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हरियाणा में इस बार बहुकोणीय होगा चुनावी संग्राम
डॉ. सुरेंद्र धीमान/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 08 Mar 2014 01:11 PM IST
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हरियाणा में इस बार लोकसभा चुनाव बहुकोणीय संग्राम बन गया है। छह प्रमुख दलों कांग्रेस, इनेलो, बसपा, आम आदमी पार्टी और भाजपा-हजकां (गठबंधन) के मैदान में उतरने से मुकाबले रोचक होंगे। पहली बार प्रदेश के चुनाव मैदान में उतर रही ‘आप’ प्रदेश के परंपरागत दलों के वोट बैंक को प्रभावित करेगी।
वर्ष 2009 में इनेलो और भाजपा मिलकर 5-5 सीटों पर चुनाव लड़े थे जबकि कांग्रेस, हजकां और बसपा ने अलग-अलग सभी 10 सीटों पर चुनाव लड़ा था। उस समय कांग्रेस को 41.79 फीसदी वोट मिले और उसके नौ सांसद बने थे।
हजकां को तब 10.01 फीसदी वोट मिले और उसका एक सांसद बना था। भाजपा, इनेलो और बसपा खाली हाथ रहे थे। हालांकि उस समय भी इनेलो को 15.78, बीएसपी को 15.75 और भाजपा को 12.09 फीसदी वोट मिले थी।
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अंबाला, फरीदाबाद, सोनीपत में भाजपा दूसरे नंबर, गुड़गांव और करनाल में तीसरे नंबर पर रही थी। कुरुक्षेत्र, सिरसा, हिसार, रोहतक और भिवानी-महेंद्रगढ़ में इनेलो दूसरे नंबर पर रही थी। बसपा करनाल में दूसरे, सोनीपत, सिरसा, अंबाला में तीसरे नंबर पर रही थी।
2014 में प्रदेश में भाजपा और हजकां का गठबंधन है। भाजपा आठ और हजकां दो सीटों पर चुनाव लड़ेगी। वहीं, इनेलो, कांग्रेस, बसपा और ‘आप’ अकेले चुनाव लड़ेंगी। पहली बार मैदान में ‘आप’ गुड़गांव, फरीदाबाद, सोनीपत आदि सीटों पर असरदार प्रदर्शन कर अन्य पार्टियों के राजनीतिक समीकरण बिगाड़ सकती है।
पांच महीने में बदले थे समीकरण
मई, 2009 को लोकसभा चुनाव के पांच महीने बाद ही हरियाणा में जब विधानसभा चुनाव हुए, तब तक प्रदेश में समीकरण बदल गए थे। कांग्रेस, भाजपा, हजकां, बसपा का वोट बैंक लोकसभा चुनाव के मुकाबले घट गया था और इनेलो का 10.01 फीसदी बढ़ गया था।
विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 35.08, भाजपा को 9.04, बसपा को 6.73, हजकां को 7.40 और इनेलो को 25.79 फीसदी वोट मिले थे। कांग्रेस को 40, इनेलो को 31, उनकी समर्थक अकाली दल को एक, बसपा को एक, हजकां को छह, भाजपा को चार सीटें मिली जबकि सात निर्दलीय विधायक बने थे।
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वर्ष 2009 में इनेलो और भाजपा मिलकर 5-5 सीटों पर चुनाव लड़े थे जबकि कांग्रेस, हजकां और बसपा ने अलग-अलग सभी 10 सीटों पर चुनाव लड़ा था। उस समय कांग्रेस को 41.79 फीसदी वोट मिले और उसके नौ सांसद बने थे।
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हजकां को तब 10.01 फीसदी वोट मिले और उसका एक सांसद बना था। भाजपा, इनेलो और बसपा खाली हाथ रहे थे। हालांकि उस समय भी इनेलो को 15.78, बीएसपी को 15.75 और भाजपा को 12.09 फीसदी वोट मिले थी।
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अंबाला, फरीदाबाद, सोनीपत में भाजपा दूसरे नंबर, गुड़गांव और करनाल में तीसरे नंबर पर रही थी। कुरुक्षेत्र, सिरसा, हिसार, रोहतक और भिवानी-महेंद्रगढ़ में इनेलो दूसरे नंबर पर रही थी। बसपा करनाल में दूसरे, सोनीपत, सिरसा, अंबाला में तीसरे नंबर पर रही थी।
2014 में प्रदेश में भाजपा और हजकां का गठबंधन है। भाजपा आठ और हजकां दो सीटों पर चुनाव लड़ेगी। वहीं, इनेलो, कांग्रेस, बसपा और ‘आप’ अकेले चुनाव लड़ेंगी। पहली बार मैदान में ‘आप’ गुड़गांव, फरीदाबाद, सोनीपत आदि सीटों पर असरदार प्रदर्शन कर अन्य पार्टियों के राजनीतिक समीकरण बिगाड़ सकती है।
पांच महीने में बदले थे समीकरण
मई, 2009 को लोकसभा चुनाव के पांच महीने बाद ही हरियाणा में जब विधानसभा चुनाव हुए, तब तक प्रदेश में समीकरण बदल गए थे। कांग्रेस, भाजपा, हजकां, बसपा का वोट बैंक लोकसभा चुनाव के मुकाबले घट गया था और इनेलो का 10.01 फीसदी बढ़ गया था।
विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 35.08, भाजपा को 9.04, बसपा को 6.73, हजकां को 7.40 और इनेलो को 25.79 फीसदी वोट मिले थे। कांग्रेस को 40, इनेलो को 31, उनकी समर्थक अकाली दल को एक, बसपा को एक, हजकां को छह, भाजपा को चार सीटें मिली जबकि सात निर्दलीय विधायक बने थे।