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वकीलों की भलाई के लिए फंड को दी गई मंजूरी, पढ़ें पंजाब कैबिनेट के अन्य फैसले

Fri, 20 Dec 2019 12:46 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Fri, 20 Dec 2019 12:46 AM IST
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Many decision has taken in meeting of Punjab cabinet
पंजाब कैबिनेट की बैठक

पंजाब मंत्रिमंडल ने ‘द पंजाब एडवोकेट्स वैलफेयर फंड रूल्ज-2019’ को मंजूरी दे दी, जिससे संबंधित एक्ट के लागू करने का रास्ता साफ हो गया। पंजाब भवन में गुरुवार को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में फैसले पर मुहर लगाई गई। सरकारी प्रवक्ता के मुताबिक, राज्य सरकार को ‘पंजाब एडवोकेट्स वेलफेयर फंड एक्ट-2002’ की धारा 28 के तहत नियम तैयार करके नोटीफाई करने की जरूरत थी। 

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यह नियम राष्ट्रीयकृत बैंक में फंड जमा करने, लेखा व बजट अनुमानों की सालाना स्टेटमेंट तैयार करने, खर्चे व निवेश के लेखे और सालाना ऑडिट की व्यवस्था करते हैं। फंड में दाखिला और मेंबरशिप से हटाने की प्रक्रिया भी प्रदान की गई है। अलग-अलग गतिविधियों को पूरा करने के लिए स्टाफ की नियुक्त का उपबंध भी किया गया है।
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उल्लेखनीय है कि पंजाब एडवोकेट्स वेलफेयर फंड एक्ट -2002 का गठन और इसका प्रयोग पंजाब से संबंधित वकीलों की भलाई के लिए किया गया था। इस फंड की आय राज्य सरकार से मिले अनुदान, बार काउंसिल द्वारा एकत्रित किए फंड, स्वैच्छिक दान, केंद्र सरकार से अनुदान आदि से आती है। यह फंड वकीलों की भलाई के लिए अलग-अलग उद्देश्यों, जैसे वकीलों का समूह बीमा, योग्य वकीलों को वित्तीय सहायता, वकीलों को मेडिकल बीमा, गंभीर बीमारी की स्थिति में वित्तीय सहायता आदि के लिए खर्च किए जाते हैं।

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पीकेवीसी की दो एकड़ भूमि कृषि विभाग को देने का फैसला

मोहाली स्थित पंजाब किसान विकास चैंबर, किसानों की भलाई को यकीनी बनाने के उद्देश्य में पूरी तरह नाकाम रहा। इसे देखते हुए पंजाब मंत्रिमंडल ने इसकी दो एकड़ जमीन और दफ्तर का कब्जा कृषि व किसान कल्याण विभाग के हाथों में सौंपने की मंजूरी दे दी है। इस फैसले का उद्देश्य, विकास चेंबर को मुफ्त में मुहैया करवाई गई संपत्ति का प्रयोग किसानों की भलाई के लिए करना है। 

गुरुवार को मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि पंजाब राज्य किसान और कृषि कामगार आयोग और एग्रीकल्चर मार्केटिंग इनोवेशन रिसर्च एंड इंटेलिजेंस सेंटर (एएमआईआरआईसी), जो किसानों के मुद्दों और उनकी सहायता के उद्देश्य पर केंद्रित हैं, के कार्यालय अब इस इमारत में स्थापित किए जाएंगे। 

इसमें पंजाब किसान विकास चेंबर समेत अन्य संस्थाओं को किसानों की भलाई के लिए सेमीनार करवाने की इजाजत दी जाया करेगी। प्रवक्ता ने आगे बताया कि मंत्रिमंडल का यह भी मानना है कि चेंबर को जारी किए 25 करोड़ के अनुदान में से बकाया पड़ी रकम भी वापस लेने की जरूरत है। 

मंत्रिमंडल की 25 फरवरी, 2016 को हुई मीटिंग में सोसायटी के तौर पर पंजाब किसान विकास चेंबर की स्थापना करने पर मोहर लगाई गई थी और गमाडा की तरफ से इसके लिए मोहाली में दो एकड़ जमीन मुफ्त मुहैया करवाई थी, जिसकी वास्तविक कीमत 8.47 करोड़ रुपये बनती है और इसे गमाडा की तरफ से अपनी स्कीम के सीएलयू चार्जिज और लाइसेंस फीस में से एडजस्ट कर लिया गया था। 

इसके अलावा 18 मई, 2016 के पत्र द्वारा पंजाब सरकार ने 10 करोड़ रुपये का अनुदान और 9 नवंबर, 2016 के पत्र द्वारा 15 करोड़ रुपये का अनुदान दिया था। सोसायटी ने 21.93 करोड़ रुपये की अनुमानित राशि के साथ कार्यालय स्थापित कर लिया और लगभग तीन करोड़ रुपये की बकाया रकम सोसायटी के पास ही है।

ऐसे खुला नाकामी का राज
राज्य सरकार ने 25 सितंबर 2019, 7 अक्तूबर 2019 और 22 अक्तूबर 2019 को पत्र जारी करके विकास चेंबर के महासचिव से पंजाब किसान विकास चेंबर की स्थापना के साथ किसानों को हुए लाभ, किसानों की आर्थिक हालत में सुधार लाने के लिए किये गए प्रयास और इस मकसद में उनकी सफलता संबंधी रिपोर्ट मांगी थी। 

चेंबर की तरफ से 7 नवंबर, 2019 को पत्र के जरिये रिपोर्ट भेजी गई, जिसे जांचने के बाद पाया गया है कि पंजाब किसान विकास चेंबर की स्थापना जिस मकसद से की गई थी, उस संबंध में कोई प्रयास नहीं किये गए और किसानों को कोई लाभ नहीं हुआ है।

टीचिंग व नान-टीचिंग कैडर के सेवा नियमों में संशोधन को मंजूरी

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में पंजाब मंत्रीमंडल ने गुरुवार को स्कूल शिक्षा विभाग के पंजाब ऐजुकेशनल सर्विस रूल्ज़ (टीचिंग कैडर) और नॉन-टीचिंग कैडर में संशोधनों को मंज़ूरी दे दी। इससे उन्हें अलग-अलग अदालत के फैसलों के अनुसार दुरुस्त करने के अलावा अलग-अलग कैडरों के लिए प्राथमिक योग्यताओं में तबदीली की जा सकेगी।

मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता के अनुसार- स्कूल शिक्षा विभाग की अलग-अलग सेवाओं के लिए सरकारी कर्मचारियों की सेवाओं के नियम बहुत पुराने हो चुके थे और सार्थकता से लगभग बाहर हो चुके थे, क्योंकि यह नियम 1941, 1955, 1978 1995 और 2004 में अलग-अलग टीचिंग और नॉन-टीचिंग कर्मचारियों की भर्ती और सेवा की शर्तों को नियमित करने के लिए बनाए गए थे। 

संशोधनों /बदलावों को अलग-अलग मौजूदा नियमों में, जैसे कि द पंजाब स्टेट एजुकेशनल (स्कूल एंड इंस्पैकशन कैडर जनरल) ग्रुप-ए सर्विस रूल्ज़ -2018, द पंजाब ऐजुकेशनल (स्कूल एंड इंस्पैकशन कैडर) ग्रुप-बी सर्विस रूल्ज -2018, द पंजाब स्टेट एलिमेंट्री एजुकेशन (प्रशासनिक कैडर) ग्रुप-बी सर्विस रूल्ज-2018, द पंजाब ऐजुकेशनल सर्विस (टीचिंग कैडर) ग्रुप-सी सर्विस रूल्ज-2018 और द पंजाब स्टेट एलिमेंट्री ऐजूकशनल (टीचिंग कैडर) ग्रुप-सी सर्विस रूल्ज-2018 में शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही, मंत्रीमंडल ने पंजाब राज्य खाद्य आयोग के वित्तीय वर्ष 2015-16 और 2016-17 की प्रशासनिक रिपोर्ट को भी मंजूरी दे दी।

उड्डयन उद्योग के लिए एमआरओ सुविधाओं की स्थापना को हरी झंडी

औद्योगिक एवं व्यापारिक विकास नीति-2017 में अहम क्षेत्र के तौर पर पहचाने गए शहरी उड्डयन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह के नेतृत्व में मंत्रीमंडल ने पटियाला एविएशन कांप्लेक्स (पीएसी) में रखरखाव, मरम्मत और जांच (मेंटीनेंस, रिपेयर और ओवरहाल) के विकास के लिए 5000 स्क्वायर फुट की क्षमता वाले चार स्थानों को लीज पर देने की मंजूरी दे दी है। 

मीटिंग के बाद सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि इस कदम का मकसद पंजाब के विकास को उड्डयन और रक्षा उद्योग के केंद्र के तौर पर उभारना है, ताकि इस सेक्टर के भविष्य की संभावनाओं का लाभ उठाने के साथ-साथ नौजवानों के लिए रोजगार के मौके सृजन किए जा सकें।  विभिन्न कंपनियों ने पंजाब में ऐसी सिलिटी स्थापित करने में रूचि दिखाई थी और हवाई अड्डों के नजदीक और प्राथमिक तौर पर हवाई अड्डों /फ्लाईंग क्लबों के हैंगरों के पास जगह देने की विनती की थी।

चंडीगढ़/पटियाला राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के नजदीक होने के कारण एमआरओ फैसिलिटी स्थापित करने के लिए उपयुक्त स्थान है परंतु शहरी उड्डयन विभाग के पास चण्डीगढ़/एसएएस नगर में कोई जमीन नहीं है। शहरी उड्डयन विभाग के पास पटियाला कंपलेक्स में लगभग 235 एकड़ जमीन है। 

इस समय कांप्लेक्स में एक फ्लाइंग ट्रेनिंग स्कूल, मध्यम आकार के जहाजों के लिए इस्तेमाल किया जा सकने वाला रनवे, इंजीनियरों के लिए पंजाब स्टेट ऐरोनॉटिकल इंजीनियरिंग कॉलेज और टेक्नीशियंस के लिए पंजाब एयरक्राफ्ट मेनटीनेंस इंजीनियरिंग कॉलेज स्थित हैं। इसके अलावा कांप्लेक्स में शहरी उड्डयन की रेगुलेटरी बॉडी-डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन भी स्थित है।

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