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लंदन के मेयर ने कहा- जलियांवाला बाग के शहीदों से माफी मांगे ब्रिटिश सरकार
रमेश शुक्ला सफर/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 07 Dec 2017 09:14 AM IST
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लंदन के मेयर सदीक खान
- फोटो : अमर उजाला
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ब्रिटिश ब्रिगेडियर जनरल डायर की ओर से निहत्थे लोगों पर चलाई गईं गोलियों के निशान जलियांवाला बाग की दीवारों पर देखकर लंदन के मेयर सदीक खान की आंखें नम हो गईं। उन्होंने कहा कि 13 अप्रैल 1919 की घटना बेहद दुखद है। यहां पर जो त्रासदी हुई उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। ब्रिटिश सरकार को जलियांवाला बाग के शहीदों से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने उपरोक्त बातें जलियांवाला बाग विजिटर बुक में भी लिखी।
इस दौरान उन्होंने शहीदी कुआं भी देखा। अंग्रेजी में लिखी लाइनों में शहीदी कुआं का इतिहास पढ़ा तो नजरें सामने दीवार पर लगी गोलियों के निशानों पर जा टिकी। कुछ देर तक गोलियों के निशान निहारते रहे। उसके बाद वह शहीदों को नमन करने शहीदी लाट पर जा पहुंचे। हाथ जोड़ शहीदों को नमन किया और अखंड ज्योति पर कुछ देर तक हाथ जोड़कर खड़े रहे।
पाक मूल के ब्रिटिश मेयर सदीक खान भारत और पाक दोनों देशों के तीन-तीन बड़े शहरों के अधिकारिक दौरे पर हैं। उन्होंने मंगलवार रात को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ डिनर पर बैठक भी की। बुधवार को अमृतसर पहुंचे लंदन के मेयर श्री दरबार साहिब में नतमस्तक हुए। परिक्रमा के बाद उन्होंने लंगर भवन में पंगत में संगत के साथ बैठकर प्रसाद छका। उन्हें शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के ओर से सम्मानित किया गया। श्री दरबार साहिब की विजिटर बुक में उन्होंने लिखा कि ऐसे पवित्र स्थान पर आकर मुझे बहुत खुशी महसूस हुई, मैं धन्य हो गया।
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इस दौरान उन्होंने शहीदी कुआं भी देखा। अंग्रेजी में लिखी लाइनों में शहीदी कुआं का इतिहास पढ़ा तो नजरें सामने दीवार पर लगी गोलियों के निशानों पर जा टिकी। कुछ देर तक गोलियों के निशान निहारते रहे। उसके बाद वह शहीदों को नमन करने शहीदी लाट पर जा पहुंचे। हाथ जोड़ शहीदों को नमन किया और अखंड ज्योति पर कुछ देर तक हाथ जोड़कर खड़े रहे।
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पाक मूल के ब्रिटिश मेयर सदीक खान भारत और पाक दोनों देशों के तीन-तीन बड़े शहरों के अधिकारिक दौरे पर हैं। उन्होंने मंगलवार रात को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ डिनर पर बैठक भी की। बुधवार को अमृतसर पहुंचे लंदन के मेयर श्री दरबार साहिब में नतमस्तक हुए। परिक्रमा के बाद उन्होंने लंगर भवन में पंगत में संगत के साथ बैठकर प्रसाद छका। उन्हें शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के ओर से सम्मानित किया गया। श्री दरबार साहिब की विजिटर बुक में उन्होंने लिखा कि ऐसे पवित्र स्थान पर आकर मुझे बहुत खुशी महसूस हुई, मैं धन्य हो गया।
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‘100वीं बरसी से पहले माफी मांग ले ब्रिटिश सरकार’
London Mayor Sadiq Khan
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने घटना को बताया था शर्मनाक
जलियांवाला बाग नरसंहार के 94 सालों के बाद 2013 में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन जलियांवाला बाग आए थे। दीवारों पर गोलियों के निशान और शहीदी कुआं भी देखा। उन्होंने जलियांवाला बाग के विजिटर बुक में लिखा था ब्रिटेन के इतिहास में यह बेहद शर्मनाक घटना है। इस त्रासदी को हमें कभी नहीं भूलना चाहिए। हमें सुनिश्चित करना चाहिए कि इंग्लैंड हमेशा शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के पक्ष में खड़ा रहे।
‘100वीं बरसी से पहले माफी मांग ले ब्रिटिश सरकार’
साहित्यकार व इतिहासकार देवदर्द का कहना है कि जलियांवाला बाग की 100वीं बरसी पर ब्रिटिश सरकार को माफी मांग लेनी चाहिए। ब्रिटिश हुकूमत का कोई भी शाही परिवार का सदस्य या प्रधानमंत्री शहीदों से आकर माफी मांग लेते हैं तो यह उनके लिए अच्छा अवसर होगा।
दिल से लिखा या राजनीति ने लिखवाया
लंदन के मेयर सदीक खान का जलियांवाला बाग की 100वीं बरसी के पहले जलियांवाला बाग के शहीदों से ब्रिटिश हुकूमत की ओर से माफी मांगने का बयान ब्रिटेन और भारत के रिश्तों के बीच नाटकीय मोड़ ला सकता है। लंदन के मेयर का इतना बड़ा बयान उस समय आया है, जब भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते इतने बेहतर नहीं हैं। ऐसे में पाक मूल निवासी सदीक खान का यह बयान ब्रिटिश हुकूमत की रजामंदी से आया है या फिर अखंड भारत के लिए लड़ने वाले भारत ऐसे लोगों का वशंज जो पाकिस्तान जा बसा है वह चाहता है कि उन पर राज करने वाले अंग्रेजों को अपनी गलती की माफी मांगनी ही चाहिए। अब यह लाइनें उन्होंने दिल से लिखी या उनसे ब्रिटिश हुकूमत ने लिखवाई यह तो वही बेहतर जान सकते हैं।
2019 में 100वीं बरसी में जुटेंगी दुनिया
13 अप्रैल 2019 में जलियांवाला बाग की 100वीं बरसी मनाई जा रही है। इसमें शहीदों को नमन करने के लिए जलियांवाला बाग मेमोरियल ट्रस्ट के पदाधिकारियों को बुलाया जाएगा। ट्रस्ट के नियमों के मुताबिक इसका अध्यक्ष मौजूदा प्रधानमंत्री होता है। 100वीं बरसी पर शहीदों को नमन करने के लिए कई देशों के प्रतिनिधियों को बुलाया जाना है। जलियांवाला बाग में नरसंहार में 379 मौतें हुई थीं। करीब 1200 सौ लोग घायल हुए थे। वहीं शहीदी कुआं में 600 से अधिक लोगों ने जान बचाने के लिए छलांग लगा दी थी।
जलियांवाला बाग नरसंहार के 94 सालों के बाद 2013 में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन जलियांवाला बाग आए थे। दीवारों पर गोलियों के निशान और शहीदी कुआं भी देखा। उन्होंने जलियांवाला बाग के विजिटर बुक में लिखा था ब्रिटेन के इतिहास में यह बेहद शर्मनाक घटना है। इस त्रासदी को हमें कभी नहीं भूलना चाहिए। हमें सुनिश्चित करना चाहिए कि इंग्लैंड हमेशा शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के पक्ष में खड़ा रहे।
‘100वीं बरसी से पहले माफी मांग ले ब्रिटिश सरकार’
साहित्यकार व इतिहासकार देवदर्द का कहना है कि जलियांवाला बाग की 100वीं बरसी पर ब्रिटिश सरकार को माफी मांग लेनी चाहिए। ब्रिटिश हुकूमत का कोई भी शाही परिवार का सदस्य या प्रधानमंत्री शहीदों से आकर माफी मांग लेते हैं तो यह उनके लिए अच्छा अवसर होगा।
दिल से लिखा या राजनीति ने लिखवाया
लंदन के मेयर सदीक खान का जलियांवाला बाग की 100वीं बरसी के पहले जलियांवाला बाग के शहीदों से ब्रिटिश हुकूमत की ओर से माफी मांगने का बयान ब्रिटेन और भारत के रिश्तों के बीच नाटकीय मोड़ ला सकता है। लंदन के मेयर का इतना बड़ा बयान उस समय आया है, जब भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते इतने बेहतर नहीं हैं। ऐसे में पाक मूल निवासी सदीक खान का यह बयान ब्रिटिश हुकूमत की रजामंदी से आया है या फिर अखंड भारत के लिए लड़ने वाले भारत ऐसे लोगों का वशंज जो पाकिस्तान जा बसा है वह चाहता है कि उन पर राज करने वाले अंग्रेजों को अपनी गलती की माफी मांगनी ही चाहिए। अब यह लाइनें उन्होंने दिल से लिखी या उनसे ब्रिटिश हुकूमत ने लिखवाई यह तो वही बेहतर जान सकते हैं।
2019 में 100वीं बरसी में जुटेंगी दुनिया
13 अप्रैल 2019 में जलियांवाला बाग की 100वीं बरसी मनाई जा रही है। इसमें शहीदों को नमन करने के लिए जलियांवाला बाग मेमोरियल ट्रस्ट के पदाधिकारियों को बुलाया जाएगा। ट्रस्ट के नियमों के मुताबिक इसका अध्यक्ष मौजूदा प्रधानमंत्री होता है। 100वीं बरसी पर शहीदों को नमन करने के लिए कई देशों के प्रतिनिधियों को बुलाया जाना है। जलियांवाला बाग में नरसंहार में 379 मौतें हुई थीं। करीब 1200 सौ लोग घायल हुए थे। वहीं शहीदी कुआं में 600 से अधिक लोगों ने जान बचाने के लिए छलांग लगा दी थी।