रिश्तों की मरम्मत: आर्थिक तंगी से टूट रहा था परिवार, बारह घंटे की काउंसलिंग कर बसा दिया घर, मध्यस्थता केंद्र के काउंसलर संजो रहे रिश्ते
मध्यस्थता केंद्र के काउंसलर का कहना है कि महीने भर में लगभग 35 मामले काउंसलिंग के लिए मध्यस्थता केंद्र में आते हैं। इनमें से 15 से 20 मामलों में रिश्ते बचाने में कामयाब भी हो रहे हैं।
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छोटी छोटी बातों पर होने वाले झगड़ों से घर टूटने तक की स्थिति बन जाती है लेकिन चंडीगढ़ जिला अदालत में बने मध्यस्थता केंद्र ने हर हाल में इन रिश्तों को बचाने का प्रण लिया है। यही कारण है कि एक मामले में लगातार 12 घंटे तक चर्चा हुई। दोनों परिवारों को अलग-अलग और सामने बैठाकर समझाया गया। दोनों पक्षों को रिश्तों में थोड़ा एक दूसरे के लिए झुकने की बात भी मनवाई गई और एक घर टूटने से बच गया। केंद्र के काउंसलर का कहना है कि महीने भर में लगभग 35 मामले काउंसलिंग के लिए मध्यस्थता केंद्र में आते हैं। इनमें से 15 से 20 मामलों में रिश्ते बचाने में कामयाब भी हो रहे हैं। कुछ रिश्तों में समय लगता है लेकिन जब उन्हें रिश्तों की अहमियत के बारे में बताया जाता है तो पति-पत्नी मान जाते हैं। इस प्रक्रिया में परिवार के सदस्यों की बड़ी भूमिका होती है।
आर्थिक तंगी से शुरू हुई नोकझोंक, तलाक तक पहुंचा मामला
मूल रूप से उत्तर प्रदेश निवासी राहुल (परिवर्तित नाम) चंडीगढ़ में रहकर आईटी कंपनी में काम करते थे। उनका प्रेम विवाह हुआ था। उनकी पत्नी श्वेता (परिवर्तित नाम) गृहिणी थीं। शादी के कुछ समय बाद ही आर्थिक तंगी के कारण दोनों के बीच नोकझोंक शुरू हो गई। धीरे-धीरे नोकझोंक झगड़े में बदल गई। तलाक का मामला अदालत में पहुंचा। मामले की काउंसलर गीतांजली ने राहुल और श्वेता की लगातार 12 घंटे तक काउंसलिंग की। राहुल के परिजनों ने भी कहा कि श्वेता हमें बहुत पसंद है और हम तुम लोगों को अलग नहीं देखना चाहते हैं। परिजनों के समझाने पर दोनों का रिश्ता टूटने से बच गया।
बच्चे ने माता-पिता को किया एक
मध्यस्थता के लिए आए एक मामले के काउंसलर अजीत ने बताया कि शादी के कुछ वर्षों तक सौरभ (परिवर्तित नाम) और राधिका (परिवर्तित नाम) का रिश्ता बहुत अच्छा चला। कुछ समय बाद सौरभ अक्सर दोस्तों के साथ पार्टी कर आता और पत्नी से झगड़ा करने लगता। इससे तंग आकर राधिका अपने मायके चली गई। वहां जाकर राधिका को पता चला कि वह मां बनने वाली हैं। ससुराल में इसकी सूचना देने पर भी कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली। यहां तक कि बच्चे के जन्म के समय भी ससुराल पक्ष से कोई नहीं आया। राधिका ने बच्चे के जन्म के बाद तलाक के लिए अर्जी दे दी। मामला जिला अदालत के मध्यस्थता केंद्र में आया जहां शुरुआती दो काउंसलिंग में कोई समाधान नहीं निकला। तीसरी तारीख में राधिका अपने बच्चे के साथ आई। बच्चे को देखकर सौरभ रोने लगा और अपनी गलतियों के लिए माफी मांगने लगा। सौरभ ने दोबारा इस गलती को न दोहराने की बात कही और राधिका को साथ लेकर चला गया।
बेटी का मोल समझा तो बच गया रिश्ता
जिला अदालत में आए एक मामले की काउंसलर साहिबा सिंह ने बताया कि शुभम (परिवर्तित नाम) और प्रिया (परिवर्तित नाम) की शादी के तीन साल बाद उन्हें बेटी हुई। बेटी के जन्म से ससुराल वालों में कोई खुशी नहीं थी। कुछ समय बाद ससुराल वाले प्रिया को ताने मारने लगे। पति से भी सहयोग नहीं मिलता था। धीरे-धीरे पति-पत्नी में झगड़े होने लगे। इस कारण प्रिया अपने मायके चली गई। तलाक की अर्जी के बाद मामला जिला अदालत के मध्यस्थता केंद्र में आया। पति-पत्नी के अलावा ससुराल वालों को भी समझाया गया। बेटी का मोल समझ आने पर ससुराल वालों ने राधिका से माफी मांगी और उसे साथ लेकर घर चले गए।
धैर्य रखकर बचाया जा सकता है रिश्ता
इस प्रकार की समस्याओं में पीछे मुख्य वजह लोगों में बढ़ता तनाव, सहनशीलता की कमी और परिजनों से मिलने वाले समर्थन में कमी का होना है। किसी भी मामले में थोड़ा धैर्य रखकर उसे समझा जाए और शांतिपूर्ण तरीके से उसका हल निकाला जाए तो इस तरह की स्थिति उत्पन्न नहीं होती हैं। जब लोगों को लगता है उनकी बात नहीं सुनी जा रही है तो नकारात्मकता मन में बैठ जाती है। इस कारण छोटी छोटी बातों पर मनमुटाव और झगड़े होने लगते हैं। - प्रो सीमा विनायक, चेयरपर्सन, मनोविज्ञान विभाग, पीयू
इन बातों से बचा सकते हैं रिश्ता
- शादी में आपसी तालमेल जरूरी होता है, कभी किसी बात पर मत एक न हो तो बैठ कर बात करें, झगड़ें नहीं।
- एक दूसरे से हद से ज्यादा और निराधार उम्मीदें लगाने से परहेज करें।
- किसी विषय पर मतभेद होने पर परिजनों से परामर्श अवश्य लें।