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Hindi News ›   Chandigarh ›   Loksabha Election 2019, BJP vs Congress on Rohtak Loksabha Seat

लोकसभा चुनावः रोहतक सीट से 11 बार कांग्रेस, दो बार जनसंघ, एक बार गठबंधन में जीती भाजपा

Tue, 09 Oct 2018 10:13 AM IST
विजेंद्र कौशिक/अमर उजाला, सांपला(रोहतक)
विजेंद्र कौशिक/अमर उजाला, सांपला(रोहतक) Updated Tue, 09 Oct 2018 10:13 AM IST
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Loksabha Election 2019, BJP vs Congress on Rohtak Loksabha Seat
भाजपा-कांग्रेस
लोकसभा चुनाव 2019 के मद्देनजर अगर रोहतक लोकसभा सीट पर बीजेपी और कांग्रेस की जीत का अवलोकन करें, तो 62 साल का इतिहास बहुत कुछ कहता है। कांग्रेस के गढ़ सांपाल में पीएम नरेंद्र मोदी की रैली भाजपा का 2019 के चुनाव से पहले एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक है।
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भाजपा यह सीट युद्ध की छाया में ही जीती है। दो बार 1962 व 1971 में जनसंघ के बैनर तले, जबकि 1999 में इनेलो-भाजपा का गठबंधन था। पिछले 28 साल में केवल एक बार हुड्डा परिवार को मात देने वाली भाजपा किसी भी तरह अब हुड्डा परिवार से सीट छीनना चाहती है।
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जानकार बताते हैं कि चौधरी बीरेंद्र सिंह, पूर्व सीएम हुड्डा और चौटाला परिवार से कम कद्दावर नेता नहीं हैं। अगर वे मैदान में उतर आएं तो उनके खिलाफ रणनीति बनाकर खेलना भी आसान नहीं होगा और अगर समीकरण बदले तो उन्हें जीतने से भी कोई रोक नहीं पाएगा।
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1952 से 2014 तक 16 बार हुए चुनाव

Loksabha Election 2019, BJP vs Congress on Rohtak Loksabha Seat
bjp-congress
जानकारों के मुताबिक, प्रदेश के अंदर रोहतक, सोनीपत व झज्जर को जाटों का गढ़ माना जाता है। चुनाव परिणाम भी इस पर मुहर लगाते हैं। 1952 से लेकर 2014 तक 16 बार चुनाव हुए हैं। इसमें ज्यादातर समय जाट समुदाय से नेता सांसद बना है। इसमें 11 बार कांग्रेस जीती है।

केवल 1962, 1971 व 1999 और 1977, 1980 व 1989 में गैर कांग्रेसी प्रत्याशी को जीत हासिल हुई। कांग्रेस के अंदर भी 1952 व 1957 में सांसद दीपेंद्र हुड्डा के दादा रणबीर सिंह हुड्डा, 1991, 1996, 1998 व 2004 में भूपेंद्र हुड्डा, 2005, 2009 व 2014 में दीपेंद्र हुड्डा सांसद बने।

1962 में जनसंघ के लहरी सिंह, 1971 में मुख्तयार सिंह मलिक व 1999 में इनेलो-भाजपा गठबंधन के कैप्टन इंद्रसिंह गैर कांग्रेसी सांसद बने, जबकि 1989 में समाजवादी जनता पार्टी की टिकट पर चौधरी देवीलाल सांसद चुने गए थे। दो बार जनता पार्टी 1977 व 1980 में जीती।
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