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लुधियाना रेल हादसा: दो मृतकों समेत चार के खिलाफ केस दर्ज, बंद फाटक पार करना पड़ा महंगा

Sun, 01 Mar 2020 10:32 PM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना/फिरोजपुर ( पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना/फिरोजपुर ( पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Sun, 01 Mar 2020 10:32 PM IST
सार

 
  • लगातार 20 मिनट से फाटक बंद होने के कारण लग गई थी वाहनों की लंबी लाइनें।
  • शनिवार को इतने बड़े हादसे के बाद भी नहीं लिया सबक, पहले निकलने की अब भी सबको जल्दी।

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Ludhiana rail accident, two reason behind it, one Traffic jam and another hurry up of people
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

साहनेवाल-लुधियाना सेक्शन के बीच स्थित ग्यासपुरा रेलवे क्रॉसिंग फाटक संख्या-सी-173 पर शनिवार रात को हुए हादसे का पहला कारण ट्रैफिक जाम और दूसरा कारण लोगों की जल्दबाजी रहा। दरअसल, ग्यासपुरा फाटक पार करते ही 50 मीटर की दूरी पर दिल्ली रोड है। यहां से फोकल प्वाइंट और ग्यासपुरा के रिहायशी एरिया को रास्ता जाता है। 

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शनिवार रात को जब लोग छुट्टी के बाद घरों को निकले तो आगे दिल्ली रोड पर रेड लाइट थी। इसके कारण सिग्नल पर जाम लग गया। वहीं दूसरी तरफ हादसे से पहले फाटक से चंडीगढ़ इंटरसिटी एक्सप्रेस निकली थी। उसके बाद नई दिल्ली-अमृतसर शताब्दी एक्सप्रेस (12013) का समय था। ऐसे में फाटक को खोला ही नहीं गया था। 
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20 मिनट से बंद फाटक के कारण वाहनों की लंबी लाइनें लग गई थी। इसी कारण लोगों ने जल्दबाजी दिखाई और इंटरसिटी के क्रास होने के बाद फाटक के नीचे से निकलने लगे। हालांकि ट्रैफिक को संभालने के लिए रेलवे की तरफ से दो मुलाजिमों की ड्यूटी लगाई गई है लेकिन लोगों की जल्दबाजी के सामने मुलाजिम की भी न चली। इस कारण हादसा हो गया।  
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रोजाना 30 बार बंद होता है फाटक 
ग्यासपुरा फाटक में रोजाना शाम को सात से नौ बजे के बीच करीब 25 ट्रेनें अपडाउन और मालगाड़ियां निकलती हैं। जिस कारण फाटक करीब 30 बार बंद होता है। रेलवे के एक सर्वे के अनुसार, रोजाना इस फाटक से करीब एक लाख वाहन गुजरते हैं। शनिवार को जिस समय हादसा हुआ, वह फैक्ट्रियों में छुट्टी का समय है। इस कारण ट्रैफिक दवाब ज्यादा था।

बहादुर पुलिस मुलाजिमः भगदड़ में बचाई कई लोगों की जान

शनिवार रात को जिस समय हादसा हुआ, वहां एक दम से भगदड़ मच गई थी। लोग इधर-उधर भागने लगे थे। कोई संभालने वाला नहीं था। मौके पर मौजूद आरपीएफ के कांस्टेबल गगनदीप सिंह और राजीव कुमार ने लोगों को शांत किया और आगे जाने से रोका। दोनों मुलाजिमों ने झटके से ट्रेन की तरफ जाने वाले करीब पांच छह लोगों को पकड़कर पीछे खींचा। 

हादसे के दौरान गोविंदा नाम के युवक की बाइक ट्रेन से हल्की सी टकरा गई थी। झटके से ही वह बेहोश हो गया और ट्रेन की तरफ जाने वाला था, लेकिन कांस्टेबल गगनदीप सिंह ने मोटरसाइकिल सहित गोविंदा को पीछे खींच लिया। अगर एक सेकेंड की भी देरी हो जाती तो गोविंदा भी बाइक सहित ट्रेन के नीचे आ गया होता। गगनदीप और राजीव को घटनास्थल का दौरा करने आए अधिकारियों ने भी शाबाशी दी। 

लोगों ने नहीं लिया कोई सबक 
फाटक के नीचे से निकलते समय तीन लोगों की शताब्दी की चपेट में आने से मौत हो गई थी। इतने बड़े हादसे के बाद भी लोगों ने कोई सबक नहीं लिया। रविवार को लोग उसी तरह ट्रैक को पार करने की फिराक में दिखे। हालांकि रविवार को पुलिस के सख्त पहरे के कारण पैदल निकलने वाले लोगों को भी रुकना पड़ा। 

चार के खिलाफ मामला दर्ज 

जीआरपी ने गैरकानूनी ढंग से फाटक पार करने के आरोप में दो मृतकों सहित चार लोगों पर मामला दर्जकर लिया है। जीआरपी ने रविवार को मृतक युवती गुरप्रीत कौर और रत्न लाल गर्ग के शव का पोस्टमार्टम करा शव वारिसों के हवाले कर दिया। वहीं हादसे में घायल अर्जुन अपोलो अस्पताल में भर्ती है और उसकी हालत अभी गंभीर बनी हुई है।

एक अन्य घायल सन्नी सिविल अस्पताल में दाखिल है। उसकी हालत खतरे से बाहर है। जीआरपी ने इन चारों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अर्जुन और सन्नी के ठीक होने का इंतजार कर रही है। जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। 

आरपीएफ के असिस्टेंट कमांडेंट सिक्योरिटी मौके पर पहुंचे 
रविवार को आरपीएफ के असिस्टेंट कमांडेट सिक्योरिटी अरुण कुमार ने अपने साथियों के साथ घटनास्थल का दौरा किया। उन्होंने अधिकारियों से हादसे के बारे में जानकारी ली और सुरक्षा के लिहाज से उन्हें कुछ टिप्स भी दिए। उन्होंने मुलाजिमों को ट्रैक पर से गुजरने वाले लोगों को कुछ दूरी पर ही रोकने के आदेश दिए। अरुण कुमार ने मुलाजिमों को कहा कि सुबह और शाम, जिस समय भारी भीड़ होती है, वहां मौजूद रहें।

जागरूकता अभियान चलाएगी आरपीएफ और जीआरपी
आरपीएफ के इंचार्ज इंस्पेक्टर अनिल ने बताया कि महानगर के ऐसे कई रेलवे फाटकों पर लोग रुकने के बजाय जल्दबाजी में उसे पार करने लगते हैं। ऐसे में कई बार हादसे हो जाते हैं। अब आरपीएफ और जीआरपी के मुलाजिम मिलकर लोगों को जागरूक करने के लिए कैंप लगाएंगे और लोगों को उनकी जान की कीमत बताकर ट्रैक असंवैधानिक तरीके से पार न करने की सलाह देंगे।

लोग बंद रेलवे फाटक को क्रास करते रहे, यह दुर्भाग्यपूर्ण है: डीआरएम 

रेल डिवीजन फिरोजपुर के डीआरएम राजेश अग्रवाल ने लुधियाना में शताब्दी रेल हादसे को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। डीआरएम ने कहा कि उक्त फाटक से तीन रेल पटरी गुजरती है और यहां से कई ट्रेनों की आवाजाही होती है। ऐसे में उक्त फाटक काफी समय तक बंद रहता है।

इस फाटक पर एक आरपीएफ का जवान भी नियुक्त किया गया है, जो फाटक बंद कराने में गेटमैन की मदद करता है। जब फाटक बंद किया जाता है, तब भी लोग गुजरना बंद नहीं करते हैं। इसलिए उक्त जवान फाटक बंद करवाने के समय लोगों को रोकने का काम करता है, ताकि बंद करते समय फाटक का लोहे वाला पोल लोगों को लग न जाए।

डीआरएम अग्रवाल ने बताया कि भारतीय रेलवे में सिग्नल की व्यवस्था इस प्रकार की गई है कि यदि रेलवे फाटक खुला हो तो किसी भी गाड़ी के लिए सिग्नल डाउन नहीं होगा। इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग पैनल के द्वारा रूट सेट और लॉक होने के बाद ही सिग्नल डाउन होते हैं। इसमें कोई भी मानवीय भूल चूक की संभावना नहीं होती है। अत: यह फाटक दोनों तरफ से बंद था। 

डीआरएम ने लोगों से अपील की कि रेलवे फाटक को बंद होने की स्थिति में उसे पार न करें। जब गेटमैन फाटक बंद कर रहा हो तो उसे जल्दबाजी में पार करने का प्रयास न करें। पुल का प्रयोग करें अथवा रेल पटरियों को सुरक्षित स्थान से पार करें। रेल की पटरियों एवं ट्रेन से हमेशा सुरक्षित दूरी बना कर रखें।

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