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घंटों मशक्कत के बाद नहीं निकला सुखना के सुख का हल, अब भाखड़ा की ओर नज़र
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 28 May 2017 09:24 AM IST
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Sukhna Lake, Chandigarh
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सूखती सुखना को बचाने के लिए शनिवार को पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक हुई। हाईकोर्ट की ओर से गठित 6 सदस्यीय कमेटी की करीब ढाई घंटे तक चली बैठक में सुखना के संरक्षण पर गहन मंथन किया गया।
कई मुद्दों पर चर्चा हुई लेकिन तत्काल सुखना को भरने का कोई हल नहीं निकल पाया। चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि सुखना के लिए भाखड़ा के कजौली वाटर वर्क्स से पानी लाने पर सहमति बनी है। लेकिन यह सप्लाई भी सुखना को सर्दी में ही मिलेगी। बैठक में भाखड़ा से कजौली जा रही पानी की मुख्य पाइपलाइन से सुखना तक पानी पहुंचाने के लिए पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के चीफ इंजीनियर को प्लानिंग करने के लिए कहा गया है। साथ ही पूरी रिपोर्ट तैयार कर हाईकोर्ट में जमा करने को कहा गया है। पंजाब सिंचाई विभाग के एसई बीपीएस बराड़ ने कहा कि कजौली वाटर वर्क्स से सुखना तक पानी पहुंचाने की बात हुई है। साथ ही इस बात पर भी चर्चा हुई है कि सुखना को बचाने के लिए पंजाब और हरियाणा अपने हिस्से का पानी देगा।
चार माह के लिए दिया जाएगा पानी
वर्तमान में चंडीगढ़ में जलापूर्ति के लिए भाखड़ा से रोज 62 एमजीडी पानी लिया जा रहा है। सर्दियों में भाखड़ा से रोज 50 से 55 एमजीडी पानी लिया जाता है। बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रत्येक वर्ष नवंबर से फरवरी के बीच रोज दो एमजीडी पानी सुखना को दिया जाएगा। 6 सदस्यीय कमेटी ने इस पर सहमति जताते हुए प्रस्ताव को मंजूरी दी है। बैठक में यूटी के गृह सचिव अनुराग अग्रवाल, चीफ कंजर्वेटर फॉरेस्ट संतोष कुमार, पंजाब व हरियाणा के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
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कई मुद्दों पर चर्चा हुई लेकिन तत्काल सुखना को भरने का कोई हल नहीं निकल पाया। चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि सुखना के लिए भाखड़ा के कजौली वाटर वर्क्स से पानी लाने पर सहमति बनी है। लेकिन यह सप्लाई भी सुखना को सर्दी में ही मिलेगी। बैठक में भाखड़ा से कजौली जा रही पानी की मुख्य पाइपलाइन से सुखना तक पानी पहुंचाने के लिए पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के चीफ इंजीनियर को प्लानिंग करने के लिए कहा गया है। साथ ही पूरी रिपोर्ट तैयार कर हाईकोर्ट में जमा करने को कहा गया है। पंजाब सिंचाई विभाग के एसई बीपीएस बराड़ ने कहा कि कजौली वाटर वर्क्स से सुखना तक पानी पहुंचाने की बात हुई है। साथ ही इस बात पर भी चर्चा हुई है कि सुखना को बचाने के लिए पंजाब और हरियाणा अपने हिस्से का पानी देगा।
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चार माह के लिए दिया जाएगा पानी
वर्तमान में चंडीगढ़ में जलापूर्ति के लिए भाखड़ा से रोज 62 एमजीडी पानी लिया जा रहा है। सर्दियों में भाखड़ा से रोज 50 से 55 एमजीडी पानी लिया जाता है। बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रत्येक वर्ष नवंबर से फरवरी के बीच रोज दो एमजीडी पानी सुखना को दिया जाएगा। 6 सदस्यीय कमेटी ने इस पर सहमति जताते हुए प्रस्ताव को मंजूरी दी है। बैठक में यूटी के गृह सचिव अनुराग अग्रवाल, चीफ कंजर्वेटर फॉरेस्ट संतोष कुमार, पंजाब व हरियाणा के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
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75 साल में पूरी तरह से सुखना का नाम हो जाएगा खत्म
Sukhna Lake, Chandigarh
ज्यादा खर्च भी नही आएगा
सेक्टर-26 के वाटर वर्क्स से कजौली का पानी सुखना पहुंचाया जाएगा। पानी सप्लाई करने में ज्यादा खर्चा भी नहीं होगा। हाईकोर्ट के आदेश पर सेक्टर-26 से सुखना तक पहले से पाइप डली हुई है। लेकिन मार्च माह से पहले यह बंद कर दी गई थी। अब इस पाइप को कजौली वाटर वर्क्स के साथ जोड़ा जाएगा और प्रतिदिन 2 एमजीडी पानी सुखना में आएगा।
पहले पांच साल में 23 प्रतिशत सूख गई थी सुखना
सुखना का निर्माण वर्ष 1958 में हुआ थ। पर्यावरण विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक सुखना के निर्माण से लेकर अगले पांच साल के बीच सुखना का वाटर लेवल 23 प्रतिशत तक घट गया था। उसी समय शहर के शिल्पकार ली कार्बूजिए ने प्रशासन व मौजूदा सरकार को गाद की समस्या को लेकर सचेत किया था। इसके बाद ग्रेटर पंजाब गवर्नमेंट ने वर्ष 1963 में सुखना के संरक्षण के लिए करीब 26 स्क्वायर किलोमीटर जमीन अधिग्रहीत की थी।
75 साल में पूरी तरह से सुखना का नाम हो जाएगा खत्म
कमेटी में रुड़की से आए नेशनल इंस्टीट्यूट आफ हाइड्रोलॉजी के एक वैज्ञानिक ने चेतावनी देते यह बात भी रखी कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो आने वाले 75 साल में सुखना का अस्तित्व पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा। वैज्ञानिक ने कहा कि हर साल 7 हेक्टेयर मीटर गाद निकलती है ऐसे में अगर इससे ज्यादा गाद अगर हर साल निकलेगी तो सुखना 50 से 60 साल में भी समाप्त हो सकती है।
सेक्टर-26 के वाटर वर्क्स से कजौली का पानी सुखना पहुंचाया जाएगा। पानी सप्लाई करने में ज्यादा खर्चा भी नहीं होगा। हाईकोर्ट के आदेश पर सेक्टर-26 से सुखना तक पहले से पाइप डली हुई है। लेकिन मार्च माह से पहले यह बंद कर दी गई थी। अब इस पाइप को कजौली वाटर वर्क्स के साथ जोड़ा जाएगा और प्रतिदिन 2 एमजीडी पानी सुखना में आएगा।
पहले पांच साल में 23 प्रतिशत सूख गई थी सुखना
सुखना का निर्माण वर्ष 1958 में हुआ थ। पर्यावरण विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक सुखना के निर्माण से लेकर अगले पांच साल के बीच सुखना का वाटर लेवल 23 प्रतिशत तक घट गया था। उसी समय शहर के शिल्पकार ली कार्बूजिए ने प्रशासन व मौजूदा सरकार को गाद की समस्या को लेकर सचेत किया था। इसके बाद ग्रेटर पंजाब गवर्नमेंट ने वर्ष 1963 में सुखना के संरक्षण के लिए करीब 26 स्क्वायर किलोमीटर जमीन अधिग्रहीत की थी।
75 साल में पूरी तरह से सुखना का नाम हो जाएगा खत्म
कमेटी में रुड़की से आए नेशनल इंस्टीट्यूट आफ हाइड्रोलॉजी के एक वैज्ञानिक ने चेतावनी देते यह बात भी रखी कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो आने वाले 75 साल में सुखना का अस्तित्व पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा। वैज्ञानिक ने कहा कि हर साल 7 हेक्टेयर मीटर गाद निकलती है ऐसे में अगर इससे ज्यादा गाद अगर हर साल निकलेगी तो सुखना 50 से 60 साल में भी समाप्त हो सकती है।
पानी व गाद की समस्या के चलते कब-कब सूखी सुखना
Sukhna Lake, Chandigarh
पानी व गाद की समस्या के चलते कब-कब सूखी सुखना
वर्ष वाटर लेवल(फुट) वर्षा (एमएम) गाद निकाली लाख (सीएफटी) रिमार्क
1983 1158.20 1388 - सूखा
1984 - 733 - सूखा
1988 1160.80 1632 - सूखा
1994 1160.85 1271 50.46 सूखा
2001 1161.10 1050 30.86 -
2012 1162.09 879 100 सूखा
2015 1160.05 814 - -
वर्ष वॉटर लेवल फुट
2010 1162.05
2011 1156.55
2012 1162.9
2013 1161.65
2014 1157.0
2015 1160.05
2016 1156.05
2017 1152.55
सुखना के लिए पानी कहां से लाया जाए, इस पर प्लानिंग की गई है। कमेटी अब अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंपेगी।
- अनुराग अग्रवाल, गृह सचिव
वर्ष वाटर लेवल(फुट) वर्षा (एमएम) गाद निकाली लाख (सीएफटी) रिमार्क
1983 1158.20 1388 - सूखा
1984 - 733 - सूखा
1988 1160.80 1632 - सूखा
1994 1160.85 1271 50.46 सूखा
2001 1161.10 1050 30.86 -
2012 1162.09 879 100 सूखा
2015 1160.05 814 - -
वर्ष वॉटर लेवल फुट
2010 1162.05
2011 1156.55
2012 1162.9
2013 1161.65
2014 1157.0
2015 1160.05
2016 1156.05
2017 1152.55
सुखना के लिए पानी कहां से लाया जाए, इस पर प्लानिंग की गई है। कमेटी अब अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंपेगी।
- अनुराग अग्रवाल, गृह सचिव