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Hindi News ›   Chandigarh ›   Threat to Greenery in Chandigarh How to Save From Fungus Attack on Roots of Trees

हरियाली को खतरा: चंडीगढ़ में पेड़ों की जड़ों पर हो रहा फंगस का हमला, झड़ रहीं पत्तियां और सूख रहा धड़

Wed, 25 Aug 2021 03:18 PM IST
निवेदिता वर्मा सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 25 Aug 2021 03:18 PM IST
सार

वैज्ञानिकों के मुताबिक फंगस जहां भी दिखे, उसे तोड़कर जला दें। इसके साथ ही जहां पर फंगस लगी थी, उसको ठीक से साफ कर दें। जड़ के अलावा कहीं भी पेड़ पर फंगस लगी है तो वह नुकसानदेह नहीं है, लेकिन जड़ पर होगी तो वह पेड़ को सुखा देगी।

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Threat to Greenery in Chandigarh How to Save From Fungus Attack on Roots of Trees
पेड़ों में लगी फंगस। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाली पर एक से बढ़कर एक हमले हो रहे हैं। पहले इन्हें दीमक सुखा रही थी, अब फंगस। इसकी शुरुआत जड़ से ही हो रही है। जो पेड़ों के लिए सबसे अधिक खतरनाक है। इससे न केवल पत्तियां झड़ रही हैं बल्कि धड़ यानी तना भी सूख रहा है। हालांकि, इसका प्रभाव बड़े पैमाने पर सामने नहीं आया, लेकिन वैज्ञानिकों का सुझाव है कि समय रहते ऐसे पेड़ों को चिन्ह्नित करना होगा अन्यथा दूसरे पेड़ भी चपेट में आएंगे। कुछ पेड़ आ भी चुके हैं।

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शहर में 400 से अधिक प्रजातियों के पेड़ लगे हैं। इनमें 22 से 27 फीसदी पेड़ों पर दीमक का प्रभाव है। कुछ पेड़ इसके कारण सूख रहे हैं। अब स्वस्थ पेड़ों की जड़ों में फंगस पाई गई है, जो जमीन से ऊपरी भाग में सफेद व भूरे रंग में दिख रही है। तुना, कैसुआरिना एक्यूसेटिफोलिया (जंगलीसरू) आदि पेड़ों पर गनोडर्मा नामक फंगस तेजी से फैल रही है। इस फंगस के चलते 100 मीटर दूरी पर यदि कोई दूसरा पेड़ है तो उस तक पहुंचने में इसे दो से चार माह ही लग रहे हैं। चंडीगढ़ में पेड़ों की दूरी 15 से 25 मीटर ही है। ऐसे में यह रोग फैला तो इसे रोक पाना आसान नहीं होगा। 

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क्या है फंगस

फंगस को फफूंद या कवक भी कहते हैं। यह एक प्रकार के जीवों का विशाल समूह है, जो अपना भोजन सड़े गले मृत कार्बनिक पदार्थों से प्राप्त करते हैं। इनकी उत्पत्ति संसार के प्रारंभ से ही मानी जाती है। यह अधिक आर्द्रता वाले स्थानों पर लगती है। मकान से लेकर अन्य जगहों पर यह पाई जाती है। जो एक शैवाल के रूप में होती है। पेड़ों पर भी इसका प्रभाव होता है, लेकिन सबसे अधिक खतरनाक फंगस जड़ों की मानी जाती है, जो पेड़ की सभी क्रियाओं को बाधित कर देती है।

फंगस लगने के नुकसान
  • पेड़ की पत्तियां लाल होकर झड़ने लगती हैं।
  • पत्तियों के अभाव में पेड़ अपना भोजन नहीं बना पाते।
  • पेड़ की छाल उतरने लगती है।
  • धीरे-धीरे पेड़ सूखने लगता है।
  • आसपास के पौधों तक इसकी पहुंच हो जाती है।

ये है बचाव

वैज्ञानिकों के मुताबिक फंगस जहां भी दिखे, उसे तोड़कर जला दें। इसके साथ ही जहां पर फंगस लगी थी, उसको ठीक से साफ कर दें। जड़ के अलावा कहीं भी पेड़ पर फंगस लगी है तो वह नुकसानदेह नहीं है, लेकिन जड़ पर होगी तो वह पेड़ को सुखा देगी, इसलिए गहराई से उस जड़ को खोदें और वहां से उसे हटा दें। पेड़ पूरी तरह प्रभावित हो गया है, तो उसे काट दें। 

जड़ों वाली फंगस खतरनाक  
फंगस कई प्रकार की होती है, लेकिन पेड़ों की जड़ों पर लगने वाली फंगस खतरनाक होती है, जो पेड़ को सुखा देती है। इसका एक ही इलाज है कि जहां भी यह दिखे, इसे हटा दें और उस जड़ या तने को साफ कर दें। - प्रो. एएस अहलूवालिया, विशेषज्ञ, वनस्पति विज्ञान विभाग पीयू

फंगस वाले पेड़ों का जल्द से जल्द चयन होना चाहिए  
कुछ पेड़ों पर फंगस लगी हुई है, जो जड़ों से जुड़ी है। यह फंगस हरियाली के लिए खतरनाक है। ऐसे पेड़ों को चिह्नित किया जाना चाहिए और उसके बाद अगला कदम उठाया जाना चाहिए। - प्रो. एमसी सिद्धू, वनस्पति विज्ञान विभाग पीयू

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