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लोकसभा चुनाव 2019: पंजाब में एससी वोट बैंक बिगाड़ सकता है कांग्रेस के समीकरण, जानिए कैसे
Mon, 15 Apr 2019 11:23 AM IST
खुशबू गोयल
अखिल तलवार, अमर उजाला, चंडीगढ़
अखिल तलवार, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 15 Apr 2019 11:23 AM IST
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कांग्रेस के दिग्गज नेता
- फोटो : फाइल फोटो
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लोकसभा चुनाव से पहले एससी वोट बैंक कांग्रेस के लिए बड़ी समस्या बन गया है। टिकट वितरण में जातीय संतुलन न बिठाने के कारण वाल्मीकि, मजहबी सिख समाज नाराज है। वहीं, रविदास बिरादरी के पुराने दिग्गज नेता भी टिकट न दिए जाने से खफा हैं और पार्टी को आंखें दिखा रहे हैं। पंजाब में एससी वोट बैंक का सबसे ज्यादा प्रभाव दोआबा में है।
2011 की जनगणना के मुताबिक, दोआबा की कुल आबादी 52.08 लाख में से करीब 37 फीसदी 19.48 लाख अनुसूचित जाति हैं। इनमें से रविदास बिरादरी के 11.88 और वाल्मीकि-मजहबी सिख समाज व अन्य एससी वर्गों के हैं। 2002 में दोआबा के एससी वोट बैंक ने कांग्रेस का साथ दिया तो पार्टी ने सरकार बनाई। लेकिन 2007 और 2012 में यह वोट बैंक कांग्रेस से टूट गया, तो पार्टी भी सत्ता से दूर हो गई। इन दोनों चुनाव में दोआबा में पार्टी का प्रदर्शन बेहद खराब रहा।
2017 में फिर दोआबा के दलित वोट बैंक ने कांग्रेस पर भरोसा जताया तो वह सत्ता में आ गई। लेकिन अब लोकसभा चुनाव के टिकट वितरण में पार्टी जातीय संतुलन बिठाने में नाकाम रही। राष्ट्रीय संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने पहले आगाह भी किया था। फिर भी चार सुरक्षित सीटों में से एक पर भी वाल्मीकि-मजहबी सिख समाज को टिकट नहीं दिया गया।
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जालंधर, सेंट्रल, शाहकोट, करतारपुर, नवांशहर, फरीदकोट, अमृतसर में यह समाज काफी प्रभावशाली है। फरीदकोट से टिकट मांग रहीं फिरोजपुर की विधायक सत्कार कौर ने यहां से एक मुस्लिम मोहम्मद सदीक को टिकट देना हैरानीजनक फैसला बताया। उन्होंने कहा कि यहां सबसे ज्यादा वोट मजहबी सिखों के हैं, फिर भी टिकट नहीं दिया गया।
उधर, रविदास बिरादरी की पुरानी लीडरशिप भी टिकट न दिए जाने से नाराज है। मोहिंदर सिंह केपी, संतोष चौधरी, शमशेर सिंह दूलो ने मोर्चा खोल रखा है। जालंधर की महिला कांग्रेस की पूर्व प्रधान और मौजूदा एआईसीसी कोआर्डिनेटर किट्टू गरेवाल ने चेतावनी दी है कि अगर बीस तक टिकट न बदले गए तो वह पार्टी से इस्तीफा देकर आंदोलन शुरू करेंगी।
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2011 की जनगणना के मुताबिक, दोआबा की कुल आबादी 52.08 लाख में से करीब 37 फीसदी 19.48 लाख अनुसूचित जाति हैं। इनमें से रविदास बिरादरी के 11.88 और वाल्मीकि-मजहबी सिख समाज व अन्य एससी वर्गों के हैं। 2002 में दोआबा के एससी वोट बैंक ने कांग्रेस का साथ दिया तो पार्टी ने सरकार बनाई। लेकिन 2007 और 2012 में यह वोट बैंक कांग्रेस से टूट गया, तो पार्टी भी सत्ता से दूर हो गई। इन दोनों चुनाव में दोआबा में पार्टी का प्रदर्शन बेहद खराब रहा।
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2017 में फिर दोआबा के दलित वोट बैंक ने कांग्रेस पर भरोसा जताया तो वह सत्ता में आ गई। लेकिन अब लोकसभा चुनाव के टिकट वितरण में पार्टी जातीय संतुलन बिठाने में नाकाम रही। राष्ट्रीय संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने पहले आगाह भी किया था। फिर भी चार सुरक्षित सीटों में से एक पर भी वाल्मीकि-मजहबी सिख समाज को टिकट नहीं दिया गया।
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जालंधर, सेंट्रल, शाहकोट, करतारपुर, नवांशहर, फरीदकोट, अमृतसर में यह समाज काफी प्रभावशाली है। फरीदकोट से टिकट मांग रहीं फिरोजपुर की विधायक सत्कार कौर ने यहां से एक मुस्लिम मोहम्मद सदीक को टिकट देना हैरानीजनक फैसला बताया। उन्होंने कहा कि यहां सबसे ज्यादा वोट मजहबी सिखों के हैं, फिर भी टिकट नहीं दिया गया।
उधर, रविदास बिरादरी की पुरानी लीडरशिप भी टिकट न दिए जाने से नाराज है। मोहिंदर सिंह केपी, संतोष चौधरी, शमशेर सिंह दूलो ने मोर्चा खोल रखा है। जालंधर की महिला कांग्रेस की पूर्व प्रधान और मौजूदा एआईसीसी कोआर्डिनेटर किट्टू गरेवाल ने चेतावनी दी है कि अगर बीस तक टिकट न बदले गए तो वह पार्टी से इस्तीफा देकर आंदोलन शुरू करेंगी।
शिअद-भाजपा ने बिठाया संतुलन
एक तरफ कांग्रेस शुरुआती योजना के बाद भी टिकट वितरण में जातीय संतुलन बिठाने में नाकाम रही। दूसरी तरफ शिअद-भाजपा ने पूरा संतुलन बिठाया है। शिअद ने दो मजहबी सिखों, जालंधर से चरनजीत अटवाल और फरीदकोट से गुलजार सिंह रणिके को टिकट दिया। वहीं, रविदास बिरादरी के डीएस गुरु को फतेहगढ़ साहिब से उतारा है। चौथी होशियारपुर सीट भाजपा के कोटे में हैं। जहां से विजय सांपला और सोम प्रकाश दावेदार हैं, दोनों ही रविदास बिरादरी से हैं।
फतेहगढ़ साहिब से उम्मीदवार बदलने की मांग
पीजीआई स्थित रविदास भवन में कई संगठनों ने मीटिंग कर फतेहगढ़ साहिब से डॉ. अमर सिंह का टिकट काटने की मांग की। उनका कहना था कि यहां से अश्वनी बगानिया को टिकट देकर वाल्मीकि-मजहबी सिख समाज को प्रतिनिधित्व दिया जाए। बैठक में आदि धर्म अनार्य समाज, सेंट्रल वाल्मीकि सभा इंटरनेशनल, मजहबी पंजाब महासभा, गुरु रंगरेटा दल, लव कुछ सेवादल समेत दस संगठनों के लोग मौजूद थे।
वेरका की नियुक्ति का नहीं हुआ फायदा
वाल्मीकि, मजहबी सिख समाज मंत्रिमंडल विस्तार से ही नाराज चल रहा था। हाईकमान ने संतलन बनाने को कुछ समय पहले इस वर्ग के डॉ. राजकुमार वेरका को चेयरमैन बनाया था। लेकिन उसका कोई फायदा नहीं हुआ। क्योंकि अब तक सिर्फ मोहिंदर सिंह केपी से मिले हैं। बाकी नाराज नेताओं से उन्होंने कोई बात नहीं की है।
फतेहगढ़ साहिब से उम्मीदवार बदलने की मांग
पीजीआई स्थित रविदास भवन में कई संगठनों ने मीटिंग कर फतेहगढ़ साहिब से डॉ. अमर सिंह का टिकट काटने की मांग की। उनका कहना था कि यहां से अश्वनी बगानिया को टिकट देकर वाल्मीकि-मजहबी सिख समाज को प्रतिनिधित्व दिया जाए। बैठक में आदि धर्म अनार्य समाज, सेंट्रल वाल्मीकि सभा इंटरनेशनल, मजहबी पंजाब महासभा, गुरु रंगरेटा दल, लव कुछ सेवादल समेत दस संगठनों के लोग मौजूद थे।
वेरका की नियुक्ति का नहीं हुआ फायदा
वाल्मीकि, मजहबी सिख समाज मंत्रिमंडल विस्तार से ही नाराज चल रहा था। हाईकमान ने संतलन बनाने को कुछ समय पहले इस वर्ग के डॉ. राजकुमार वेरका को चेयरमैन बनाया था। लेकिन उसका कोई फायदा नहीं हुआ। क्योंकि अब तक सिर्फ मोहिंदर सिंह केपी से मिले हैं। बाकी नाराज नेताओं से उन्होंने कोई बात नहीं की है।