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कैप्टन के छह सलाहकार अयोग्यता के खतरे से हुए बाहर, पढ़ें-पंजाब कैबिनेट के अन्य फैसले

Sat, 02 Nov 2019 01:11 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sat, 02 Nov 2019 01:11 AM IST
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Many decisions taken in Punjab government cabinet meeting
सीएम अमरिंदर सिंह के आवास पर सर्वदलीय बैठक। - फोटो : अमर उजाला

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में पंजाब मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को पंजाब स्टेट लेजिस्लेचर ( प्रीवेंशन ऑफ डिस्क्वालीफिकेशन) एक्ट 1952 में संशोधन करने की मंजूरी दे दी। इस फैसले से हाल ही में मुख्यमंत्री के योजना व राजनीतिक सलाहकार नियुक्त किए गए छह विधायकों पर से लाभ के पद के तहत अयोग्य ठहराए जाने का खतरा टल जाएगा। 

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मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि संशोधन से पंजाब विधानसभा के सदस्य की इस वर्ग में नियुक्ति होने पर उन्हें अयोग्य नहीं ठहराया जा सकेगा। ये छह विधायक ‘लाभ के पद’ के दायरे से बाहर हो जाएंगे। संबंधित एक्ट की धारा-2 में संशोधन संबंधी बिल पंजाब विधानसभा के आगामी सत्र में पेश किया जाएगा।
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उल्लेखनीय है कि राज्य विधानसभा के सदस्य होने के नाते कुछ लाभ वाले पदों के धारकों को अयोग्य न ठहराने के लिए, संविधान की धारा 191 के तहत पंजाब स्टेट लेजिस्लेचर (प्रीवेंशन ऑफ डिस्क्वलीफिकेशन) एक्ट 1952 बनाया गया था। इस एक्ट में समय-समय पर कई संशोधन किए गए, लेकिन ऐसे संशोधन करते समय मौजूदा समय की प्रशासनिक उलझनों को ध्यान में नहीं रखा गया। इसके अलावा, एक्ट में संशोधन करते हुए विभिन्न संसदीय कमेटियों के लाभ वाले पदों की संबंधित रिपोर्टों और अध्ययनों पर विचार नहीं किया गया। इस कारण मंत्रिमंडल ने महसूस किया कि इस एक्ट के सेक्शन 2 में संशोधन जरूरी है। 
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इसलिए किया संशोधन 
पिछले महीने छह कांग्रेस विधायकों को मुख्यमंत्री के सलाहकार नियुक्त करते हुए, उनमें से चार विधायकों को कैबिनेट रैंक और दो विधायकों को राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया था। सरकार के इस फैसले को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दे दी गई, जिसके बाद सरकार ने इन छह सलाहकारों को अलॉट किया स्टाफ वापस ले लिया था। विवाद बढ़ता देख सरकार ने अपने फैसले पर कानूनी राय मांगी, जिसके आधार पर संशोधन का फैसला लिया गया। इसी सप्ताह सरकार ने गुपचुप तरीके से इन सलाहकारों को पंजाब सचिवालय में ऑफिस भी अलॉट कर दिए। 

सीएसआर फंड कहां खर्च हो, बोर्ड और अथॉरिटी तय करेंगे

कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) से जुड़ी गतिविधियों को नया रूप देने और सभी साझीदारों को एकजुट करके एक निष्पक्ष मंच पर लाने के उद्देश्य से पंजाब कैबिनेट ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में पंजाब कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी सलाहकारी बोर्ड और मुख्य सचिव के नेतृत्व में कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी अथॉरिटी के गठन को मंजूरी दी।

मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि यह बोर्ड और अथॉरिटी सीएसआर के फंड को सरकार की विकासोन्मुखी प्राथमिकताओं के मुताबिक अत्यावश्यक सेक्टरों और प्रोजेक्टों में विधिवत रूप में इस्तेमाल करने को यकीनी बनाएंगे।

मुख्यमंत्री के नेतृत्व में बोर्ड का गठन किया जाएगा, जिसमें स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्री, वित्त मंत्री, उद्योग और वाणिज्य मंत्री, मुख्य सचिव, उद्योग एवं वाणिज्य और वित्त विभाग के प्रशासनिक सचिव, उद्योग विभाग के डायरेक्टर सदस्य होंगे। जबकि औद्योगिक क्षेत्र के अधिक से अधिक पांच नुमाइंदों /विशेषज्ञों को बोर्ड के चेयरमैन द्वारा नामजद किया जाएगा। 

मीटिंग में फैसला लिया गया कि बोर्ड में जरूरत पड़ने पर कोई और मंत्री या अधिकारी को इसके सदस्य के तौर पर शामिल किया जा सकता है, लेकिन फैसला लेने के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया गया है। राज्य में सीएसआर गतिविधियों का जायजा लेने के लिए बोर्ड की मीटिंग साल में दो बार होगी। इसके अलावा राज्य में सीएसआर प्रोजेक्टों संबंधी सीएसआर अथॉरिटी को अपेक्षित सलाह देगी।

पंजाब सीएसआर अथॉरिटी के चेयरमैन मुख्य सचिव होंगे, जबकि उद्योग एवं वाणिज्य और वित्त विभाग के प्रशासनिक सचिव इसके सदस्य होंगे। इसके अलावा मुख्य कार्यकारी अफसर इसके सदस्य होंगे।

सीआईआई के पंजाब चैप्टर के चेयरमैन, फीकी के पंजाब चैप्टर के चेयरमैन, पीएचडी चेंबर के चेयरमैन, ऐसोचैम के पंजाब चैप्टर के चेयरमैन और अन्य किसी भी संस्था या व्यक्ति को इनवाइटी के तौर पर शामिल करने का फैसला अथॉरिटी या पंजाब सरकार द्वारा लिया जाएगा। यह अथॉरिटी किसी भी और अधिकारी को जरूरत पड़ने पर सदस्य के तौर पर शामिल कर सकती है।

दो फीसदी है सीएसआर
कंपनीज एक्ट, 2013 की धारा 135 के तहत सभी कंपनियां, जिनकी सालाना आय 500 करोड़ रुपये या इससे अधिक है या टर्नओवर 1000 करोड़ रुपये या इससे अधिक है या कुल लाभ 5 करोड़ रुपये या इससे अधिक है, को किसी भी वित्तीय साल के दौरान 2 प्रतिशत अनुमानित लाभ, सीएसआर गतिविधियों के लिए अलग रखने का प्रावधान है। 

श्री गुरु नानक देव जी अवार्ड स्थापित करने का फैसला

पंजाब मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को 15वीं पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने के लिए सभी औपचारिकताओं को मंजूरी दे दी, जो श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व को समर्पित 6 नवंबर को बुलाया जा रहा है। इस सत्र की अध्यक्षता देश के उप-राष्ट्रपति वैंकेया नायडू द्वारा की जाएगी।

पंजाब भवन में शुक्रवार सुबह मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की मीटिंग के बाद सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि यह विशेष सत्र पहले सिख गुरु जी के फलसफे और शिक्षाओं के प्रचार व प्रसार करने के लिए बुलाया गया है। 

कैबिनेट ने इस विशेष सत्र की तैयारियों संबंधी विस्तार में चर्चा की, जो 6 नवंबर को सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक बुलाया गया है। इसमें पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह भी शामिल होंगे। यह भी फैसला किया गया कि 15वीं विधानसभा के इस नौवें एतिहासिक सत्र के लिए हरियाणा विधानसभा के सभी सदस्यों को न्योता दिया जाएगा।

इस दौरान पंजाब कैबिनेट ने सर्व सम्मति से प्रस्ताव पास करते हुए शांति और अंतर धर्म अस्तित्व को उत्साहित करने के लिए 550वें प्रकाश पर्व के जश्नों के हिस्से के तौर पर ‘श्री गुरु नानक देव जी अवार्ड’ शुरू करने का फैसला किया। इस अवॉर्ड में एक सम्मान पत्र और 11 लाख रुपये दिए जाएंगे। यह अवॉर्ड हर साल दिया जाएगा और इसके लिए चयन ज्यूरी द्वारा किया जाएगा, जो राज्य सरकार द्वारा बनाई जाएगी।

अगले सत्र में आएगा पंजाब राज्य एससी आयोग (संशोधन) विधेयक

पंजाब कैबिनेट ने पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग (संशोधन) ऑर्डिनेंस 2019 को विधानसभा के आगामी सत्र में लाने की मंजूरी दे दी है। इस कानून के साथ आयोग के चेयरपर्सन की नियुक्ति के लिए उम्र सीमा (मौजूदा 70 साल से) 72 साल हो जाएगी। सरकार का दावा है कि पंजाब में अनुसूचित जाति के लोगों के हितों की रक्षा के लिए कानून को असरदार तरीके से लागू कराने के उद्देश्य से अधिक तजुर्बेकार चेयरपर्सन को लाने में मदद मिलेगी।

अनएडेड कॉलेजों में फीस नियमन संबंधी संशोधन भी मंजूर
कैबिनेट ने पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अन-एडिड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस एक्ट, 2016 को बिल के रूप में पंजाब विधानसभा में पेश करने का फैसला किया है। इससे राज्य में गैर सहायता प्राप्त शैक्षिक संस्थाओं में फीस को रेगुलेट करने की विधि उपलब्ध हो जाएगी। यह संशोधन गैर सहायता प्राप्त शैक्षिक संस्थाओं में उन बच्चों को राहत देगा, जिनके परिवार के कमाऊ सदस्य की मौत के कारण फीस की अदायगी नहीं हो सकती। 

ऐसे बच्चे इन शैक्षिक संस्थाओं में अपनी पढ़ाई पूरी होने तक बिना फीस दिए पढ़ाई कर सकेंगे। इसी तरह गैर सहायता प्राप्त शैक्षिक संस्थाओं में चल रही वर्दियों /किताबों संबंधी खरीद-फरोख्त में मनमर्जी रोकने के लिए भी इस एक्ट में अपेक्षित संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है।

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