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चंडीगढ़ प्रशासन की बेरुखी: उद्योगों का लगातार हो रहा पलायन, आज तक लागू नहीं हो पाई 2015 में बनी उद्योग नीति 

Mon, 31 Jan 2022 03:30 PM IST
निवेदिता वर्मा रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 31 Jan 2022 03:30 PM IST
सार

चंडीगढ़ में लीज टू लीज प्लाट्स की ट्रांसफर का मामला सालों से लटका हुआ है। ट्रांसफर फीस इतनी ज्यादा है, उतने में नया प्लॉट खरीदा जा सकता है। औद्योगिक क्षेत्र में संपत्तियों के आवंटन को हुए करीब 50 साल होने को हैं, लेकिन अब तक उद्योगपति नाम नहीं बदलवा पा रहे हैं।

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Migration of industries from Chandigarh Due to apathy of administration
चंडीगढ़ इंडस्ट्रियल एरिया। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ यूटी प्रशासन की बेरुखी की वजह से शहर से उद्योगों का पलायन तेजी से हो रहा है। औद्योगिक क्षेत्र-एक और दो से करीब आधे उद्योग मोहाली, पंचकूला, डेराबस्सी और हिमाचल प्रदेश के बद्दी में शिफ्ट हो चुके हैं। कई अपने काम को बंद कर इस आस में हैं कि प्रशासन उनके लिए कोई राहत की नीति लेकर आएगा, लेकिन ये इंतजार काफी लंबा हो चला है।

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शहर में जो उद्योगपति काम कर रहे हैं, वे बेहद परेशान हैं। कई साल बीत जाने के बाद आज तक इंडस्ट्रियल पॉलिसी 2015 पूरी तरह से लागू नहीं हुई है। वहीं, कई उद्योगपतियों को जीएसटी जमा कराने पर इनपुट क्रेडिट भी नहीं मिलता है। लीज होल्ड प्रॉपर्टी होने से ऑनरशिप टाइटल क्लीयर नहीं है। लीज मनी जमा कराने के लिए उद्योगपतियों को धक्के खाने पड़ते हैं, इसके लिए कोई ऑनलाइन व्यवस्था नहीं है। 
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लीज टू लीज प्लाट्स की ट्रांसफर का मामला सालों से लटका हुआ है। ट्रांसफर फीस इतनी ज्यादा है, उतने में नया प्लॉट खरीदा जा सकता है। औद्योगिक क्षेत्र में संपत्तियों के आवंटन को हुए करीब 50 साल होने को हैं, लेकिन अब तक उद्योगपति नाम नहीं बदलवा पा रहे हैं। कई ऐसे उद्योग जो कभी चंडीगढ़ की पहचान हुआ करते थे, अब वे चंडीगढ़ से जा चुके हैं। कुछ साल पहले चंडीगढ़ में भूषण स्टील के चार प्लांट थे, लेकिन वर्तमान में एक बंद हो चुका है। दूसरा बंद होने की कगार पर है। बाकी दो चल रहे हैं। इसके अलावा भी औद्योगिक क्षेत्र-एक में कई ऐसे बड़े प्लाट खाली पड़े हैं। वह अपना पुराना काम करना नहीं चाहते और नया काम करने की प्रशासन अनुमति नहीं दे रहा है, इसलिए उद्योगों का पलायन हो रहा है। 

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आज तक संपत्तियों को लीज होल्ड से फ्री होल्ड नहीं करा पाया प्रशासन

लगभग पूरे औद्योगिक क्षेत्र व सेक्टरों की कई संपत्तियां मालिक की ओर से लिखे इच्छापत्र और सामान्य वकालतनामा (जीपीए) पर ही चल रही हैं। चेंबर ऑफ चंडीगढ़ इंडस्ट्रीज के प्रेसिडेंट नवीन मंगलानी ने बताया कि लीज होल्ड प्रॉपर्टी होने से ऑनरशिप टाइटल क्लीयर नहीं है, जिससे बैंक प्रॉपर्टी के बदले लोन तक नहीं देते। लोन नहीं मिलने से बिजनेस बढ़ाने और इंडस्ट्री को मुश्किलें उठानी पड़ रही हैं। इतना ही नहीं, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की रैंकिंग में पिछड़ने का यह बड़ा कारण है। अन्य उद्योगपतियों का कहना है कि प्रशासन ने लोगों को बांध कर रखा हुआ है। वह उद्योग जगत तो बढ़ते हुए देखना नहीं चाहते हैं।

अनअर्जित लाभ इतना कि कोई उद्योगपति नहीं करा सकता संपत्ति का ट्रांसफर

चंडीगढ़ में वर्ष 1971-72 में औद्योगिक क्षेत्र-एक और दो में करीब 3700-3800 प्लॉट आवंटित किए गए थे। आवंटन के समय यह नियम जोड़ा गया कि आवंटन के 15 साल तक उस संपत्ति को किसी और के नाम पर ट्रांसफर/बेचा नहीं जा सकेगा। 15 साल के बाद अगर कोई ट्रांसफर करना चाहेगा तो उस समय के कलेक्टर रेट और जिस दाम पर प्लॉट आवंटित हुआ था, उसके बीच की राशि में से एक तिहाई पैसे प्रशासन के पास जमा कराना होगा। अगर ऐसा नहीं होता है, तो संपत्ति ट्रांसफर नहीं होगी। जो पैसा प्रशासन को दिया जाता है, उसे अनअर्जित लाभ कहा जाता है। यह राशि करोड़ों में होती है, इसलिए कोई भी उद्योगपति ट्रांसफर नहीं करा सकता है। उद्योगपति पिछले कई साल से राहत की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन के अधिकारी कान बंद करके बैठे हुए हैं।

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