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मनरेगा घोटाला: फरार अफसरों की संपत्ति जब्त होगी

Tue, 27 Oct 2015 06:26 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमरउजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 27 Oct 2015 06:26 PM IST
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MANREGA scam: assets of absconding officers will seize

अंबाला में मनरेगा घोटाले को लेकर सोमवार को हरियाणा के रजिस्ट्रार लोकायुक्त के समक्ष सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी ने स्टेटस रिपोर्ट पेश करते हुए बताया कि इस मामले में वन विभाग के नौ नामजद अफसरों की गिरफ्तारी के लिए उनके घरों और कार्यालयों पर कई बार छापे मारे गए, लेकिन सभी आरोपी अब तक फरार हैं।

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विजिलेंस ब्यूरो के जांच अधिकारी ने रजिस्ट्रार लोकायुक्त को दी अपनी रिपोर्ट में बताया कि राज्य विजिलेंस ब्यूरो अब इन फरार अधिकारियों के खिलाफ तीसरी बार गिरफ्तारी वारंट जारी करवाएगा और अंबाला जिला अदालत से आरोपियों की संपत्ति जब्त करने के आदेश भी लिए जाएंगे।
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इसी बीच, प्रदेश के मुख्य सचिव की ओर से पेश हुए अधिकारी ने रजिस्ट्रार लोकायुक्त को जानकारी दी कि घोटाले के नामजद आईएएस और एचसीएस अफसरों के स्पष्टीकरण सरकार को प्राप्त हो चुके हैं और उन पर सरकार विचार कर रही है। जांच अधिकारी और मुख्य सचिव के जवाब को रिकार्ड पर लेकर रजिस्ट्रार लोकायुक्त ने मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर तय कर दी।
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इस मामले के शिकायतकर्ता आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर ने बताया कि सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी राज्य विजिलेंस के डीएसपी शीतल सिंह धारीवाल ने लोकायुक्त रजिस्ट्रार को बताया कि नौ अफसरों में से चार को राज्य सरकार ने निलंबित कर दिया है, जबकि तीन अन्य को निलंबित करने के बारे में कार्रवाई की जा रही है।

उन्होंने बताया कि दो नामजद अफसर रिटायर हो चुके हैं। उल्लेखनीय है कि इस मामले की पिछली सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी ने रजिस्ट्रार लोकायुक्त को बताया था कि इस घोटाले के नौ नामजद अधिकारी फरार हैं और जिला अदालत से हासिल किए गए उनके गिरफ्तारी वारंट पर अमल नहीं हो सका है।

तब प्रदेश के मुख्य सचिव की ओर से कार्यालय अधीक्षक राजेन्द्र गुप्ता और अनिल डागर ने रजिस्ट्रार लोकायुक्त के समक्ष पेश होकर जानकारी दी थी कि आरोपी आईएएस व एचसीएस अधिकारियों से सरकार ने स्पष्टीकरण मांगा है।

यह है मामला
पानीपत के आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर ने वर्ष 2007-2010 के बीच अंबाला में मनरेगा परियोजना के तहत करोड़ों रुपये के घोटाले को उजागर करते हुए आखिरकार लोकायुक्त से दोषियों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग की थी।

लोकायुक्त को दी अर्जी में उनका कहना है कि अंबाला के तत्कालीन एडीसी संजीव वर्मा व वजीर सिंह गोयत की ओर से इस मामले में की गई जांच में घोटाला व गबन सामने आने के बावजूद अंबाला के तत्कालीन डीसी समेत चार उच्चाधिकारियों ने वन विभाग को करोड़ों रुपये के चेक आवंटित कर दिए।

मामले की विजिलेंस जांच में पाया गया कि अंबाला के तत्कालीन डीसी ने बिना किसी प्रशासनिक अनुमति और मनरेगा नियमों को ताक पर रखकर वन विभाग के अधिकारियों को चेक जारी कर भुगतान करवा दिया। इस पूरे मामले की जांच रिपोर्ट तत्कालीन डीजीपी विजिलेंस शरद कुमार ने हरियाणा सरकार को 16 नवंबर, 2012 को सौंप दी, लेकिन आरोपियों के खिलाफ हरियाणा सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की।

शिकायतकर्ता ने 12 जनवरी, 2015 को सीएम विंडो पर इसकी शिकायत दी तो हरियाणा सरकार ने वन विभाग के मुख्य आरोपी अधिकारी, डीएफओ (टी) अंबाला मंडल सहित नौ लोगों के खिलाफ 27 जनवरी, 2015 को एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए।


लेकिन सरकार की ओर से नामजद अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस मामले में सरकार की कार्यशैली के खिलाफ कपूर ने 30 जनवरी, 2015 को लोकायुक्त के समक्ष शिकायत दाखिल कर दी।

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