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लोकसभा चुनाव 2019: हरियाणा में अपने ही घर में घिरे कांग्रेस के कई दिग्गज, दांव पर लगी प्रतिष्ठा

Sat, 20 Apr 2019 12:56 PM IST
खुशबू गोयल यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Sat, 20 Apr 2019 12:56 PM IST
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Lok Sabha Elections 2019, Haryana Election Results may Effect Congress Leaders Prestige
दीपेंद्र हुड्डा - फोटो : फाइल फोटो
हरियाणा के चुनावी दंगल में ताल ठोक रहे कांग्रेस दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है। मुकाबला कड़ा होने के कारण नेता अपने ही संसदीय क्षेत्रों में फंसकर रह गए हैं। दूसरे लोकसभा क्षेत्रों में प्रचार को समय निकालना उनके लिए मुश्किल हो गया है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर, सांसद दीपेंद्र हुड्डा व राज्यसभा सांसद कुमारी सैलजा अपनी-अपनी सीट पर ही पूरी ताकत झोंके हुए हैं। सीएलपी किरण चौधरी ने बेटी श्रुति चौधरी के प्रचार की कमान संभाली हुई है। यही कारण है कि ये घर से बाहर नहीं गरज पा रहे।
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कांग्रेस हाईकमान इस सूरत में इनका लाभ पूरे प्रदेश में शायद ही उठा पाए। अशोक तंवर सिरसा लोकसभा से मैदान में हैं। यहां से वह 2009 में सांसद रह चुके हैं, लेकिन 2014 में इनेलो के चरणजीत सिंह रोड़ी उनके संसद पहुंचने की राह में रोड़ा बन गए थे। तंवर को हार का सामना करना पड़ा और उसके बाद उन्हें राहुल गांधी ने हरियाणा प्रदेशाध्यक्ष की कुर्सी सौंपी। तंवर को इस कुर्सी पर बने हुए पांच साल बीत चुके हैं, उनके कार्यकाल में कांग्रेस हरियाणा में न तो नगर निगम चुनाव जीत पाई, न ही जींद उपचुनाव।
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हालांकि, नगर निगम चुनाव कांग्रेस ने सिंबल पर नहीं लड़े थे। अब तंवर की लोकसभा चुनाव में फिर अग्निपरीक्षा है, चूंकि इस बार वह खुद ही चुनावी चक्रव्यूह में फंसे हुए हैं। भाजपा की सुनीता दुग्गल, इनेलो के सांसद चरणजीत सिंह रोड़ी व जजपा प्रत्याशी निर्मल सिंह से उनका मुकाबला है। कड़ी टक्कर के कारण फिलहाल तंवर बतौर प्रदेशाध्यक्ष सभी दस सीटों पर प्रचार करने में असमर्थ नजर आ रहे हैं। तंवर का कद प्रदेश की राजनीति में ये चुनाव काफी हद तक तय करेगा।
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अपने दुर्ग को अभेद्य बनाने में डटे दीपेंद्र

मोदी लहर में भी अपना किला बचाने वाले कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा यूथ ऑइकन हैं। प्रदेश के युवाओं में उनकी अच्छी पैठ है। इस बार दीपेंद्र भी घर में ही घिरे हुए हैं। भाजपा ने उनके मुकाबले गैर जाट चेहरे डॉ. अरविंद शर्मा को रोहतक से उतारा है। जजपा ने भी दीपेंद्र की घेराबंदी की है। उन्होंने युवा प्रदीप देसवाल को मैदान में उतारा है।

इनेलो ने रोहतक में धर्मबीर फौजी पर दांव खेला है। दीपेंद्र के सामने अरविंद शर्मा की चुनौती तो है ही, उन्हें देसवाल और फौजी से होने वाले नुकसान को भी रोकना है। हुड्डा किसी सूरत में नहीं चाहेंगे कि देसवाल और फौजी जाट मतदाताओं में सेंधमारी करें। यही कारण है कि दीपेंद्र अपनी ही सीट बचाने में डटे हैं, अन्य संसदीय क्षेत्रों में कांग्रेस उनका पूरा लाभ नहीं उठा पाएगी।

रोहतक वैसे तो लंबे समय से पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का अभेद्य किला है, लेकिन अबकी बार भाजपा यह सीट कांग्रेस से छीनना चाह रही है। इसके लिए पीएम नरेंद्र मोदी की रैली भी इस संसदीय क्षेत्र में कराने की तैयारी है।

सैलजा चाह रहीं दमदार वापसी

राज्यसभा सांसद कुमारी सैलजा अंबाला लोकसभा की राजनीति में दोबारा से अपनी दमदार वापसी चाह रही हैं। 2014 का चुनाव उन्होंने नहीं लड़ा था। यहां से वह पहले भी सांसद रह चुकी हैं। उनका मुकाबला भाजपा सांसद रतनलाल कटारिया से है। कटारिया को जिताने का जिम्मा पूरी तरह से सीएम मनोहर लाल पर है।

संसदीय क्षेत्र में अधिकांश विधायक भाजपा के हैं, ऐसे में सैलजा के सामने कड़ी चुनौती है। सैलजा सिरसा से भी सांसद रह चुकी हैं, वहां भी उनका खासा जनाधार है। इसके अलावा वह पूरे प्रदेश के अजा समाज में अच्छी पैठ रखती हैं, लेकिन सैलजा ने पूरा ध्यान अपनी सीट पर केंद्रित किया हुआ है। सीधी टक्कर के चलते वह यहां से बाहर कम ही समय दे पाएंगी।

श्रुति के लिए तारणहार की भूमिका में किरण
सीएलपी लीडर किरण चौधरी की बेटी श्रुति चौधरी भिवानी-महेंद्रगढ़ में एक बार फिर भाजपा सांसद धर्मबीर से टकरा रही हैं। धर्मबीर ने 2014 में उन्हें बड़े अंतर से हराया था। इस बार बेटी की चुनावी नैया पार कराने के लिए किरण खुद माझी बनी हुई हैं। मुकाबला कड़ा है, इसलिए किरण पूरे प्रदेश के बजाए बेटी के संसदीय क्षेत्र में ही डटी हैं।

उनके सामने पूर्व सीएम बंसी लाल के परिवार की चौधर का कायम रखने की भी चुनौती है। भाजपा उन्हें घर में घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रही। हालांकि, सांसद धर्मबीर की राह में भी इस बार अड़चनें कम नहीं हैं। 
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