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मंडी में आई धान की पहली ढेरी, मिला कम दाम
अमर उजाला/ब्यूरो, कुरुक्षेत्र
Updated Thu, 21 Aug 2014 11:50 PM IST
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इस्माईलाबाद में प्रदेश सरकार की सख्ती के बाद भी कुछ किसानों ने धान की अगेती रोपाई कर ली थी। वह फसल अब अनाजमंडी आ चुकी है।
इस्माईलाबाद अनाजमंडी में 1509 किस्म की धान की पहली ढेरी मंडी में पहुंची। यह धान दानीपुर के किसान अनूप चंद की एक एकड़ का करीब 20 क्विंटल धान था।
जो लगभग 3 हजार प्रति क्विंटल के दाम से बिका। फसल के इन दोमों से किसान नाखुश हैं। किसान अनूप ने बताया कि इस वर्ष बरसात न होने के कारण धान की फसल पर अधिक खर्च आया है।
जबकि पिछले साल अच्छी बरसात होने के कारण फसल पर खर्च भी कम आया था और जमीन का ठेका भी कम था। पिछले वर्ष यही धान करीब 4 हजार प्रति क्विंटल बिका था।
जिसकी औसत 22 से 25 क्विंटल प्रति एकड़ थी। इस वर्ष किसानों को खासा आर्थिक नुकसान झेलना पडे़गा। किसान गौरव, रामेश्वर शर्मा, विष्णु दत्त, महिंद्र सिंह व धर्मपाल ने प्रशासन से मांग की है कि पीआर किस्म की धान की तरह किसानों के बारीक किस्म के धान का भी मूल्य निर्धारित कर उसे खरीदें ताकि किसानों को आर्थिक नुकसान न झेलना पड़े।
क्या कहते हैं व्यापारी
जब इस बारे में में बारीक धान के खरीददार पुरुषोत्तम कंसल, मांगे राम, किशन (मटरू) से धान के कम दामों के बारे में बात की गई तो उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष 1509 किस्म का धान करीब 4 हजार प्रति क्विंटल बिका था।
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पिछले वर्ष से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में चावल की कीमतों में गिरावट से धान के खरीददारों को खासा नुकसान झेलना पड़ा था। इस वर्ष भी चावल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है।
इसके अलावा उन्होंने कहा कि अभी मंडी में नमी युक्त धान ही आ रहा है। धान के सही दामों का तो मंडी में सूखी फसल आने पर ही पता लगेगा।
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इस्माईलाबाद अनाजमंडी में 1509 किस्म की धान की पहली ढेरी मंडी में पहुंची। यह धान दानीपुर के किसान अनूप चंद की एक एकड़ का करीब 20 क्विंटल धान था।
जो लगभग 3 हजार प्रति क्विंटल के दाम से बिका। फसल के इन दोमों से किसान नाखुश हैं। किसान अनूप ने बताया कि इस वर्ष बरसात न होने के कारण धान की फसल पर अधिक खर्च आया है।
जबकि पिछले साल अच्छी बरसात होने के कारण फसल पर खर्च भी कम आया था और जमीन का ठेका भी कम था। पिछले वर्ष यही धान करीब 4 हजार प्रति क्विंटल बिका था।
जिसकी औसत 22 से 25 क्विंटल प्रति एकड़ थी। इस वर्ष किसानों को खासा आर्थिक नुकसान झेलना पडे़गा। किसान गौरव, रामेश्वर शर्मा, विष्णु दत्त, महिंद्र सिंह व धर्मपाल ने प्रशासन से मांग की है कि पीआर किस्म की धान की तरह किसानों के बारीक किस्म के धान का भी मूल्य निर्धारित कर उसे खरीदें ताकि किसानों को आर्थिक नुकसान न झेलना पड़े।
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क्या कहते हैं व्यापारी
जब इस बारे में में बारीक धान के खरीददार पुरुषोत्तम कंसल, मांगे राम, किशन (मटरू) से धान के कम दामों के बारे में बात की गई तो उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष 1509 किस्म का धान करीब 4 हजार प्रति क्विंटल बिका था।
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पिछले वर्ष से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में चावल की कीमतों में गिरावट से धान के खरीददारों को खासा नुकसान झेलना पड़ा था। इस वर्ष भी चावल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है।
इसके अलावा उन्होंने कहा कि अभी मंडी में नमी युक्त धान ही आ रहा है। धान के सही दामों का तो मंडी में सूखी फसल आने पर ही पता लगेगा।