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एंटीबायोटिक्स का सेवन हो सकता है खतरनाक
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 17 Nov 2013 12:42 PM IST
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इमर्जिंग एंटी माइक्रोबॉयल रेजिस्टेंस सोसाइटी (ईएआरएस) ने एंटी बायोटिक्स के खिलाफ राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियान शुरू किया है।
सप्ताह भर तक चलने वाले इस अभियान के तहत शहर में एंटी बॉयोटिक्स के तार्किक इस्तेमाल के लिए जागरूकता पैदल मार्च का आयोजन किया गया।
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस एनके संघी ने पीजीआई से इस वॉक को एक मशाल जला कर रवाना किया।
जस्टिस संघी ने कहा कि लोगों को एंटी बॉयोटिक्स के गैर जरूरी उपयोग के जोखिमों के बारे में जागरूक करना जरूरी है। इस अभियान को एक तार्किक परिणाम पर लेकर जाना होगा।
मार्च में शामिल लोगों ने नारे लिखे बैनर पकडे़ हुए थे। इनमें मुख्य रूप से इन कफ, कोल्ड एंड स्नीज, नो एंटी बायोटिक्स प्लीज, यूज एंटीबायोटिक्स वाइजली एंड बी हेल्थी और टेक एक्शन टुडे टू सेव टुमारो लिखा था।
मार्च में डॉक्टरों, वैज्ञानिकों, फार्मासिस्टों, क्लीनिक संचालकों, स्टूडेंट्स, वकील और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मासूटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (नाइपर), पंजाब यूनिवर्सिटी, इंस्टीट्यूट ऑफ माइक्रोबॉयल टेक्नोलॉजी (इमटैक) और चितकारा यूनिवर्सिटी एवं एनोवस, इंस्टीट्यूट ऑफ क्लीनिकल रिसर्च के स्टूडेंट्स और कर्मी भी शामिल थे।
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ये सभी मार्च करते हुए सेक्टर 17 प्लाज गए और वहां पर नुक्कड़ भी किया। इसमें लोगों को बताया गया कि डॉक्टर से बिना चर्चा किए एंटी बॉयोटिक दवाओं का इस्तेमाल करने से किस प्रकार की मुसीबतें आती हैं।
ईएआरएस चेयरपर्सन डॉ. मनु चौधरी ने लोगों से अपील की कि वे बिना डॉक्टर की सलाह के दवा न लें। अवेयरनेस वीक ऑन एंटी बॉयोटिक नॉलेज एंड एजुकेशन (अवेक), अपनी तरह का पहला अभियान है।
यह पूरे देश में आयोजित किया जा रहा है और चंडीगढ़-पंचकूला-मोहाली (ट्राईसिटी), नई दिल्ली, मुंबई, बंगलुरु, चैन्नई और हैदराबाद शामिल हैं। डॉ. मनु चौधरी ने जस्टिस संघी को स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया।
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सप्ताह भर तक चलने वाले इस अभियान के तहत शहर में एंटी बॉयोटिक्स के तार्किक इस्तेमाल के लिए जागरूकता पैदल मार्च का आयोजन किया गया।
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस एनके संघी ने पीजीआई से इस वॉक को एक मशाल जला कर रवाना किया।
जस्टिस संघी ने कहा कि लोगों को एंटी बॉयोटिक्स के गैर जरूरी उपयोग के जोखिमों के बारे में जागरूक करना जरूरी है। इस अभियान को एक तार्किक परिणाम पर लेकर जाना होगा।
मार्च में शामिल लोगों ने नारे लिखे बैनर पकडे़ हुए थे। इनमें मुख्य रूप से इन कफ, कोल्ड एंड स्नीज, नो एंटी बायोटिक्स प्लीज, यूज एंटीबायोटिक्स वाइजली एंड बी हेल्थी और टेक एक्शन टुडे टू सेव टुमारो लिखा था।
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मार्च में डॉक्टरों, वैज्ञानिकों, फार्मासिस्टों, क्लीनिक संचालकों, स्टूडेंट्स, वकील और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मासूटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (नाइपर), पंजाब यूनिवर्सिटी, इंस्टीट्यूट ऑफ माइक्रोबॉयल टेक्नोलॉजी (इमटैक) और चितकारा यूनिवर्सिटी एवं एनोवस, इंस्टीट्यूट ऑफ क्लीनिकल रिसर्च के स्टूडेंट्स और कर्मी भी शामिल थे।
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ये सभी मार्च करते हुए सेक्टर 17 प्लाज गए और वहां पर नुक्कड़ भी किया। इसमें लोगों को बताया गया कि डॉक्टर से बिना चर्चा किए एंटी बॉयोटिक दवाओं का इस्तेमाल करने से किस प्रकार की मुसीबतें आती हैं।
ईएआरएस चेयरपर्सन डॉ. मनु चौधरी ने लोगों से अपील की कि वे बिना डॉक्टर की सलाह के दवा न लें। अवेयरनेस वीक ऑन एंटी बॉयोटिक नॉलेज एंड एजुकेशन (अवेक), अपनी तरह का पहला अभियान है।
यह पूरे देश में आयोजित किया जा रहा है और चंडीगढ़-पंचकूला-मोहाली (ट्राईसिटी), नई दिल्ली, मुंबई, बंगलुरु, चैन्नई और हैदराबाद शामिल हैं। डॉ. मनु चौधरी ने जस्टिस संघी को स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया।