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राहतः चंडीगढ़ में डॉक्टरों की कमी अब एमडी स्टूडेंट पूरी करेंगे, एमसीआई ने पास किया प्रोग्राम

Tue, 12 Nov 2019 11:30 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Tue, 12 Nov 2019 11:30 AM IST
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MCI Accept Proposal, MD Student will fullfil lacking of doctors in chandigarh
फाइल फोटो
चंडीगढ़ के अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी अब मेडिकल कालेज के पोस्ट ग्रेजुएट स्टूडेंट पूरी करेंगे। पिछले हफ्ते नई दिल्ली में मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया (एमसीआई) की नवगठित बोर्ड आफ गवर्नर की पहली बैठक में डिस्ट्रिक्ट रेजिडेंसी प्रोग्राम के प्रस्ताव को पास किया गया है। यह प्रोग्राम मेडिकल कालेज के पोस्ट ग्रेजुएट स्टूडेंट (एमडी की पढ़ाई करने वाले डाक्टरों) के पाठ्यक्रम में शामिल होगा।
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इसके तहत तीन महीने उन्हें शहर के जिला अस्पताल में प्रैक्टिस करनी होगी। चंडीगढ़ में सेक्टर 16, 22, 45 और मनीमाजरा जिला अस्पताल की श्रेणी में आते हैं। मरीजों की संख्या के अनुपात के मुताबिक यहां पर डाक्टरों की बेहद कमी है। ये कमी अब डिस्ट्रिक्ट रेजिडेंसी प्रोग्राम से दूर होगी। बीते हफ्ते नई दिल्ली में आयोजित बैठक की अध्यक्षता बोर्ड आफ गवर्नर के चेयरमैन डॉ. वीके पाल ने की।
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बैठक में पेश किए एजेंडे के मुताबिक यह स्कीम सरकारी मेडिकल कालेज के अतिरिक्त प्राइवेट व डीम्ड यूनिवर्सिटी में भी लागू होगी। पीजी कोर्स का हिस्सा होने की वजह से प्राइवेट व डीम्ड यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स को भी तीन महीने की सेवाएं जिला अस्पताल में देनी होंगी। ट्रेनिंग पीरियड के दौरान उन्हें डिस्ट्रिक्ट रेजिडेंट कहा जाएगा। इसमें सबसे महत्वपूर्ण क्लॉज यह है कि फाइनल एग्जाम में बैठने से पहले हर स्टूडेंट को संतुष्टि प्रमाण पत्र दिखाना होगा।
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यह प्रमाण पत्र जिला अस्पताल के हेड या स्टेट गवर्नमेंट देगी। जिस स्टूडेंट्स के पास यह सर्टिफिकेट नहीं होगा, उसे एग्जाम में बैठने की इजाजत नहीं मिलेगी। विशेषज्ञों ने बताया कि रोटेशन प्रक्रिया के तहत एक के जाने के बाद दूसरे आने की नीति लागू रहने से एमडी स्टूडेंट की जगह खाली नहीं रहेगी। वह जगह स्थाई बनी रहेगी।

यह होंगे फायदे

डिस्ट्रिक्ट रेजिडेंसी प्रोग्राम लागू होने से कई फायदे हैं। पहला डॉक्टरों की कमी दूर होगी। दूसरा डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में क्वालिटी केयर में इजाफा होगा। टर्शरी केयर इंस्टीट्यूट या मेडिकल कालेज में जाने वाले काफी मरीजों का इलाज जिला हॉस्पिटल में हो सकेगा। इससे बड़े अस्पतालों से भीड़ कुछ कंट्रोल होगी। तीसरा फायदा यह होगा कि पीजी स्टूडेंट्स को कम्युनिटी के साथ काम करने का मौका मिलेगा। इससे जब वे पीजी की पढ़ाई करने के बाद जब किसी दूसरे हॉस्पिटल में जाएंगे तो मरीज और उनके बीच अच्छा संवाद बनेगा।

चंडीगढ़ में इसलिए होती है डॉक्टरों की कमी
यहां के अस्पतालों में मरीजों का जितना अनुपात है, उसके मुताबिक डॉक्टरों की कमी बनी ही रहती है। दूसरा यहां पर डॉक्टर डेपुटेशन या यूपीएससी के तहत आते हैं। डेपुटेशन पर वे पंजाब व हरियाणा से आते हैं। वहां पहले से ही डॉक्टरों की कमी है। यूपीएसएसी के तहत आने वाले डॉक्टरों की अपनी मुसीबतें हैं। एक तो सैलरी कम है और दूसरा चयन प्रक्रिया बहुत लंबी है। इस वजह से यहां डॉक्टरों की कमी बनी रहती है।
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