लोकसभा चुनाव 2024: पंजाब में नया मेयार बनाएगी बदली सियासी बयार, चारों राजनीतिक दलों का कड़ा इम्तिहान
लोकसभा चुनाव में पंजाब के चारों राजनीतिक दलों का कड़ा इम्तिहान होने वाला है। पंजाब से संसद का रास्ता तलाश रही सत्तारूढ़ आप को अपने किए वादों का हिसाब देना होगा। वहीं, बिखरी कांग्रेस के सामने गढ़ बचाने की चुनौती बनी रहेगी। शिअद-भाजपा गठबंधन के रास्ते में किसान खड़े हैं।
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पंजाब की बदली सियासी बयार इस बार नया मेयार (मानक) स्थापित करेगी। सूबे में लहलहाते खेतों के बीच बहते सियासी दरिया में वोट तलाश रहे राजनीतिक दलों का इस बार लोकसभा चुनाव में कड़ा इम्तिहान होगा। ये चुनाव कई मायनों में अलग होगा। साल 2014 में पंजाब के रास्ते पहली बार संसद पहुंची आम आदमी पार्टी के लिए यह पहला मौका होगा, जब वह राज्य की सत्ता में रहते हुए लोकसभा चुनाव में उतरेगी।
सत्तारूढ़ आप सियासी फसल काटने को बेताब है, लेकिन उसे दो साल के काम व चुनावी वादों का हिसाब देना होगा। पिछले चुनाव में 13 में से आठ सीटें झोली में डालने वाली कांग्रेस के सामने बिखराव के बीच गढ़ बचाने की बड़ी चुनौती है।
लगभग चार साल पहले कृषि कानूनों के विरोध में एनडीए से नाता तोड़ने वाला शिरोमणि अकाली दल पंजाब में भाजपा से गठबंधन के लिए फिर कदमताल कर रहा है, लेकिन उसके रास्ते में एमएसपी पर कानूनी गारंटी मांग रहे किसान खड़े हैं। शिअद के लिए स्थितियां पहले जैसी नहीं हैं। भाजपा पीएम मोदी के नाम पर उपजाऊ सूबे में कमल खिलाने के प्रयास में है, पर हवा के विपरीत सियासी रुख दिखाते रहे पंजाब में उसकी राह आसान नहीं है।
पिछले लोकसभा चुनाव की तुलना में इस बार स्थितियां अलग
चुनावी रणभेरी बज गई है। पंजाब में न एनडीए और न ही इंडिया ब्लॉक। भाजपा को सत्ता से बेदखल करने के लिए चंडीगढ़ व हरियाणा समेत विभिन्न राज्यों में एक-दूसरे से गलबहियां डाल रहीं कांग्रेस और आम आदमी पार्टी पंजाब में मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में एक-दूसरे के सामने हैं। साल 2014 में मोदी लहर के बीच पंजाब से चार सीटें जीतने वाली आप को 2019 में एक सीट ही मिली थी, पर 2022 के विधानसभा चुनाव में उसने 42.01 फीसदी वोटों के साथ 92 सीटें झोली में डालकर एकतरफा जीत हासिल की थी।
ऐसे में पिछले लोकसभा चुनाव की तुलना में इस बार स्थितियां अलग हैं। सूबे में सत्तारूढ़ आप पंजाब से संसद के लिए लंबी लकीर खींचने के प्रयास में है। यही कारण है कि 'संसद में भी भगवंत मान' नारे के साथ पंजाब में चुनाव अभियान लाॅन्च करने वाली आप ने पांच मंत्रियों को ही लोकसभा के दंगल में उतार दिया है।
दो साल में कांग्रेस के बीस से ज्यादा बड़े नेता पार्टी छोड़ चुके
पिछले चुनाव में देशभर में भाजपा के शानदार प्रदर्शन के बीच पंजाब में कांग्रेस ने 8 सीटें जीतीं थीं, लेकिन 2022 में पंजाब की सत्ता से बेदखल होते ही कांग्रेस के कई नेताओं ने पार्टी से किनारा कर लिया। पिछले दो साल में कांग्रेस के बीस से ज्यादा बड़े नेता पार्टी छोड़ चुके हैं। इस चुनाव में भाजपा व आप जैसे दल कांग्रेस के इन्हीं अस्त्रों से उस पर वार करने को तैयार हैं। पंजाब में कांग्रेस का चेहरा रहे कैप्टन अमरिंदर सिंह व सुनील जाखड़ अब भाजपा की कमान संभाल रहे हैं।
आप ने कांग्रेस से आए रिंकू को जालंधर व जीपी को फतेहगढ़ से टिकट थमा दिया है। होशियारपुर में भी कांग्रेस विधायक दल के उपनेता डाॅ. राजकुमार चब्बेवाल को पार्टी शामिल करवाकर होशियारपुर से उतारने की तैयारी है। अमृतसर छोड़ कर पटियाला में जमे सिद्धू भी चुनाव लड़ने से इन्कार कर रहे हैं।
ऐसे में जालंधर उपचुनाव में एक सीट गवां चुकी कांग्रेस के सामने बाकी सात सीटों को भी बचाने की बड़ी चुनौती है। पंजाब की सियासत के बाबा बोहड़ कहे जाने वाले सरदार प्रकाश सिंह बादल के बिना शिअद पहली बार चुनाव में उतरेगा। सुखदेव ढींडसा और बीबी जगीर कौर जैसे नेताओं को सुखबीर मनाने में सफल हुए हैं, लेकिन भाजपा से अलग होने के बाद लगातार चुनाव हार रहे शिअद से बसपा ने भी किनारा कर लिया है।
शिअद का कोई नेता सामने नहीं आ रहा
वर्ष 2020 में 24 साल पुराना गठबंधन टूटने के बाद हुए पंजाब के विधानसभा चुनाव में शिअद व भाजपा को दो-दो सीटें मिली थीं। संगरूर व जालंधर लोकसभा उपचुनाव में भी दोनों पार्टियां कुछ खास नहीं कर पाईं। यही कारण है कि लोकसभा चुनाव की घोषणा के बाद भी शिअद-भाजपा में गठबंधन की अंदर खाते कोशिश हो रही है। इसी संभावना के मद्देनजर गठबंधन में रहते जो सीटें भाजपा खाते में थीं, वहां शिअद का कोई नेता सामने नहीं आ रहा है और शिअद की सीटों पर भाजपा सक्रिय नहीं दिख रही है।
इन मुद्दों पर परीक्षा
- नशा तस्करी
- कानून-व्यवस्था
- किसान आंदोलन (एमएसपी, कर्ज माफी)
- भ्रष्टाचार
- बेअदबी
- बंदी सिंहों की रिहाई
डेमोग्राफी
- सिख 57.69%
- हिंदू 38.49%
- मुस्लिम 1.93%
- क्रिश्चियन 1.26%
- अनुसूचित जाति (एससी) 31.9%
- अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) 31.3%
- अन्य (जरनल) 33%
मौजूदा स्थिति
- कुल सीटें 13
- कांग्रेस 07
- भाजपा 02
- शिअद 02
- आम आदमी पार्टी 01
- अकाली दल (अमृतसर) 01
क्षेत्रवार सीटें
- माझा 03 (कांग्रेस-2, भाजपा-1)
- दोआबा 03 ( भाजपा-1, कांग्रेस-1, आप-2)
- मालवा 07 ( कांग्रेस-4, शिअद-2, अकाली दल-अमृतसर-1)