फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Meet to Secretary IAS Pradeep Kasni

एक और 'खेमका', 30 साल में 40 तबादले

Thu, 31 Jul 2014 06:57 PM IST
प्रवीण पाण्डेय/अमर उजाला, चंडीगढ़
प्रवीण पाण्डेय/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 31 Jul 2014 06:57 PM IST
विज्ञापन
Meet to Secretary IAS Pradeep Kasni

हरियाणा के विभिन्न आयोगों की नियुक्ति पर सवाल उठाकर चर्चा में आए आईएएस अधिकारी प्रदीप कासनी को मजाक पसंद नहीं है। 30 साल के सेवा काल में उनका 40 बार तबादला हो चुका है। लेकिन आज तक उन्हें किसी जिले में डीसी नहीं लगाया गया।

विज्ञापन


कासनी की मां चरखी दादरी में दो कमरों के घर में रहती है। पिता सामाजिक कार्यकर्ता थे और इमरजेंसी के दौरान जेल भी गए। तेवर भी अशोक खेमका जैसे। कासनी मुख्य सचिव एससी चौधरी को एसएमएस मामले में किसी भी सूरत में माफ करने को तैयार नहीं हैं।

विज्ञापन

पूरे प्रकरण से बेहद आहत हैं कासनी

Meet to Secretary IAS Pradeep Kasni

अमर उजाला से बातचीत में कासनी पूरे प्रकरण से आहत दिखे। कासनी का मानना है कि हम जिस तरह के गणतंत्र में जी रहे हैं उसमें कटु वास्तविकता का अनुभव तो कर सकते हैं, लेकिन उन्हें जुबान पर नहीं ला सकते।

कासनी का दावा है कि मुख्य सचिव ने जो एसएमएस किया है उस तरह की भाषा वे इस्तेमाल नही कर सकते। बहुत कुरेदने पर एक बात जरूर कहते हैं कि ऐसे कोई अपनी गर्दन तलवार के नीचे नहीं रखता। तीस वर्ष के सेवा काल में 40 से ज्यादा स्थानांतरण झेल चुके कासनी 1997 बैच के आईएएस अधिकारी हैं।

पदोन्नति भी उन्होंने अदालतों के माध्यम से लड़ाई लड़ कर ली है। 1980 में हरियाणा सिविल सेवा में एचसीएस अधिकारी के तौर पर उनका चयन हुआ। 1984 में उन्होंने सेवाएं ज्वाइन की। जिसके बाद 1997 में पदोन्नति पाई।

रिटायरमेंट के बाद भी पदों के लिए मची है होड़

Meet to Secretary IAS Pradeep Kasni

रिटायरमेंट के बाद के पदों के लिए हरियाणा के अधिकारियों में मारामारी है। यह देखकर कासनी को दुख होता है। कासनी कहते हैं कि जहां तक दोनों कमीशन की नियुक्तियों का मामला है उस विषय में कानून में प्रस्तावित औपचारिकताओं का पालन भी नहीं किया गया। बार-बार चेतावनी के बावजूद ऐसा किया गया।

तीन नए आयुक्तों के लिए पौने दो करोड़ मार्च तक के लिए स्वीकृत किए गए हैं। इस लिहाज से पांच साल में सरकार का 20 करोड़ रुपये खर्च होगा। जबकि आज के दिन भी जो लोग लगे हैं, उनके पास प्राय: दो घंटे से ज्यादा का काम नहीं होता।

वह भी कार्यदिवस पर। रविवार के दिन अचानक दबाव बनाया गया कि  तभी शपथ ग्रहण करवा दिया जाए। जबकि प्रोसीडिंग गवर्नर के पास जानी बाकी थी।

विज्ञापन

कास्ट सिस्टम के खिलाफ हैं, इसीलिए ‘कासनी’ लिखते हैं

Meet to Secretary IAS Pradeep Kasni

कासनी परिवार कास्ट सिस्टम के खिलाफ है। इसीलिए अपना नाम प्रदीप कासनी लिखते हैं। चरखी दादरी के रहने वाले कासनी के गांव का नाम कासनी है।

प्रतिनियुक्ति के लिए पांच साल फील्ड का अनुभव जरूरी:

कासनी प्रतिनियुक्ति पर केंद्र में जाने की इच्छा रखते हैं, लेकिन उसके लिए पांच साल फील्ड का अनुभव जरूरी है। 30 वर्ष केसेवाकाल में उन्हें अभी तक कहीं डीसी नहीं लगाया गया। फील्ड का अनुभव न होने के कारण प्रतिनियुक्ति पर जाने में अड़चन।

रोहतक रजिस्ट्रार लगाया था तब आई थीं सिफारिशें

Meet to Secretary IAS Pradeep Kasni

2005 में कासनी को रोहतक विश्वविद्यालय का रजिस्ट्रार लगाया गया था, साथ ही सरकार ने परीक्षा नियंत्रक का भी चार्ज दे दिया। बीएड में दाखिलों के लिए सिफारिशें आईं, लेकिन नहीं मानी। इसी दौरान लोकसभा चुनाव आ गए।

चुनाव के बाद में बाद स्थानांतरण कर दिया गया है। जिसके बाद ढाई माह इंतजार किया। फिर उनका स्थानांतरण हरियाणा इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन में सचिव केतौर पर कर दिया गया। वहां पर सिर्फ आधे घंटे की नियुक्ति रही।

जगाधरी एसडीएम के तौर पर रहा लंबा कार्यकाल:

उनका अब तक का सबसे लंबा कार्यकाल जगाधरी एसडीएम के तौर पर बीता है। जहां वे करीब ढाई साल तक एसडीएम रहे।

सरकार ने छुट्टी पर होने के बावजूद बुलाया:

चरखी दादरी में पारिवारिक सदस्य जगदीश पहल को गोलियों से भून दिया गया। 23 जुलाई से 27 जुलाई तक  कासनी छुट्टी पर थे। उन्हें जगदीश पहल को गुड़गांव मेदांता देखने जाना था, लेकिन आयोगों की नियुक्तियों के चक्कर में सरकार ने रोक लिया। उनके अंतिम संस्कार के अगले दिन वे वहां पहुंच पाए। जिसका उन्हें दुख है।

पिता पत्रकार थे, इमरजेंसी में जेल गए

Meet to Secretary IAS Pradeep Kasni

कासनी के पिता धर्म सिंह कासनी पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता थे। 1953 से लेकर 1954 तक पत्र निकाला। 1968 से 69 तक लोक हरियाणा के नाम से पत्र निकाला। डेमोक्रेटिक मूवमेंट से जुड़े रहे। बंसीलाल के समय 1974 के आंदोलन से जुड़े रहे। रिवासा कांड में उनके साथ पूरी जनता थी। जिसके बाद वे इमरजेंसी में जेल गए।

आज भी दो कमरे के मकान में रह रही है मां:

कासनी की मां आज भी चरखी दादरी में दो कमरे के मकान में रह रही हैं। जहां वे उनसे मिलने जाते रहते हैं। मुगालता इस बात का है उसी मां के लिए चीफ सेक्रटरी ने एसएमएस किया।

केंद्र तक पहुंचा कासनी का विवाद

Meet to Secretary IAS Pradeep Kasni

हरियाणा के आईएएस अधिकारी प्रदीप कासनी का विवाद अब केंद्र तक पहुंच गया है। केंद्र सरकार इस मामले में कभी भी दखल दे सकती है। केंद्रीय कार्मिक तथा प्रशिक्षण मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि किसी आईएएस के साथ गलत नहीं होने दिया जाएगा। केंद्र ने यदि इस मामले में दखल दिया तो कासनी को राहत जरूर मिलेगी।

केंद्र की इस मामले में दखल देने की मंशा इसीलिए और बलवती हो गई है, क्योंकि केंद्र में भाजपा की सरकार है। हरियाणा की सरकार पहले ही केंद्र के निशाने पर है। विधानसभा चुनाव आते देख भाजपा इसको चुनावी मुद्दा बना सकती है। भाजपा के बाद अब इनेलो की बारी है।

इनेलो भी शीघ्र ही इस मामले को लेकर राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी केपास अपना विरोध दर्ज करवाएगी। उधर, चीफ सेक्रेट्री इस मामले में अपना कदम पीछे हटा चुके हैं, लेकिन फिलहाल यह विवाद हल होता नहीं दिख रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला भी पत्र लिख कर इन नियुक्तियों को गलत ठहरा चुके हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed