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कई और बूथों की रद्द हो सकती है अलॉटमेंट
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 25 Jul 2014 12:42 PM IST
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यूटी के उपायुक्त मोहम्मद शाईन की ओर से बुधवार को सेक्टर-41 स्थित कृष्णा मार्केट में छह बूथों की अलॉटमेंट को रद्द करने के बाद अब संपदा विभाग ने शहर के अन्य सेक्टरों की बूथ मार्केटों में भी शिकंजा कसने की तैयारी कर ली है।
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उम्मीद है कि आने वाले दिनों में शहर के कई और बूथ मार्केट्स में भी उन बूथों की अलॉटमेंट रद हो सकती है, जिनके अलॉटियों ने उसे बेच दिया था।
संपदा विभाग ने हाल ही में सेक्टर-11, 15, 24, 37 और 46 में स्थित बूथ मार्केट्स का सर्वे कराया था। यहां भी सर्वे के दौरान कुछ दुकानदार ऑनरशिप को साबित नहीं कर पाए थे। सर्वे के बाद शक के दायरे में आए अलॉटियों की सूची बना ली गई है।
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संपदा विभाग को शिकायत मिली थी कि इन बूथ मार्केट्स में भी कई दुकानदार अपना बूथ बेच चुके हैं। जबकि बूथ की अलॉटमेंट की शर्तों के हिसाब से वह बूथ नहीं बेच सकते थे।
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कुछ ऐसे भी दुकानदार थे जिन्होंने बूथ अलॉट होते ही इसे बेच दिया था। संपदा विभाग ने 8 से 10 लाख रुपये में बूथों की अलॉटमेंट की थी जबकि अलॉटियों ने इसे 35 से 40 लाख रुपये में बेच दिया था।
संपदा विभाग के कर्मचारियों पर भी हो सकती है कार्रवाई
संपदा विभाग एक तरफ जहां बूथ मालिकों पर कार्रवाई कर रहा है, वहीं इस पूरे मामले में संपदा विभाग के कुछ कर्मचारियों पर भी गाज गिर सकती है।
इनमें संपदा विभाग के तहसीलदार से लेकर सुपरिंटेंडेंट और इंस्पेक्टर भी शामिल हैं। ये सभी छह जून 2003 से लेकर 11 नवंबर 2008 तक हुई स्क्रीनिंग कमेटी की सात बैठकों से जुड़े थे और जांच में स्पष्ट हुआ था कि संपदा विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना इस तरह का बड़ा घोटाला नहीं हो सकता है।