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हरियाणा में मोदी की जीत का सबसे बड़ा कारण

Mon, 20 Oct 2014 11:07 AM IST
आलोक कुमार/अमर उजाला, चंडीगढ़
आलोक कुमार/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 20 Oct 2014 11:07 AM IST
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Main Reason of Narendra Modi Victory in Haryana Assembly Elections

नमो और शाह की जोड़ी ने हरियाणा में पूर्ण बहुमत हासिल कर प्रदेश की राजनीति में नई इबारत लिख दी है। भाजपा के मिली 47 सीटों में उत्तर हरियाणा के अहम योगदान रहा है। भाजपा के खाते में आई कुल 47 सीटों में से 22 सीटें उत्तर हरियाणा से मिली हैं।

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ऐसे में सीएम पद के लिए इस क्षेत्र के दिग्गजों को नकारा नहीं जा सकता है। खास बात यह रही है कि अंबाला, कुरुक्षेत्र और करनाल संसदीय क्षेत्र अंतर्गत आने वाली अधिकतर सीटों पर भाजपा का परचम रहा है।
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चुनाव नतीजे के अनुसार अंबाला संसदीय क्षेत्र अंतर्गत पंचकूला, कालका, अंबाला छावनी, अंबाला सिटी, नारायणगढ़, मुलाना, साढौरा, जगाधरी और यमुनानगर सभी सीटों पर कमल खिला है। कुरुक्षेत्र संसदीय क्षेत्र अंतर्गत थानेसर, गुहला चीका, शाहाबाद, लाडवा और रादौर सीट पर भाजपा ने जीत हासिल की है।
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वहीं करनाल संसदीय क्षेत्र अंतर्गत आने वाली करनाल, इंद्री, नीलोखेड़ी, असंध, घरौंडा, पानीपत शहरी, पानीपत ग्रामीण और इसराना सीटें जीत हासिल की है। लोकसभा चुनाव में भी तीनों लोकसभा सीटें भाजपा की झोली में गई थी।

ये रही जीत की अन्य वजहें

Main Reason of Narendra Modi Victory in Haryana Assembly Elections

गौरतलब हो कि अमेरिका यात्रा के बाद नरेंद्र मोदी ने चार अक्तूबर को करनाल में रैली को संबोधित कर विधानसभा चुनाव प्रचार का आगाज किया था। नमो ने करनाल के अलावा, कुरुक्षेत्र और जगाधरी में रैली कर वर्करों में जोश भरा था। प्रधानमंत्री के अलावा इन क्षेत्रों में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज, राजनाथ सिंह समेत कई दिग्गजों ने पूरी ताकत झोंक दी थी।

डेरा कार्ड
उत्तरी हरियाणा के अधिकतर सीटों पर डेरा समर्थकों की तादाद काफी है। मतदान के दो दिन पूर्व डेरा के समर्थन के ऐलान ने भाजपा के लिए संजीवनी का काम किया।

भेदभाव का मुद्दा

भाजपा के स्टार प्रचारकों ने चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस के दस वर्षों के शासनकाल में उत्तरी हरियाणा से भेदभाव का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। इसके अलावा इनेलो को भी निशाने पर रखा।

पहली बार इन 13 महिला विधायक की जीत

हरियाणा के इतिहास में यह भी पहली बार हुआ है जबकि 13 महिला उम्मीदवारों ने विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की है। इस चुनाव में 90 सीटों के लिए 116 महिला उमीदवार चुनाव मैदान में थी।

जो 13 महिला उम्मीदवार जीती है उनमें सबसे ज्यादा भाजपा की 8 विधायक बनी हैं। वहीं कांग्रेस की तीन और इंडियन नेशनल लोकदल और हरियाणा जनहित कांग्रेस की एक-एक म

भाजपा ने दी थी सबसे ज्यादा महिलाओं को टिकट

Main Reason of Narendra Modi Victory in Haryana Assembly Elections

इस बार के विधानसभा चुनावों में जो महिला उमीदवार चुनाव मैदान में थी उनमें कांग्रेस की 10, इनेलो की 16, भारतीय जनता पार्टी की 15, हरियाणा जन हित कांग्रेस (बीएल) की पांच और बीएसपी की छह महिला उमीदवार शामिल हैं। इसी प्रकार, हरियाणा लोक हित पार्टी की 12, हरियाणा जन चेतना पार्टी की चार महिला उम्मीदवार ने चुनाव लड़ा था।

सबसे ज्यादा रेवड़ी को मिले मत
महिलाओं को जो मत मिले उसके अनुसार पानीपत शहर की बीजेपी की महिला उमीदवार रोहिता रेवड़ी को सबसे ज्यादा 63.5 प्रतिशत मत मिले, वहीं मुलाना विधानसभा से जीत दर्ज करने वाली महिला उमीदवार बीजेपी की ही संतोष चौहान सारवान को 30.3 प्रतिशत सबसे कम मत प्राप्त हुए।

दूसरी बार जीतकर गीता भुक्कल ने तोड़ा मिथ

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हरियाणा के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब कोई शिक्षा मंत्री लगातार दूसरी बार चुनाव जीतने में सफल रहे हैं।  गीता भुक्कल झज्जर से कांग्रेस से फिर से चुनाव जीती है। पिछले कार्यकाल में ही जब गीता भुक्कल को शिक्षा मंत्री बनाया गया था तब से यह मिथ सामने आ रही थी कि जो भी शिक्षा मंत्री बना है वह फिर से चुनाव नहीं जीत पाया है।

साल 2005 में जब हुड्डा के नेतृत्व में पहली बार सरकार बनी तो उस समय फूल चंद मुलाना विधायक बने थे लेकिन वह साल 2009 में होने वाला चुनाव नहीं जीत सके। इससे पहले पूर्व शिक्षा मंत्री मांगे राम भी एक बार चुनाव जीतने के बाद दूसरे कार्यकाल में चुनाव नहीं जीत पाए हैं।

गीता भुक्कल ने झज्जर से इनेलो के उम्मीदवार साधुराम को 26 हजार 568 वोटों के अंतर से हराया है। गीता भुक्कल का कहना है कि यह सच है कि पिछले सभी कार्यकाल में कोई भी शिक्षा मंत्री फिर से चुनाव नहीं जीता है लेकिन उनकी जीत उनकी मेहनत का नतीजा है।

53 हजार लोगों ने दबाया नोटा

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विधानसभा चुनाव में कुल 53 हजार से ज्यादा लोगों को अपनी सीट पर चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार पंसद नहीं आए।  जो कुल मतदान का 0.4 प्रतिशत रहा। भारतीय चुनाव आयोग की ओर से नोटा का प्रावधान उन मतदाताओं के लिए किया गया है जो किसी भी दल या अन्य उमीदवार को मत नहीं देना चाहता।

डबवाली विधानसभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा 1549 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया। इसी प्रकार गुड़गांव में 1414 मतदाताओं ने नोटा को अपनाया। वहीं बादशाहपुर में 1287 और नरवाना में 1108 मतदाताओं ने नोटा का प्रयोग किया। हरियाणा विधानसभा चुनाव-2014 में सबसे कम नोटा का प्रयोग बवानीखेड़ा विधानसभा के 169 मतदाताओं ने किया है।

भाजपा को मिले 33.2 प्रतिशत वोट

मतगणना में भाजपा को 33.2 प्रतिशत वोट, इनेलो को  24.1  कांग्रेस को 20.06 जबकि 5 आजाद उम्मीदवारों को  10.6, हजका को 3.6, हिलोपा को 1.2, हजपा को 0.6 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए हैं।

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