आदेश बेमानी...हजारों को पड़ी नौकरी गंवानी, लेबर विभाग को रोजाना मिल रहीं 10-15 शिकायतें
- ई-मेल से लेबर विभाग के पास नौकरी गंवाने को लेकर आ रहीं रोजाना औसतन 15 शिकायतें
- प्रशासन ने नौकरियां बचाने की बजाय मजदूरों को घर भेजने में लगाई लेबर विभाग की ड्यूटी
- कर्मचारी यूनियन का आरोप- शिकायतकर्ता उलझे रहें इसलिए लेबर विभाग के कर्मचारियों की कहीं और लगाई ड्यूटी
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शहर में हजारों लोग नौकरियां गंवा चुके हैं। सिर्फ लेबर विभाग के पास लॉकडाउन के दौरान ई-मेल से करीब एक हजार नौकरी से निकालने और तनख्वाह नहीं देने की शिकायतें आई हैं लेकिन इन पर कार्रवाई कब होगी। इससे तंग आकर हजारों लोग पलायन कर चुके हैं। प्रशासन खुद 27690 लोगों को घर भेज चुका है। पुलिस और डायल 112 पर भी शिकायत हो रही है लेकिन वह भी हाथ खड़े कर चुके हैं। ऐसे में कर्मचारी जाएं तो जाएं कहां?
लॉकडाउन के दौरान नौकरी से निकालने और तनख्वाह नहीं देने को लेकर चंडीगढ़ के लेबर विभाग के पास रोजाना ई-मेल से 10 से 15 शिकायतें आ रही हैं लेकिन प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने लेबर विभाग के कर्मचारियों की ड्यूटी इन शिकायतों को दूर करने की बजाय प्रवासी मजदूरों को घर भेजने में लगाई हुई है।
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लॉकडाउन में मजदूरों का शोषण होता रहा और लेबर विभाग पर ताला लटका रहा। कंज्यूमर कोर्ट बंद रहा। कर्मचारियों के लिए सभी रास्ते बंद थे, पलायन कर जाना ही उन्हें मुनासिब लगा। कर्मचारी यूनियनों ने आरोप लगाया कि सिर्फ चंडीगढ़ में ही नहीं बल्कि देश के कई राज्यों में लेबर विभाग के कर्मचारियों को किसी और काम में लगाया गया है, ताकि शिकायतकर्ता उलझे रहें। यूनियन के नेताओं का कहना था कि लॉकडाउन के वक्त लेबर विभाग की जिम्मेदारियां बढ़ गई थीं, लेकिन मजदूरों को वहां से भी कोई मदद नहीं मिली।
मॉल्स, सेल्स, होटल और घर में काम करने वाले लोग सबसे ज्यादा बेरोजगार
लॉकडाउन का सबसे ज्यादा असर मॉल्स के शोरूम में काम करने वाले कर्मचारी, होटल, रेस्टोरेंट, सिक्योरिटी गार्ड, फैक्ट्री मजदूर, मार्केटिंग, घर में काम करने वाले लोग, कैफे और रेस्टोरेंट आदि में काम करने वाले कर्मचारी प्रभावित हुए हैं। मालिकों ने लॉकडाउन का हवाला देकर तनख्वाह रोक दी तो कई को काम से ही निकाल दिया।
गृह मंत्रालय ने आदेश दिया था कि लॉकडाउन के दौरान निजी कंपनियों को अपने कर्मचारियों को पूरी सैलरी देनी होगी। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। खुद पीएम नरेंद्र मोदी ने भी पहली बार लॉकडाउन का एलान करने के दौरान कंपनियों से अपील की थी कि वे कर्मचारियों को इस दौरान नौकरी से न निकालें और न ही सैलरी में कटौती करें। हालांकि, बाद में कई कंपनियां सुप्रीम कोर्ट चली गईं, जिसके बाद केंद्र सरकार ने ये आदेश वापस ले लिए।
एलांते मॉल स्थित एक रिटेल चेन कंपनी ने अपने सभी 16 सिक्योरिटी गार्ड को निकाल दिया है। इनमें से एक सिक्योरिटी गार्ड का परिवार हल्लोमाजरा में किराये पर रहता है। उन्होंने बताया कि वह रिटेल चेन स्टोर में एक सिक्योरिटी कंपनी के माध्यम से लगे थे। उन्हें जनवरी और फरवरी में भी पूरी सैलरी नहीं मिली और बाद में सभी को बिना सैलरी दिए निकाल दिया गया। अब जब स्टोर के अधिकारियों से सैलरी की बात करते हैं तो वह सिक्योरिटी कंपनी के पास जाने को कहते हैं और जब कंपनी से मांगते हैं तो वह स्टोर के पास जाने कहती है। बताया कि मकान का किराया 5 हजार रुपये है। अब गांव जाना चाहते हैं।
हल्लोमाजरा में किराए पर रहने वाले राहुल कुमार ने बताया कि वह एलांते मॉल के तीसरे फ्लोर पर एक इंटरनेशनल पिज्जा बनाने वाली कंपनी में सिक्योरिटी गार्ड का काम करते थे। कंपनी ने उन्हें फरवरी और मार्च की तनख्वाह नहीं दी है। अप्रैल में उन्हें नौकरी से निकाल दिया। अब जब भी वह तनख्वाह के लिए कंपनी के लोगों को फोन करते हैं तो अब कोई फोन नहीं उठाता है। उन्होंने बताया कि वह अपने एक भाई के साथ रहते हैं, जिसकी वजह से उनका गुजारा चल रहा है।
शहर के एक मशहूर ज्वेलर्स शोरूम में काम करने वाली एक महिला ने बताया कि शोरूम मालिक ने यह कहकर नौकरी से निकाल दिया कि सरकार ने 50 प्रतिशत कर्मचारियों को ही रखने के आदेश दिए हैं। उन्होंने बताया कि वह वहां पर पिछले दो साल से काम करती थी लेकिन अब काम से निकाल दिया गया है। ज्वेलर्स शोरूम ने उनके अलावा कई और कर्मचारियों को भी निकाला है, जिसकी वजह से सभी बेरोजगार हो गए हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा क्या करें।
आंकड़ों में समझिए कितने लोग बेरोजगार हुए
- 28 हजार प्रवासी मजदूर घर को रवाना हुए, जो शहर की विभिन्न फैक्ट्रियों, कंस्ट्रक्शन व दिहाड़ी पर काम करते थे। सभी लोगों का यही कहना था कि मालिक ने वेतन नहीं दिया, किरायेदार परेशान करता रहा, इसलिए घर जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा।
- एक हजार से ज्यादा शिकायतें तो सिर्फ लेबर विभाग के पास ई-मेल से मिली हैं। इनमें से ज्यादातर लोग वह हैं, जिन्होंने लॉकडाउन के दौरान नौकरी से निकाले जाने व वेतन न मिलने की बात कही है।
- शहर में हजारों ऐसे लोग हैं, जिन्हें पता ही नहीं है कि शिकायत कहां और कैसे करनी है। नौकरी से निकाले जाने के बाद वह घर बैठे हैं और दूसरी नौकरी की तलाश कर रहे हैं।
- लॉकडाउन के बाद लेबर विभाग पर ताला लग गया, जोकि 18 मई को खुला है। इसकी वजह से हजारों लोग शिकायत कर ही नहीं पाए।
हजारों लोगों की नौकरी खतरे में, फास्ट ट्रैक कमेटी हल करे मामले
वर्करों को फरवरी-मार्च की तनख्वाह नहीं मिली है। खाने को कुछ नहीं, इस कारण हजारों मजदूर अपने घरों को निकल गए। चंडीगढ़ में लगभग सभी क्षेत्रों में 10,000 से अधिक वर्कर ऐसे हैं, जिनकी नौकरी चली गई हैं। श्रम विभाग की अनदेखी का नतीजा हैं कि वर्कर अपनी फरवरी, मार्च की तनख्वाह के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। प्रशासन से अपील है कि केसों के जल्द निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कमेटी का गठन किया जाए, ताकि वर्करों को समय से न्याय मिल सके। - जीवा राज, नेशनल काउंसिल मेंबर, ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन (एक्टू)
रोजाना शिकायतें आ रही हैं, निपटारा भी किया जा रहा
लॉकडाउन के बाद से औसतन 10-15 शिकायतें रोजाना ई-मेल से लेबर विभाग को मिल हैं। कुछ मामलों को निपटाया भी गया है। विभाग का स्टाफ प्रवासी मजदूरों को घर भेजने की व्यवस्था बनाने में लगा है। हालांकि, विभाग के इंस्पेक्टर लेबर विभाग में बैठे हैं, जो मजदूरों की शिकायतों का निपटारा कर रहे हैं। - वरुण बेनीनाल, असिस्टेंट लेबर कमिश्नर