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Chandigarh News: संसद में मनीष तिवारी बोले- लोगों का मानना, सरकार खत्म करना चाहती है पीयू की सीनेट

Wed, 04 Dec 2024 01:50 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 04 Dec 2024 01:50 PM IST
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Manish Tiwari said in Parliament- People believe that the government wants to abolish the Senate of PU
चंडीगढ़। सांसद मनीष तिवारी ने मंगलवार को संसद में पंजाब यूनिवर्सिटी में सीनेट का चुनाव न होने का मुद्दा उठाया। तिवारी ने शून्यकाल के दौरान कहा कि कई लोगों का मानना है कि सरकार पंजाब यूनिवर्सिटी में सीनेट चुनाव को खत्म करना चाहती है इसलिए जल्द से जल्द चुनाव अधिसूचित किए जाएं। इससे पहले तिवारी पीयू में छात्रों के चल रहे प्रदर्शन में भी शामिल हुए थे।
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संसद में मनीष तिवारी ने कहा कि चंडीगढ़ स्थित पंजाब यूनिवर्सिटी का सुनहरा इतिहास है। इस यूनिवर्सिटी की नींव लाहौर में 1882 में रखी गई थी। उसके बाद जब देश का विभाजन हुआ तो यह शिमला शिफ्ट हुई, उसके बाद होशियारपुर और फिर चंडीगढ़ में लंबे समय से है। पंजाब यूनिवर्सिटी का एक कानून है, जिसे पंजाब यूनिवर्सिटी एक्ट 1947 कहते हैं। उस कानून में साफ लिखा हुआ है कि पंजाब यूनिवर्सिटी को उसकी सीनेट चलाएगी लेकिन इस सीनेट का कार्यकाल 31 अक्तूबर 2024 को समाप्त हो गया है। तिवारी ने कहा कि एक्ट के अनुसार 240 दिन पहले यानी फरवरी 2024 में ही सीनेट चुनाव की नोटिफिकेशन हो जानी चाहिए थी लेकिन आज तक चुनाव की नोटिफिकेशन नहीं हुई। कहा कि ज्यादातर लोगों का मानना है कि सरकार पंजाब यूनिवर्सिटी की सीनेट को खत्म करना चाहती है इसलिए सरकार को जल्द इस चुनाव की नोटिफिकेशन जारी करनी चाहिए और चुनाव को संपन्न कराना चाहिए।
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तिवारी ने पिछले बुधवार को मुद्दा उठाने के लिए स्पीकर को दिया था नोटिस
मनीष तिवारी ने पिछले बुधवार को नोटिस देकर स्पीकर से आग्रह किया था कि उन्हें लोकसभा में शून्यकाल के दौरान पंजाब यूनिवर्सिटी के सीनेट चुनाव कराने में देरी का मुद्दा उठाने की अनुमति दी जाए। कहा था कि इससे यूनिवर्सिटी का प्रशासन ठप हो गया है और संस्था की स्वायत्तता के बारे में चिंताएं बढ़ गई हैं। ऐसी परिस्थिति में छात्रों और सीनेटरों का विरोध केंद्रीकरण और लोकतांत्रिक विचारों के नुकसान की आशंकाओं को उजागर करता है। तिवारी ने कहा कि चांसलर को कई बार निवेदन करने के बावजूद चुनाव के कार्यक्रम को स्वीकार नहीं किया गया है। तिवारी ने चुनाव प्रक्रिया में तेजी लाने और विश्वविद्यालय के लोकतांत्रिक ढांचे को बनाए रखने के लिए तत्काल कार्रवाई की बात कही थी।
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