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Hindi News ›   Chandigarh ›   Major Decision of Court in Dabwali Fire Accident

डबवाली अग्निकांड में अदालत का महत्वपूर्ण फैसला

Sat, 21 Feb 2015 02:53 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, डबवाली (सिरसा)
ब्यूरो/अमर उजाला, डबवाली (सिरसा) Updated Sat, 21 Feb 2015 02:53 PM IST
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Major Decision of Court in Dabwali Fire Accident

डबवाली में 23 दिसंबर1995 के भीषण अग्निकांड से प्रभावित परिवारों को राहत देते हुए शुक्रवार को न्यायालय ने डीएवी शिक्षण संस्थान को बकाया मुआवजा के चार करोड़ रुपये से अधिक राशि जमा करवाने का फैसला सुनाया।

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अग्निकांड से प्रभावित परिवार इस राशि के लिए पिछले 19 साल से संघर्ष कर रहे थे। अग्निकांड पीड़ितों ने वर्ष 1996 में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
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अदालत ने याचिका पर सुनवाई के बाद साल 2003 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश टीपी गर्ग की अध्यक्षात में एक सदस्यीय आयोग का गठन कर संबंधित पक्षों पर मुआवजा निर्धारित करने का अधिकार दिया। आयोग ने मार्च 2009 को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में रिपोर्ट दी।

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नवंबर 2009 में भी दिया था फैसला

Major Decision of Court in Dabwali Fire Accident

नवंबर 2009 में हाईकोर्ट ने मुआवजा के संबंध में हरियाणा सरकार को मय ब्याज 21 करोड़, 56 लाख रुपये और डीएवी स्कूल को करीब 31 करोड़ रुपए प्रभावित परिवारों को अदा करने के आदेश दिए। डीएवी मुआवजा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चला गया।

उच्चतम न्यायालय दिल्ली के न्यायाधीश न्यायमूर्ति बीएस चौहान और न्यायमूर्ति वी. गोपाल गौड़ा की बैंच ने डीएवी की दायर याचिका को खारिज करते हुए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय चंडीगढ़ के नौ नवंबर 2009 के निर्णय को बहाल रखा।

मामला उपमंडल न्यायिक दंडाधिकारी डबवाली को सौंप दिया गया। न्यायालय में सुनवाई के दौरान डीएवी अब तक करीब 27 करोड़ रुपए का भुगतान कर चुका था और शेष चार करोड़ से अधिक राशि का भुगतान अब करना होगा।

क्या था डबवाली में हुआ घटनाक्रम

Major Decision of Court in Dabwali Fire Accident

23 दिसंबर 1995 को चौटाला रोड पर स्थित राजीव मैरिज पैलेस (अब अग्निकांड स्मारक स्थल) में डीएवी स्कूल डबवाली का वार्षिक कार्यक्रम चल रहा था। इसी दौरान एक बजकर 47 मिनट पर शॉर्ट सर्किट से पंडाल के गेट से लगी आग ने देखते ही देखते भीषण रूप ले लिया। इस हादसे में स्कूली बच्चों सहित 442 लोगों की मौत हो गई थी।

अब तक का सफर

28 जनवरी 2003 : न्यायालय ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस टीपी गर्ग पर आधारित एक सदस्यीय आयोग का किया।
जून 2003 : 405 मृतकों के परिजनों तथा 88 घायलों ने मुआवजा राशि के लिए आवेदन किया।
नौ नवंबर 2009 : गर्ग आयोग की रिपोर्ट पर फैसला सुनाते हुए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने डीएवी संस्थान व हरियाणा सरकार को लगभग 34 करोड़ रुपये मुआवजा देने के आदेश दिए। लेकिन डीएवी निर्णय के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में चला गया।
नौ जनवरी 2013 : उच्चतम न्यायालय ने मामले की सुनवाई पूरी करते हुए अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया।
23 जनवरी 2013 : उच्चतम न्यायालय दिल्ली के न्यायाधीश न्यायमूर्ति बीएस चौहान तथा न्यायमूर्ति वी. गोपाल गौड़ा की बैंच ने डीएवी की दायर याचिका को खारिज करते हुए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय चंडीगढ़ के 9 नवम्बर 2009 के निर्णय को बहाल रखा।

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