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लोकसभा चुनाव 2019: पटियाला में कांग्रेस के लिए आसान नहीं होगी जीत, स्थानीय मुद्दे गले की फांस
Tue, 14 May 2019 11:27 AM IST
खुशबू गोयल
रिंपी गुप्ता, अमर उजाला, पटियाला(पंजाब)
रिंपी गुप्ता, अमर उजाला, पटियाला(पंजाब)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 14 May 2019 11:27 AM IST
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परनीत कौर
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लोकसभा चुनाव 2019 में अपने ही गढ़ में कांग्रेस के लिए जीत की डगर आसान नजर नहीं आ रही है। क्योंकि स्थानीय मुद्दे गले की फांस बने हुए हैं। वहीं अपनी मांगों को लेकर मुलाजिमों व अध्यापक वर्ग में कैप्टन सरकार खिलाफ काफी रोष है। साथ ही कांग्रेस की प्रत्याशी व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह की पत्नी परनीत कौर को मौजूदा सांसद व नवां पंजाब पार्टी के उम्मीदवार डॉ. धर्मवीर गांधी और अकाली-भाजपा के सांझे उम्मीदवार सुरजीत सिंह रखड़ा भी कड़ी टक्कर दे रहे हैं।
सूबे की हाट मानी जा रही पटियाला सीट पर स्थानीय मुद्दे काफी हावी हैं। चाहे वह पीने के पानी की समस्या हो, या फिर सीवरेज जाम, स्ट्रीट लाइटों की कमी और सड़कों की खस्ता हालत हो। इन सभी बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण पटियाला के लोग सरकार से काफी खफा है। विधानसभा चुनाव के वक्त कैप्टन सरकार ने सीवरेज जाम की समस्या के हल को दावे तो बहुत किए, लेकिन इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए। पीने के पानी की समस्या भी जस की तस है।
मुलाजिम वर्ग व टीचर भी आए दिन सड़कों पर उतर कर सरकार खिलाफ धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। मुलाजिमों व अध्यापकों ने तो सरकार को चेतावनी दे डाली है कि उनकी मांगें न मानने का खामियाजा लोकसभा चुनावों में भुगतना पड़ेगा। वहीं नवां पंजाब पार्टी के डॉ. धर्मवीर गांधी और अकाली-भाजपा के सांझे उम्मीदवार सुरजीत सिंह रखड़ा की ओर से परनीत कौर को कड़ी टक्कर दी जा रही है। खास तौर से डॉ. गांधी लगातार शाही परिवार पर हमले बोल रहे हैं। वह वोटरों को बता रहे हैं कि मोती महल के दरवाजे तो केवल चुनावों के वक्त खुलते हैं, जबकि उनके घर व दफ्तर के दरवाजे उनके हमेशा खुले हैं। नाराज कांग्रेसियों को भी अपने साथ जोड़ने का काम वह कर रहे हैं।
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सूबे की हाट मानी जा रही पटियाला सीट पर स्थानीय मुद्दे काफी हावी हैं। चाहे वह पीने के पानी की समस्या हो, या फिर सीवरेज जाम, स्ट्रीट लाइटों की कमी और सड़कों की खस्ता हालत हो। इन सभी बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण पटियाला के लोग सरकार से काफी खफा है। विधानसभा चुनाव के वक्त कैप्टन सरकार ने सीवरेज जाम की समस्या के हल को दावे तो बहुत किए, लेकिन इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए। पीने के पानी की समस्या भी जस की तस है।
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मुलाजिम वर्ग व टीचर भी आए दिन सड़कों पर उतर कर सरकार खिलाफ धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। मुलाजिमों व अध्यापकों ने तो सरकार को चेतावनी दे डाली है कि उनकी मांगें न मानने का खामियाजा लोकसभा चुनावों में भुगतना पड़ेगा। वहीं नवां पंजाब पार्टी के डॉ. धर्मवीर गांधी और अकाली-भाजपा के सांझे उम्मीदवार सुरजीत सिंह रखड़ा की ओर से परनीत कौर को कड़ी टक्कर दी जा रही है। खास तौर से डॉ. गांधी लगातार शाही परिवार पर हमले बोल रहे हैं। वह वोटरों को बता रहे हैं कि मोती महल के दरवाजे तो केवल चुनावों के वक्त खुलते हैं, जबकि उनके घर व दफ्तर के दरवाजे उनके हमेशा खुले हैं। नाराज कांग्रेसियों को भी अपने साथ जोड़ने का काम वह कर रहे हैं।
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अपनों की नाराजगी भी सिरदर्द बनी
कांग्रेस के लिए इस बार के लोकसभा चुनावों में अपनों की नाराजगी भी सिरदर्द बनी है। पार्टी में मान-सम्मान न मिलने और नजरअंदाज किए जाने से टकसाली कांग्रेसी काफी खफा हैं। नाभा में चार हजार से ज्यादा टकसाली कांग्रेसी परिवारों ने नवां पंजाब पार्टी का दामन थाम लिया है। उधर अमलोह से कांग्रेसी विधायक काका रणदीप सिंह भी पटियाला सीट से टिकट न मिलने कारण काफी खफा है। काका रणदीप सिंह नाभा के राजसी परिवार से हैं और नाभा विधानसभा हलके से विधायक भी रह चुके हैं। उन्होंने परनीत के हक में नाभा से प्रचार करने से साफ इनकार कर दिया है।
पटियाला सीट रही है कांग्रेस का गढ़
पटियाला लोकसभा सीट पर अब तक 16 बार चुनाव हुए हैं, जिसमें से दस बार यहां से कांग्रेस ने जीत हासिल की है। खास बात यह है कि परनीत ने यहां से लगातार तीन बार लोकसभा चुनाव 1999, 2004 और 2009 में जीते हैं। कैप्टन का होम जिला होने और कांग्रेस के इस सीट से दस बार जीतने के कारण इस सीट को कांग्रेस का गढ़ माना जाता है।
पटियाला सीट रही है कांग्रेस का गढ़
पटियाला लोकसभा सीट पर अब तक 16 बार चुनाव हुए हैं, जिसमें से दस बार यहां से कांग्रेस ने जीत हासिल की है। खास बात यह है कि परनीत ने यहां से लगातार तीन बार लोकसभा चुनाव 1999, 2004 और 2009 में जीते हैं। कैप्टन का होम जिला होने और कांग्रेस के इस सीट से दस बार जीतने के कारण इस सीट को कांग्रेस का गढ़ माना जाता है।
परनीत कौर (कांग्रेस)
मजबूती---- परनीत कौर पटियाला के शाही परिवार से संबंध रखती हैं। साथ ही वह हलके के लोगों के हर दुख-सुख में शामिल होती हैं। परनीत की हलके की जनता में काफी पैठ है। इसी वजह से वह पटियाला लोकसभा सीट से साल 1999, 2004 और 2009 में लगातार तीन बार जीत हासिल कर चुकी हैं।
कमजोरी----तीन बार सांसद रहने के बावजूद परनीत कौर कोई बड़ा प्रोजेक्ट पटियाला के लिए नहीं ला सकीं जबकि साल 2004 व 2009 में जब वह सांसद थीं तो केंद्र में उनकी पार्टी की ही सरकार थी। साथ ही उन्होंने कभी अपने हलके के लोगों की समस्याओं व उनकी मांगों को संसद में नहीं उठाया। खासतौर से वह पटियाला से रेल सेवाओं में कोई विस्तार नहीं कर सकीं।
सुरजीत सिंह रखड़ा (अकाली दल)
मजबूती---सुरजीत सिंह रखड़ा बादल सरकार के राज में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। लोग आसानी से अपने किसी काम व शिकायत के निपटारे के लिए रखड़ा को मिल पाते हैं। इसके अलावा रखड़ा के खिलाफ अकाली दल में कोई गुटबाजी भी अब तक सामने नहीं आई है।
कमजोरी----वरिष्ठ अकाली दल प्रेम सिंह चंदूमाजरा की पटियाला लोकसभा हलके के डकाला व सन्नौर विधानसभा हलकों में काफी पैठ है। श्री आनंदपुर साहिब से चुनाव लड़ने के कारण वह खुद वहां बिजी ही हैं। उनका बेटा हरिंदरपाल सिंह वह भी पिता के चुनाव प्रचार में लगा है। इसका नुकसान रखड़ा हो सकता है।
मजबूती---- परनीत कौर पटियाला के शाही परिवार से संबंध रखती हैं। साथ ही वह हलके के लोगों के हर दुख-सुख में शामिल होती हैं। परनीत की हलके की जनता में काफी पैठ है। इसी वजह से वह पटियाला लोकसभा सीट से साल 1999, 2004 और 2009 में लगातार तीन बार जीत हासिल कर चुकी हैं।
कमजोरी----तीन बार सांसद रहने के बावजूद परनीत कौर कोई बड़ा प्रोजेक्ट पटियाला के लिए नहीं ला सकीं जबकि साल 2004 व 2009 में जब वह सांसद थीं तो केंद्र में उनकी पार्टी की ही सरकार थी। साथ ही उन्होंने कभी अपने हलके के लोगों की समस्याओं व उनकी मांगों को संसद में नहीं उठाया। खासतौर से वह पटियाला से रेल सेवाओं में कोई विस्तार नहीं कर सकीं।
सुरजीत सिंह रखड़ा (अकाली दल)
मजबूती---सुरजीत सिंह रखड़ा बादल सरकार के राज में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। लोग आसानी से अपने किसी काम व शिकायत के निपटारे के लिए रखड़ा को मिल पाते हैं। इसके अलावा रखड़ा के खिलाफ अकाली दल में कोई गुटबाजी भी अब तक सामने नहीं आई है।
कमजोरी----वरिष्ठ अकाली दल प्रेम सिंह चंदूमाजरा की पटियाला लोकसभा हलके के डकाला व सन्नौर विधानसभा हलकों में काफी पैठ है। श्री आनंदपुर साहिब से चुनाव लड़ने के कारण वह खुद वहां बिजी ही हैं। उनका बेटा हरिंदरपाल सिंह वह भी पिता के चुनाव प्रचार में लगा है। इसका नुकसान रखड़ा हो सकता है।
डॉ. धर्मवीर गांधी (नवां पंजाब पार्टी)
मजबूती------- डॉ. धर्मवीर गांधी पर लोगों को विश्वास है। जब से उनकी नई पार्टी अस्तित्व में आई है तब से ही पटियाला सीट से दोबारा चुनाव लड़ने की इच्छा के तहत लोगों से लगातार संपर्क साधे हैं। पांच सालों में डॉ. गांधी ने हलके के लिए काफी काम किया है।
कमजोरी--- आम आदमी पार्टी का आधार छिनने से उनके पास बड़े वालंटियर नहीं हैं। इससे डॉ. गांधी का चुनाव प्रचार प्रभावित हो रहा है। आशंका है कि वालंटियरों की कमी के चलते हो सकता है कि 19 मई को वोटिंग वाले दिन डॉ. गांधी की तरफ से पूरे बूथ भी न लगाए जा सकें।
नीना मित्तल (आम आदमी पार्टी)
मजबूती--- आम लोगों की नीना मित्तल तक पहुंच आसान है। साथ ही उनको आम आदमी पार्टी का आधार मिला है। वालंटियर दिन-रात नीना मित्तल के प्रचार में जुटे हैं। गृहिणी होने के कारण महिलाएं उन्हें काफी पसंद कर रही हैं।
कमजोरी--- आम आदमी पार्टी से दोफाड़ होकर बने खैरा ग्रुप से नीना मित्तल को नुकसान हो सकता है। बड़ी गिनती वालंटियर खैरा के साथ चले गए हैं। इससे चुनाव प्रचार प्रभावित होने की आशंका है।
मजबूती------- डॉ. धर्मवीर गांधी पर लोगों को विश्वास है। जब से उनकी नई पार्टी अस्तित्व में आई है तब से ही पटियाला सीट से दोबारा चुनाव लड़ने की इच्छा के तहत लोगों से लगातार संपर्क साधे हैं। पांच सालों में डॉ. गांधी ने हलके के लिए काफी काम किया है।
कमजोरी--- आम आदमी पार्टी का आधार छिनने से उनके पास बड़े वालंटियर नहीं हैं। इससे डॉ. गांधी का चुनाव प्रचार प्रभावित हो रहा है। आशंका है कि वालंटियरों की कमी के चलते हो सकता है कि 19 मई को वोटिंग वाले दिन डॉ. गांधी की तरफ से पूरे बूथ भी न लगाए जा सकें।
नीना मित्तल (आम आदमी पार्टी)
मजबूती--- आम लोगों की नीना मित्तल तक पहुंच आसान है। साथ ही उनको आम आदमी पार्टी का आधार मिला है। वालंटियर दिन-रात नीना मित्तल के प्रचार में जुटे हैं। गृहिणी होने के कारण महिलाएं उन्हें काफी पसंद कर रही हैं।
कमजोरी--- आम आदमी पार्टी से दोफाड़ होकर बने खैरा ग्रुप से नीना मित्तल को नुकसान हो सकता है। बड़ी गिनती वालंटियर खैरा के साथ चले गए हैं। इससे चुनाव प्रचार प्रभावित होने की आशंका है।
पटियाला लोकसभा में वोटों का गणित
कुल मतदाता----17,34,245
महिला वोटर----8,24,764
पुरुष वोटर--9,9,407
2014 के चुनाव का गणित
कुल मतदाता--15,80,273
मतदान हुआ--11,20,933
प्रतिशत---70.93
इस बार के चुनाव में भारी रहने वाले मुद्दे
स्थानीय मुद्दे जैसे सीवरेज जाम, पीने के पानी की कमी, सड़कों की खस्ताहालत, स्ट्रीट लाइटों की उचित व्यवस्था न होने, सड़कों पर घूमने वाले आवारा पशुओं की समस्या और खास तौर से नशे की समस्या भी अहम मुद्दा रहेगा।
चुनौतियां
रखड़ा के सामने जहां एक तरफ कांग्रेस के गढ़ में परनीत कौर जैसी मजबूत उम्मीदवार का मुकाबला करना चुनौती रहेगा। वहीं भाजपा के नेताओं को साथ लेकर चलना भी उनके लिए मुश्किल हो रहा है। मतभेदों के चलते अब तक भाजपा के अधिकतर स्थानीय नेताओं ने रखड़ा के चुनाव प्रचार से दूरी बना रखी है। उस पर बादल सरकार के राज में बेअदबी की घटनाओं ने भी रखड़ा की पटियाला में साख को काफी नुकसान पहुंचाया है।
डॉ. धर्मवीर गांधी का इस बार चुनाव निशान बदल गया है। अब उनका चुनाव निशान माइक है। इस बारे में खास तौर से देहाती इलाकों के लोगों को पता नहीं लग पा रहा है। वालंटियरों की कमी के चलते नवां पंजाब पार्टी इस बारे में अच्छी तरह से प्रचार भी नहीं कर पा रही है।
नीना मित्तल को साल 2014 की अपेक्षा इस बार नुकसान पहुंच सकता है। पार्टी की लहर में इस बार वो बात नहीं है। पार्टी की स्थानीय इकाई में अंदरूनी गुटबाजी भी नीना मित्तल के चुनाव प्रचार को नुकसान पहुंचा सकती है। टिकट न मिलने से कुछ नेता अंदर खाते नाराज हैं जो नुकसान पहुंचा सकते हैं।
महिला वोटर----8,24,764
पुरुष वोटर--9,9,407
2014 के चुनाव का गणित
कुल मतदाता--15,80,273
मतदान हुआ--11,20,933
प्रतिशत---70.93
इस बार के चुनाव में भारी रहने वाले मुद्दे
स्थानीय मुद्दे जैसे सीवरेज जाम, पीने के पानी की कमी, सड़कों की खस्ताहालत, स्ट्रीट लाइटों की उचित व्यवस्था न होने, सड़कों पर घूमने वाले आवारा पशुओं की समस्या और खास तौर से नशे की समस्या भी अहम मुद्दा रहेगा।
चुनौतियां
रखड़ा के सामने जहां एक तरफ कांग्रेस के गढ़ में परनीत कौर जैसी मजबूत उम्मीदवार का मुकाबला करना चुनौती रहेगा। वहीं भाजपा के नेताओं को साथ लेकर चलना भी उनके लिए मुश्किल हो रहा है। मतभेदों के चलते अब तक भाजपा के अधिकतर स्थानीय नेताओं ने रखड़ा के चुनाव प्रचार से दूरी बना रखी है। उस पर बादल सरकार के राज में बेअदबी की घटनाओं ने भी रखड़ा की पटियाला में साख को काफी नुकसान पहुंचाया है।
डॉ. धर्मवीर गांधी का इस बार चुनाव निशान बदल गया है। अब उनका चुनाव निशान माइक है। इस बारे में खास तौर से देहाती इलाकों के लोगों को पता नहीं लग पा रहा है। वालंटियरों की कमी के चलते नवां पंजाब पार्टी इस बारे में अच्छी तरह से प्रचार भी नहीं कर पा रही है।
नीना मित्तल को साल 2014 की अपेक्षा इस बार नुकसान पहुंच सकता है। पार्टी की लहर में इस बार वो बात नहीं है। पार्टी की स्थानीय इकाई में अंदरूनी गुटबाजी भी नीना मित्तल के चुनाव प्रचार को नुकसान पहुंचा सकती है। टिकट न मिलने से कुछ नेता अंदर खाते नाराज हैं जो नुकसान पहुंचा सकते हैं।