पंजाब के कट्टरपंथियों का भी पोस्टर ब्वाय रहा है बुरहान, इनपुट ने उड़ाई सुरक्षा एजेंसियों की नींद
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पंजाब और जम्मू कश्मीर के कट्टरपंथी दोनों राज्यों के लिए समस्या बने हैं। अब पंजाब के खालिस्तान समर्थकों और कश्मीर के आतंकियों के बीच तालमेल के इनपुट ने राज्यों ही नहीं, केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों की भी नींद उड़ा दी है। पहले दोनों संगठनों के बीच तालमेल बेशक नहीं था। लेकिन दोनों एक दूसरे की हिमायत जरूर करते थे। कश्मीर के भटके युवाओं की तरह हिजबुल मुजाहिदीन का कमांडर बुरहान वानी पंजाब के कट्टरपंथियों का भी पोस्टर ब्वाय था।
जुलाई 2016 में वानी के एनकाउंटर के बाद पंजाब के एक गर्मख्याली संगठन ने अपनी मासिक मैगजीन के अगले अंक में उसे कवर पेज पर जगह दी थी। उसे कश्मीर की आजादी लहर के हीरो के तौर पर पेश किया था। दूसरी तरफ जगतार सिंह हवारा की तस्वीर छापी थी। साथ ही खालिस्तान और कश्मीरी आतंकियों के संघर्ष को एक जैसा बताया था। लेकिन पंजाब पुलिस या केंद्रीय एजेंसियों को कभी भी ऐसा फीडबैक नहीं मिला था कि दोनों कट्टरपंथी मिल गए हैं। लेकिन हाल ही में पंजाब में हुई घटनाओं के बाद इस थ्योरी को बल मिला है।
हैंड ग्रेनेड का इस्तेमाल कश्मीर में बहुत पहले से होता रहा है, लेकिन पंजाब में कभी नहीं हुआ। पर पिछली दो घटनाओं, मकसूदां थाने पर हमले और अब अमृतसर में निरंकारी सत्संग घर पर हमले में ग्रेनेड का प्रयोग किया। मकसूदां ब्लास्ट के पीछे कश्मीरी कट्टरपंथी निकले, जिनमें से दो को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही 15 दिन पहले पुलिस ने पटियाला से आतंकी शबनमदीप सिंह को गिरफ्तार किया था।
उसके पास से भी ग्रेनेड ही मिले थे। जांच एजेंसियां मान कर चल रही हैं कि दोनों सूबों के कट्टरपंथियों के बीच कड़ियां जुड़ गई हैं। पंजाब में अमृतसर, तरनतारन, गुरदासपुर जैसे जिले आतंकवाद का गढ़ रहे थे। आज भी पुलिस जिन आतंकवादियों को गिरफ्तार करती है, उनकी जड़ें इन्हीं इलाकों में मिलती हैं। वहीं, जैशे-मोहम्मद के आतंकी संगठन अंसार-गजवा-तुल-हिंद के प्रमुख जाकिर मूसा के पंजाब में होने की खबरें भी इस थ्योरी को बल दे रही हैं।
मकसूदां थाने पर हमले के मामले में पुलिस ने इसी संगठन के दो नौजवानों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि कश्मीर में सख्ती के बाद पंजाब ही मूसा के लिए सबसे सेफ हैवन हो सकता था। वहीं, आतंकवाद के गढ़ रहे अमृतसर, तरनतारन और गुरदासपुर जिलों में मूसा को पनाह देने वाले भी कई हो सकते थे। दोनों राज्यों के कट्टरपंथी संगठनों के बीच तालमेल की एक वजह यह भी है कि दोनों को ही पाक की आईएसआई समर्थन देती है।
इसलिए तो नहीं उड़ाई मूसा के पंजाब में होने की खबर
एक तरफ जांच एजेंसियां पंजाब और कश्मीर के कट्टरपंथियों के बीच कनेक्शन तलाश रही है। तो दूसरी तरफ इसके बिल्कुल उल्टी थ्योरी पर भी काम किया जा रहा है। पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि कहीं कश्मीर के आतंकी जाकिर मूसा के पंजाब में होने की खबर जानबूझ कर तो नहीं उड़ाई गई। यह भी संभव है कि योजनाबद्ध ढंग से खुफिया एजेंसियों को इनपुट दिया गया कि मूसा अमृतसर, गुरदासपुर, तरनतारन में कहीं छिपा है।
तीनों जिलों की पुलिस ने भी आनन-फानन में मूसा के पोस्टर लगा दिए और लोगों से मदद करने की अपील की। पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि मूसा के होने की खबर इसलिए उड़ाई गई ताकि सारी एजेंसियां उसके पीछे लग जाएं। जिसके बाद दूसरा गुट आसानी से अपना काम करके निकल जाए।