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शिअद-भाजपा विवाद में कूदी आरएसएस की 'राष्ट्रीय सिख संगत', सिरसा के बयान पर उठाए सवाल
Fri, 01 Feb 2019 09:56 AM IST
Priyesh Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर(पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर(पंजाब)
Published by: Priyesh Mishra
Updated Fri, 01 Feb 2019 09:56 AM IST
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Manjinder Singh Sirsa
- फोटो : अमर उजाला
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भाजपा और अकाली दल में चल रहे विवाद के मैदान में आरएसएस आकर खड़ी हो गई है। दरअसल, सिख विंग ‘राष्ट्रीय सिख संगत’ ने अकाली दल को चेताया है। विंग का कहना है कि अकाली दल हमेशा धार्मिक स्थानों का उपयोग अपने राजनीतिक हितों के लिए करता रहा है। अकाली दल ने अपने राजनीतिक हित और सत्ता के बल पर गुरमीत राम रहीम को माफी दिलाई थी।
‘राष्ट्रीय सिख संगत’ ने कहा है कि मनजिंदर सिरसा को पार्टी विधायक रहते हुए पार्टी की आलोचना का अधिकार नहीं है, उनको विधायक पद से इस्तीफा देकर आलोचना करनी चाहिए। आरएसएस के विंग राष्ट्रीय सिख संगत के महासचिव डॉ. अवतार सिंह ने कहा कि सिख विषयों पर कार्य करना केवल अकाली दल का एकाधिकार नहीं है। अकाली दल हमेशा धार्मिक स्थानों का उपयोग अपने राजनीतिक हितों के लिए करता है।
पहले अकाली दल की ओर से सिख संस्थाओं में की गई दखलंदाजी शिखर पर थी, सब डेरा सच्चा सौदा गुरमीत राम रहीम अपने राजनीतिक हित के लिए सिंह साहिबानों पर दबाव डालकर उसको रातोंरात माफ कर दिया और एसजीपीसी के जरिये 82 लाख रुपये का विज्ञापन दिलाया, ताकि डेरा समर्थकों के वोट प्राप्त किये जा सके। शिअद महासचिव मनजिंदर सिंह सिरसा को पार्टी के विधायक रहते हुए भाजपा की अलोचना करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
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अगर वह किसी निर्णय पर असहमत हैं तो पहले पार्टी से त्यागपत्र दें। अच्छे गुरुसिखों को समाज सेवा व श्री तख्त साहिब के लिए आगे लाएं। महाराष्ट्र व भारत में अनेक ऐसे गैर राजनीतिक गुरु सिख हैं जो तख्त साहिब की भव्यता में बड़ा योगदान कर सकते हैं। सरकार का फैसला और पार्टी का निर्णय दोनों अलग अलग होते हैं। अकाली दल को तकलीफ इसलिए है कि अच्छे गुरु सिख बोर्ड में आ जाएंगे तो अकालियों की मनमर्जी कम हो जाएगी और वह तख्त साहिब का उपयोग अपने राजनीतिक हित के लिए नहीं कर पाएंगे।
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‘राष्ट्रीय सिख संगत’ ने कहा है कि मनजिंदर सिरसा को पार्टी विधायक रहते हुए पार्टी की आलोचना का अधिकार नहीं है, उनको विधायक पद से इस्तीफा देकर आलोचना करनी चाहिए। आरएसएस के विंग राष्ट्रीय सिख संगत के महासचिव डॉ. अवतार सिंह ने कहा कि सिख विषयों पर कार्य करना केवल अकाली दल का एकाधिकार नहीं है। अकाली दल हमेशा धार्मिक स्थानों का उपयोग अपने राजनीतिक हितों के लिए करता है।
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पहले अकाली दल की ओर से सिख संस्थाओं में की गई दखलंदाजी शिखर पर थी, सब डेरा सच्चा सौदा गुरमीत राम रहीम अपने राजनीतिक हित के लिए सिंह साहिबानों पर दबाव डालकर उसको रातोंरात माफ कर दिया और एसजीपीसी के जरिये 82 लाख रुपये का विज्ञापन दिलाया, ताकि डेरा समर्थकों के वोट प्राप्त किये जा सके। शिअद महासचिव मनजिंदर सिंह सिरसा को पार्टी के विधायक रहते हुए भाजपा की अलोचना करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
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अगर वह किसी निर्णय पर असहमत हैं तो पहले पार्टी से त्यागपत्र दें। अच्छे गुरुसिखों को समाज सेवा व श्री तख्त साहिब के लिए आगे लाएं। महाराष्ट्र व भारत में अनेक ऐसे गैर राजनीतिक गुरु सिख हैं जो तख्त साहिब की भव्यता में बड़ा योगदान कर सकते हैं। सरकार का फैसला और पार्टी का निर्णय दोनों अलग अलग होते हैं। अकाली दल को तकलीफ इसलिए है कि अच्छे गुरु सिख बोर्ड में आ जाएंगे तो अकालियों की मनमर्जी कम हो जाएगी और वह तख्त साहिब का उपयोग अपने राजनीतिक हित के लिए नहीं कर पाएंगे।