Punjab: ऑस्ट्रेलिया के सात विश्वविद्यालयों में भारतीय विद्यार्थियों के दाखिले पर लगा प्रतिबंध, ये हैं कारण
ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी विदेशी छात्रों के दाखिले के लिए पूरी तरह एजेंटों पर निर्भर हैं। दाखिले के लिए स्टूडेंट और यूनिवर्सिटी दोनों एजेंटों को अप्रोच करते हैं। इसके बदले यूनिवर्सिटीज एजेंटों को मोटी कमीशन देती हैं।
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ऑस्ट्रेलिया के सात विश्वविद्यालयों में पिछले तीन माह में पंजाब व हरियाणा समेत कई राज्यों के विद्यार्थियों के दाखिले पर प्रतिबंध लग चुका है। विश्वविद्यालयों ने इसका मुख्य कारण फर्जी सर्टिफिकेट के जरिए दाखिला लेना, स्टडी वीजा का दुरुपयोग करना और दाखिले के बाद नौकरी को अधिक महत्व देना बताया है। एजेंट इन विद्यार्थियों को अच्छे कॉलेजों में एडमिशन दिलाने का झांसा दे मोटी रकम वसूल लेते हैं। जब विद्यार्थी शर्तें पूरी नहीं कर पाते तो एजेंट फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एडमिशन दिला देते हैं, जो आगे चल कर विद्यार्थियों पर भारी पड़ता है।
पंजाब के हजारों विद्यार्थी हर साल ऐसे ही एजेंटों के जाल में फंसकर अपने भविष्य को दांव पर लगा रहे हैं। भारत से जाने वाले हर 4 में से 1 स्टूडेंट वीजा की एप्लिकेशन फर्जी है। इसके चलते ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई के लिए लगाई जाने वाली आवेदन रद्द होने की दर भी बढ़ कर 24.3% हो गई है, जो पिछले 13 वर्षों में सबसे ज्यादा है।
एजेंटों को मिलती है मोटी कमीशन
ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी विदेशी छात्रों के दाखिले के लिए पूरी तरह एजेंटों पर निर्भर हैं। दाखिले के लिए स्टूडेंट और यूनिवर्सिटी दोनों एजेंटों को अप्रोच करते हैं। इसके बदले यूनिवर्सिटीज एजेंटों को मोटी कमीशन देती हैं। ऑस्ट्रेलिया यूनिवर्सिटी के तीन साल के डिग्री कोर्स में दाखिल लेने से वीजा भी आसानी से मिल जाता है। यूनिवर्सिटी में सालाना फीस 25 हजार डॉलर के करीब होती है।
छात्र यूनिवर्सिटी में दाखिला लेकर ऑस्ट्रेलिया तो पहुंच जाते हैं, लेकिन वहां भागकर निजी छोटे मोटे कॉलेजों में कुक, हेयर सैलून आदि का कोर्स करने के लिए चले जाते हैं, जिसकी सालाना फीस 8 हजार डॉलर है। लिहाजा, जहां 17 हजार डॉलर प्रति वर्ष फीस की बचत होती है। वहीं इन प्रोफेशनल कोर्स के जरिये ऑस्ट्रेलिया में पीआर भी मिलने की उम्मीद बंध जाती हैं। यूनिवर्सिटी से फरार होकर निजी कॉलेजों में पहुंचने वाले छात्रों को एक अन्य सुविधा छोटे कॉलेजों द्वारा दी जाती है। छात्र प्रति माह 700 डॉलर अदा कर स्टडी कर सकते हैं। यह कॉलेज बस नाम के हैं, जिनकी संख्या हजारों में हैं। वहां पर छात्रों की हाजिरी भी जरूरी नहीं हैं, जिस कारण छात्र नाम के लिए दाखिला लेते हैं, लेकिन बाहर वह नौकरी करते हैं।
निजी कॉलेज बिगाड़ रहे स्थिति
ऑस्ट्रेलियन स्टडी वीजा एक्सपर्ट सुकांत कहते हैं कि निजी कॉलेजों ने बेड़ा गर्क किया है। वहां बच्चा 25 हजार डॉलर वार्षिक फीस क्यों अदा करेगा? इन निजी कॉलेजों में दाखिला लेने वालों को वीजा नहीं मिलता है, लेकिन छात्र विश्वविद्यालय में दाखिला लेकर ऑस्ट्रेलिया पहुंच जाते हैं, तो यह निजी कॉलेज स्टूडेंट्स को अपनी तरफ खींच लेते हैं और आठ हजार डॉलर हर साल फीस की सुविधा देते हैं, वह भी किश्तों में? उच्च गुणवत्ता वाली यूनिवर्सिटी खाली हो रही हैं और निजी छोटे कॉलेजों की भरमार लग गई है।
यूनिवर्सिटी छोड़ निजी कॉलेजों की ओर भागते हैं विद्यार्थी
जमीनी हकीकत यह है कि इन यूनिवर्सिटी में पढ़ने के लिए जाने वाले छात्र जाते तो इंजीनियर व बिजनेस की स्टडी के लिए हैं, लेकिन वहां पहले साल में ही यूनिवर्सिटी से भागकर छोटे निजी कॉलेजों में दाखिला ले लेते हैं। पंजाब-हरियाणा से जाने वाले छात्रों की 90 फीसदी सीट खाली हो जाती हैं और तीसरा सेमेस्टर बिलकुल खाली जाता है।
काम के घंटे के लिए कोई नियम लागू नहीं
ऑस्ट्रेलिया में पढ़ने जाने वाले विदेशी छात्रों के काम करने पर लगी लिमिट को हटा दिया गया था, जिस कारण छात्रों ने स्टडी छोड़कर निजी कॉलेजों की तरफ दौड़ लगा दी। अब छात्र कितने घंटे भी काम कर सकते हैं, उन पर कोई नियम लागू नहीं है। भारत से विदेश जाकर पढ़ाई करने वाले बच्चों के आंकड़े लगातार बढ़ते जा रहे हैं। विदेश मंत्रालय के साल 2022 के आंकड़े बताते हैं कि कुल 13,24,954 बच्चे अलग-अलग देशों में पढ़ाई करने गए थे।