जानिए, क्या हुआ निगम की विशेष बैठक में

अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 22 Nov 2013 05:50 PM IST
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नगरनिगम की विशेष बैठक में चलाने के लिए तैयार किए विपक्ष के तीखे तीर धरे के धरे रह गए।
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मेयर सुभाष चावला अंत तक कहते रहे कि भाजपा पार्षद अरुण सूद और सौरभ जोशी को बोलने का मौका दिया जाएगा।
अंत में ऐसी पलटी मारी कि उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया।
क्लिक करें: नगर निगम की बैठक के दौरान सदन में क्या हुआ देखें फोटो

वे सांसद पवन कुमार बंसल पर हमला नहीं बोल पाए और बंसल भी इस प्रस्ताव पर सदन में बोलने से बच गए। भाजपा पार्षद सूद और जोशी को बोलने की इजाजत न देने के कारण हंगामा भी हुआ।

बैठक में अरुण सूद पूरा होमवर्क कर के आए थे। मेयर सुभाष चावला का कहना है कि हर काम अरुण सूद के अनुसार नहीं चलेगा। उनका काम हंगाम करना है। शहर की जनता उनकी कारगुजारी को देख रही है।

सूद का कहना है कि बीजेपी और अकाली दल गांवों को बचाने के लिए पूरा काम करेंगे। कांग्रेसी झूठ बोल रहे हैं। बसपा पार्षद जन्नत जहां ने कहा कि कांग्रेसी पहले से ही माइंड सेट कर के आए थे।

कांग्रेसी बोले, फायदा होगा
बैठक में पार्षदों ने इस प्रस्ताव पर अपने राय दी। विपक्षी ने इस प्रस्ताव का विरोध किया, वहीं सत्तापक्ष कांग्रेस ने अपना समर्थन किया। कांग्रेसी पार्षद सत्य प्रकाश अग्रवाल ने बैठक की शुरूआत में कहा कि जो गांव पहले से नगर निगम में शामिल हुए हैं, उनमें नगर निगम द्वारा हर संभव विकास करवाया गया।

इन गांवों में 80 करोड़ के करीब खर्च हुआ है। कांग्रेसी पार्षद प्रदीप छावड़ा ने कहा कि नगर निगम में गांवों को शामिल करने के बाद गांवों से एक मनोनीत पार्षद को भी लगाया जाना चाहिए। लोगों ने जो निर्माण किया हुआ है, उसके लिए उन्हें एनओसी लेनी अनिवार्य नहीं होनी चाहिए।

विपक्षी बोले, नहीं होगा फायदा
अकाली पार्षद मलकीयत सिंह ने कहा कि जो पहले गांव नगर निगम में शामिल हुए थे, उनमें मूलभूत सुविधाएं न के बराबर है। वहां कांग्रेस पार्टी द्वारा लाल डोरे को बढ़ाने की बात कही गई थी, लेकिन आज तक लाल डोरा बढ़ाया नहीं जा सका है। बैठक बुलाने से पहले सभी 13 गांवों के लोगों के साथ बैठक की जानी चाहिए थी।

अकाली पार्षद हरज़िदर कौर ने कहा कि पहले भी अनेक गांवों को उजाड़ा गया था। उनके पुनर्वास के लिए अभी तक कुछ नहीं किया गया है।

पेंडू संघर्ष कमेटी आज तक अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रही है, उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया है। सभी गांवों को मॉर्डन गांव बनाने का वायदा किया गया था, लेकिन लोगों को समस्याओं से कोई निजात नहीं मिला है।
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