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अफसरों को चैलेंज देकर सिखाते थे युद्धकला के गुर, कुछ ऐसे थे 'योद्धा' अर्जन सिंह

Sun, 17 Sep 2017 09:45 AM IST
मोहित धुपड़/अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 17 Sep 2017 09:45 AM IST
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Marshal of Indian Air Force, dies at 98
Arjan Singh passes away
इंडियन एयरफोर्स के फाइव स्टार रैंक एयर मार्शल रहे अर्जन सिंह का अपने साथियों को युद्धकला सिखाने का अंदाज बहुत निराला था। वह अपने निचले अफसरों को युद्धकला के गुर एक चैलेंज देकर सिखाते थे।
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जूनियर अफसर चैलेंज पार कर लें, तो उनकी हौसला अफजाई में भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ते थे। इतना ही नहीं बतौर एयर मार्शल अर्जन सिंह जहां भी जाते वहां अपनी जाबांजी के अनुभव को भी अपने जूनियर अफसरों से सांझा करते थे। यह खुलासा एयर मार्शल अर्जन सिंह द्वारा दिए गए एक चैलेंज को कुछ हद तक पूरा करने वाली एयरफोर्स की सिगनल रेजीमेंट की राडार टीम के रिटायर्ड जेडब्ल्यूओ (जूनियर वारंट अफसर) कृष्ण लाल ने ‘अमर उजाला’ से विशेष बातचीत में किया।
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जूनियर अफसरों को बढ़ाते थे हौसला 
उनके कार्यकाल में काम कर चुके सार्जेंट वीके राजपूत ने बताया कि एयर मार्शल अर्जन सिंह बहुत मिलनसार थे और अपने जूनियर अफसरों का हौसला बढ़ाते थे। उधर, हरियाणा की एयर वारियर्स एसोसिएशन के प्रेजिडेंट रिटायर्ड जेडब्ल्यूओ जेपी मेहता, महासचिव सार्जेंट सुरेंद्र भाटिया व एडवाइजर सार्जेंटखुशबीर दत्त, सार्जेंट बालक राम,  जेडब्ल्यूओ आरडी सैनी व वारंट अफसर गुलशन चंदना ने भी उनके कार्यकाल को याद कर गर्व महसूस किया।
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यह था राडार टीम को एयर मार्शल अर्जन सिंह चैलेंज 

Marshal of Indian Air Force, dies at 98
Arjan Singh passes away - फोटो : File Photo
यह था राडार टीम को एयर मार्शल अर्जन सिंह चैलेंज 
सन 1969 की शुरूआत में उनकी राडार टीम भारत-बांग्लादेश  बार्डर पर तैनात थी। वहां अपनी टीम में वे बतौर राडार ऑपरेटर मौजूद थे। दुश्मन के एयरक्राफ्ट को राडार से पकड़ने की कला को और अच्छे ढंग से समझाने के लिए एयरमार्शल अर्जन सिंह ने उनकी यूनिट को एक चैलेंज दिया।

इस चैलेंज में एयर मार्शल अर्जन सिंह ने डकोटा एयरक्राफ्ट और एक हैलीकाप्टर में उड़ान भरनी थी और उनकी राडार यूनिट को उन्हे हवा में ही पकड़ना था। एयर मार्शल अर्जन सिंह ने अपना चैलेंज लखनऊ से डकोटा एयरक्राफ्ट से टेकऑफ कर शुरू किया और एयरक्राफ्ट को रामपुर हेड एयरफोर्स स्टेशन पर लैंड करवाया। फिर वहां से एयर मार्शल एक हेलीकाप्टर में सवार हुए और संबंधित सिगनल रेजीमेंट तक पहुंचे। एयरफोर्स के सिगनल रेजिमेंट की राडार टीम ऑपरेशन रूम में लगातार एयर मार्शल के डकोटा एयरक्राफ्ट और हेलीकाप्टर को राडार सिस्टम से पकड़ने में जुटी हुई थी।

तभी अचानक ऑपरेशन रूम का दरवाजा खुला और एयर मार्शल कमरे के भीतर आ गए। वहां टीम केसाथ एयर मार्शल ढाई घंटे रहे और टीम ने उन्हे मैपिंग केसाथ बताया कि इस चैलेंज में उनका डकोटा एयरक्राफ्ट और हेलीकाप्टर कहां-कहां एरिया से गुजरा और किस-किस इलाके में उन्होंने राडार सिस्टम से उनके एयरक्राफ्ट और हेलीकाप्टर को पकड़ा।

...जब थपथपाई कृष्ण लाल की पीठ 

Marshal of Indian Air Force, dies at 98
Arjan Singh passes away
...जब थपथपाई कृष्ण लाल की पीठ 
हालांकि राडार टीम  एयर मार्शल के एयरक्राफ्ट और हेलीकाप्टर को सिर्फ 15 से 20 फीसद ही कैप्चर कर पाए थे, लेकिन इस परफोरमेंस को भी एयर मार्शल ने खूब सराहा और राडार आपरेटर कृष्ण लाल पीठ थपथपाई। जेडब्ल्यूओ कृष्ण लाल ने बताया कि उसके बाद उन्होंने टीम को ब्रीफिंग कर बताया कि आखिरकार क्यों वे राडार सिस्टम से उनका एयरक्राफ्ट और हेलीकाप्टर को पूरी कैप्चर नहीं कर पाए?
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