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मेडम सो रही हैं...डिस्टर्ब मत करना, प्लीज
ब्यूरो/अमर उजाला, पानीपत
Updated Sat, 03 May 2014 03:00 PM IST
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मेडम सो रही हैं, मेडम खाना खा रही हैं...डिस्टर्ब मत करना। प्लीज। नहीं तो बाद में हमकों डाट पडेंगी। ऐसे कुछ शब्द हर रोज लघु सचिवालय स्थित एक कार्यालय में दोपहर होते ही चतुर्थ श्रेणी कर्मी फरियादियों व अन्य मिलने वालों को कहने लग जाते हैं। उक्त लोग भी अधिकारी का दरवाजा बंद मिलने व कर्मियों की बातों को सुनकर ऐसे ही लौट आते हैं।
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सरकार द्वारा अधिकारियों को बेशक हर रोज लोगों की समस्याओं को सुनने और उनका समाधान करने के निर्देश दे रखे हैं, बावजूद इन सबके जिला स्तर पर कार्यालयों में बैठे अधिकारी अपनी मस्ती में काम कर रहे हैं। जी हां हम यहां बात कर रहे हैं। लघु सचिवालय में स्थित एक विभाग के कार्यालय की।
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उक्त विभाग की अधिकारी का कार्यालय में आने का अपना स्टंडर्ड टाइम तो है और लंच ब्रेक का भी अपना समय है। अधिकारी दोपहर के वक्त घड़ी की सुई 12 पर जाते ही सुस्ताने लग जाती है। फरियादियों या अन्य लोगों के आने व उठने का इंतजार करने लग जाती है। ऐसा ही शुक्रवार को मिला।
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कुछ लोग अधिकारी से मिलने के लिए पहुंचे। उनके कार्यालय की तरफ बढ़े और दरवाजा खोलने लगे तो बाहर बैठे चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों ने कहा कि मेडम खाना खा रही हैं। वे एक बार तो लंच ब्रेक की समझ पीछे हट गए, लेकिन उन्होंने अगले ही पल समय देखा तो उनकी घड़ी में 12:45 बजे थे।
उन्होंने लंच ब्रेक एक बजे होने की कही तो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी कुछ भी बोलने से टल गए। ऐसे में उक्त लोगों ने अधिकारी को कुछ नहीं कहा और वापस आ गए।
एक बार पहले भी हो चुका है विवाद
उक्त अधिकारी के साथ एक पार्षद का पहले भी विवाद हो चुका है। मामला पिछले माह का है और अधिकारी ने भी अपना कार्यभार नया-नया संभाला था। पार्षद किसी काम से मेडम के पास गया। उक्त मेडम का दरवाजा अंदर से बंद था।
उसने काफी प्रयास के बाद दरवाजा खुलवाया और मेडम को अपना काम बताया। मेडम उसका काम करने की बजाय उल्टा उसको हड़काने लगी और तबीयत खराब होने की स्थिति में आराम तक न करने की कही। इस बात को लेकर दोनों में काफी तनातनी हो गई थी।