक तौर पर यह कह कर उसे वापिस भेज दिया गया कि वह नाबालिग है और अंगदान नहीं कर सकता। हाईकोर्ट ने कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है और याची के पिता को जल्द लीवर की जरूरत है। ऐसे में प्राधिकरण समिति के समक्ष याची एक सप्ताह के भीतर आवेदन दे और इस आवेदन पर एक सप्ताह के भीतर निर्णय लिया जाए। यदि उनके फैसले से याची संतुष्ट न हो तो अपीलेट अथॉरिटी के समक्ष आवेदन दें और अथॉरिटी तीन सप्ताह के भीतर इस पर फैसला ले।
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