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वैट रिफंड घोटाला: अफसरों पर चला लोकायुक्त का डंडा, संयुक्त आयुक्त को फटकार
यशपाल शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 19 Apr 2017 01:07 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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आबकारी एवं कराधान विभाग के 10618 करोड़ रुपये के फर्जी वैट रिफंड घोटाले में दोषी अधिकारियों पर लोकायुक्त का शिकंजा कसता जा रहा है। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई न करने पर लोकायुक्त ने विभाग के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। मंगलवार को लोकायुक्त की अदालत में मामले की सुनवाई हुई। विभाग की ओर से संयुक्त आयुक्त बिक्री कर और अतिरिक्त न्यायवादी उपस्थित हुए, जबकि शिकायतकर्ता कैथल निवासी सतबीर किछाणा ने अपना पक्ष रखा।
अधिकारियों ने सुनवाई के दौरान विभाग की 2016-17 की वार्षिक रिपोर्ट पेश कर दी, इस पर लोकायुक्त एनके अग्रवाल ने उन्हें डांट लगाई। लोकायुक्त ने पूछा कि कार्रवाई रिपोर्ट कहां है। उन्होंने शिकायतकर्ता से पूछा कि वे विभाग की अब तक की कार्रवाई से संतुष्ट हैं या नहीं, इस पर सतबीर ने कहा कि विभाग ने 18 मार्च 2015 के लोकायुक्त की अदालत केफैसले पर अब तक अमल नहीं किया है, वे फैसले के अनुसार लगभग तीन दर्जन दोषी अधिकारियों पर आपराधिक कार्रवाई और उनसे घोटाले की राशि की रिकवरी चाहते हैं।
इस पर लोकायुक्त ने विभाग के संयुक्त आयुक्त को निर्देश दिए कि 23 मई से पहले कड़ी कार्रवाई कर रिपोर्ट उन्हें सौंपें। यह आखिरी मौका है। अधिकारियों पर कार्रवाई न होने पर लोकायुक्त के पास मुख्य सचिव को कार्रवाई के लिए पत्र लिखने का अधिकार है। सतबीर ने कहा कि आबकारी एवं कराधान विभाग दोषियों को बचाने का प्रयास कर रहा है।
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ये है मामला
अधिकारियों ने राइस इंडस्ट्री, बिल्डर्स, सिगरेट डीलर्स जैसे बड़े करोबारियों को वैट रिफंड किए हैं। पूरा मामला 2005 से 2013 के बीच का है। तत्कालीन लोकायुक्त जस्टिस प्रीतमपाल के निर्देश पर गठित विशेष जांच टीम की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ था। 10,000 करोड़ गुरुग्राम, फरीदाबाद व पानीपत, 300 करोड़ सोनीपत, करनाल, 300 करोड़ सिरसा, फतेहाबाद व हिसार और 18 करोड़ की कर चोरी कैथल में सामने आई है। विभाग के कर्मचारियों को पूरी ट्रेनिंग नहीं थी, इसलिए फर्जी बिल्टी पर वे भी रिफंड ले गए, जिन्होंने न वैट दिया और न ही रिटर्न फाइल किया।
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अधिकारियों ने सुनवाई के दौरान विभाग की 2016-17 की वार्षिक रिपोर्ट पेश कर दी, इस पर लोकायुक्त एनके अग्रवाल ने उन्हें डांट लगाई। लोकायुक्त ने पूछा कि कार्रवाई रिपोर्ट कहां है। उन्होंने शिकायतकर्ता से पूछा कि वे विभाग की अब तक की कार्रवाई से संतुष्ट हैं या नहीं, इस पर सतबीर ने कहा कि विभाग ने 18 मार्च 2015 के लोकायुक्त की अदालत केफैसले पर अब तक अमल नहीं किया है, वे फैसले के अनुसार लगभग तीन दर्जन दोषी अधिकारियों पर आपराधिक कार्रवाई और उनसे घोटाले की राशि की रिकवरी चाहते हैं।
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इस पर लोकायुक्त ने विभाग के संयुक्त आयुक्त को निर्देश दिए कि 23 मई से पहले कड़ी कार्रवाई कर रिपोर्ट उन्हें सौंपें। यह आखिरी मौका है। अधिकारियों पर कार्रवाई न होने पर लोकायुक्त के पास मुख्य सचिव को कार्रवाई के लिए पत्र लिखने का अधिकार है। सतबीर ने कहा कि आबकारी एवं कराधान विभाग दोषियों को बचाने का प्रयास कर रहा है।
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ये है मामला
अधिकारियों ने राइस इंडस्ट्री, बिल्डर्स, सिगरेट डीलर्स जैसे बड़े करोबारियों को वैट रिफंड किए हैं। पूरा मामला 2005 से 2013 के बीच का है। तत्कालीन लोकायुक्त जस्टिस प्रीतमपाल के निर्देश पर गठित विशेष जांच टीम की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ था। 10,000 करोड़ गुरुग्राम, फरीदाबाद व पानीपत, 300 करोड़ सोनीपत, करनाल, 300 करोड़ सिरसा, फतेहाबाद व हिसार और 18 करोड़ की कर चोरी कैथल में सामने आई है। विभाग के कर्मचारियों को पूरी ट्रेनिंग नहीं थी, इसलिए फर्जी बिल्टी पर वे भी रिफंड ले गए, जिन्होंने न वैट दिया और न ही रिटर्न फाइल किया।