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SYL Dispute: मनोहर लाल ने मांगा हरियाणा के हिस्से का पानी, भगवंत मान ने हाथ जोड़े और मना कर दिया

Fri, 14 Oct 2022 08:02 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Fri, 14 Oct 2022 08:02 PM IST
सार

बैठक में पाकिस्तान जाने वाले पानी पर भी बात हुई लेकिन यह मसला भी नहीं सुलझ सका। एसवाईएल के पानी पर सियासत इस कदर हावी हो चुकी है कि पानी पाकिस्तान जा सकता है लेकिन दो राज्यों के बीच नहीं बंट सकता।

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Manohar Lal and Bhagwant Mann meeting on SYL inconclusive
भगवंत मान और मनोहर लाल। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाणा और पंजाब में दशकों से चला आ रहा विवाद दो राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक के बाद भी अनसुलझा रह गया। दोनों राज्यों में चुनावी मसला बन चुका यह मुद्दा आज भी सिरे नहीं चढ़ पाया। अब अगले साल जनवरी में इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। उससे पहले हरियाणा की तरफ से केंद्रीय जल संसाधन मंत्री के साथ बैठक करने का प्रयास किया जाएगा। फिलहाल बातचीत से यह मसला हल होता नहीं दिख रहा है। बैठक के दौरान हरियाणा ने विनम्रता के साथ अपना हक मांगा लेकिन भगवंत मान ने हाथ जोड़े और कम पानी का हवाला देते हुए मना कर दिया।

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शुक्रवार को हरियाणा भवन पर सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई बैठक में जैसे ही हरियाणा सरकार नहर निर्माण के मसले पर आती, पहले से तैयारी कर पहुंचे भगवंत मान बातचीत को केंद्र की तरफ घुमा देते हैं। मान यह चाह रहे थे कि इस मसले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक की जाए। दरअसल, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पहले ही हिसार में यह बात कह चुके हैं कि अगर हरियाणा और केंद्र सरकार इस मसले को नहीं सुलझाना चाहते तो प्रधानमंत्री उन्हें चाय पर बुलाएं वे बता देंगे कि एसवाईएल का समाधान क्या है। भगवंत मान उस समय केजरीवाल के साथ थे। आज भी उन्होंने केजरीवाल के उस बयान पर स्टैंड लिया और मामला प्रधानमंत्री के समक्ष ले जाने की वकालत की। 
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पाकिस्तान जा रहे पानी की कहानी
इस दौरान पाकिस्तान की तरफ जा रहे पानी की भी बात हुई लेकिन यह मसला भी नहीं सुलझ सका। एसवाईएल के पानी पर सियासत इस कदर हावी हो चुकी है कि पानी पाकिस्तान को जा सकता है लेकिन दो राज्यों के बीच नहीं बंट सकता।

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आज की उपलब्धता के मुताबिक मांगा पानी
1920 से 1960 तक पिछले 40 साल के एवरेज को निकाल कर 1981 में यह तय किया गया था कि 17.07 मिलियन एकड़ फुट पानी पंजाब हरियाणा को देगा लेकिन अब पानी कम हो चुका है, लिहाजा हरियाणा ने आज की उपलब्धता के मुताबिक 12.06 मिलियन एकड़ फुट पानी मांगा है।

देवेंद्र सिंह की बात पर कृष्ण कुमार ने पेश किए आंकड़े
बैठक में हरियाणा के मुख्यमंत्री के सलाहकार, सिंचाई देवेंद्र सिंह ने बात रखी कि एसवाईएल बनाना क्यों जरूरी है? उन्होंने कहा कि प्रो रेट्रा बेस पर पंजाब और हरियाणा दोनों ने 1981 का एग्रीमेंट साइन किया था। इस लिहाज से 21 प्रतिशत पानी हरियाणा को मिलना चाहिए। उनकी बात पर पंजाब से सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव कृष्ण कुमार ने पानी की कमी के आंकड़े पेश करते हुए इन्कार कर दिया।

हांसी बुटाना पर भी हुई बात, नतीजा शून्य
बैठक में एक बार तो बातचीत की दिशा एसवाईएल से हटकर हांसी बुटाना पर पहुंच गई। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि शाहबाद और पेहोवा के बीच में हांसी बुटाना का काम बंद पड़ा है। इसके निर्माण पर भी पंजाब को आपत्ति है, कोर्ट में केस है। इससे पहले कि भगवंत मान कुछ बोलें पंजाब के अधिकारियों ने उन्हें कानूनी दांव पेंच बताकर अपनी असमर्थता जाहिर कर दी। 

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर अमल के लिए बैठे
हरियाणा सरकार ने कहा कि आज हम लोग इसलिए बैठे हैं कि सुप्रीम कोर्ट के 2002 के निर्णय पर अमल कैसे करना है, यह तय किया जाए। पानी कितना आएगा यह तो ट्रिब्यूनल तय करेगा। अभी भाखड़ा नहर का कुछ पानी हरियाणा को मिल रहा है। हम पूरे हरियाणा में एसवाईएल के माध्यम से यह पानी चाहते हैं। बरसात के दौरान पंजाब में भी बाढ़ आती है, पानी पाकिस्तान चला जाता है लेकिन हरियाणा को नहीं मिलता।

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