फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

घर पहुंचा शहीद गुरसेवक का पार्थिव शरीर, फूट-फूट कर रोई मंगेतर

Tue, 08 Nov 2016 09:11 AM IST
अमित मरवाहा/अमर उजाला, तरनतारन(पंजाब)
अमित मरवाहा/अमर उजाला, तरनतारन(पंजाब) Updated Tue, 08 Nov 2016 09:11 AM IST
विज्ञापन
martyr gursewak singh funeral in taran taran of punjab
शहीद गुरसेवक सिंह
शहीद गुरसेवक सिंह का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव में पहुंच चुका है। इस दौरान उनकी मां-बहनों और मंगेतर का रो-रोकर बुरा हाल रहा।
martyr gursewak singh funeral in taran taran of punjab
शहीद गुरसेवक सिंह का अंतिम संस्कार
जम्मू कश्मीर के पुंछ में कृष्णा घाटी में पाकिस्तान की गोलाबारी में पंजाब के तरनतारन के बहादुर सैनिक गुरसेवक सिंह भी शहीद हो गए थे। काफी संख्या में लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे। उनकी मंगेतर भी श्रद्धांजलि देने के लिए परिवार संग पहुंची। परिवार के सदस्यों ने उनके दर्शन किए ।

ये भी पढ़ें: शहीद गुरसेवक सिंह के बारे में जानिए सबकुछ, जानकर गर्व करेंगे उसपर
martyr gursewak singh funeral in taran taran of punjab
शहीद गुरसेवक सिंह का अंतिम संस्कार
आज सवेरे जैसे ही शहीद का शव गांव पहुंचा, कोहराम मच गया। मां बलजीत कौर जहां बेटे का शव देख-देखकर बेसुध हो रही थीं, वहां बहनों रमनजीत और कवलजीत का भी बुरा हाल है। हर किसी की आंख नम है। सिर्फ घर ही नहीं तरनतारण जिले का वराना लालपुर गांव गम में डूबा है। नाते रिश्तेदारों के अलावा दोस्तों की आंखें भी नम हैं, लेकिन सबको फक्र है कि गुरसेवक ने देश के लिए कुर्बानी दी।

 
विज्ञापन
विज्ञापन
martyr gursewak singh funeral in taran taran of punjab
शहीद गुरसेवक सिंह का अंतिम संस्कार
बेटे के लिए क्या-क्या सपने संजोए थे, सभी अधूरे रह गए। इतना कहते ही गुरसेवक की मां बेसुध हो गई। गुरसेवक की 13 फरवरी को शादी होनी थी। तीन महीने पहले सगाई हुई थी। इसीलिए वो सभी तैयारियां खुद ही कर गया था। मां को बोलकर गया था कि जल्दी ही आकर घर में पेंट भी करवा जाऊंगा। घर में सबसे छोटा था, इसलिए सभी का दुलारा था गुरसेवक सिंह।
विज्ञापन
martyr gursewak singh funeral in taran taran of punjab
शहीद गुरसेवक सिंह का अंतिम संस्कार
गुरसेवक सिंह का भरा पूरा परिवार है। माता-पिता, भाई और दो बहनें हैं। राखी पर गुरसेवक बहनों से राखी बंधवाने आए थे और वादा करके लौटे थे कि अगली बार आएंगे तो शादी करेंगे, लेकिन ये नहीं सोचा था कि सेहरा बंध नहीं पाएगा और बेटा तिरंगे में लिपटकर आएगा। तीन दिन पहले ही गुरसेवक ने बहनों को फोन किया था, लेकिन ये नहीं सोचा था कि वो आखिरी बात होगी।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed