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फिरोजपुर से ग्राउंड रिपोर्टः दांव पर सुखबीर का सियासी भविष्य, बाकी प्रत्याशियों की राह भी नहीं आसान

Wed, 15 May 2019 04:51 PM IST
ajay kumar सुरिंदर पाल/अनिल कुमार, अमर उजाला, जालंधर/फिरोजपुर (पंजाब)
सुरिंदर पाल/अनिल कुमार, अमर उजाला, जालंधर/फिरोजपुर (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Wed, 15 May 2019 04:51 PM IST
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Lok Sabha elections 2019, Ground Report of Punjab's Firozpur Lok Sabha seat
लोकसभा चुनाव 2019

फिरोजपुर इस बार पंजाब की सबसे हॉट सीट बनी हुई है। इस सीट से शिअद सुप्रीमो सुखबीर बादल खुद मैदान में हैं। उनके सामने कांग्रेस से शेर सिंह घुबाया मैदान में हैं। घुबाया इस सीट से पहले दो बार अकाली दल की टिकट पर सांसद बन चुके हैं। इस बार घुबाया शिअद को छोड़कर कांग्रेस में आ चुके हैं, ऐसी स्थिति में मुद्दों से ज्यादा सबकी नजर सुखबीर बादल और घुबाया के बीच मुकाबले पर है।

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कांग्रेस व अकाली दल के अलावा आप का वोट भी निर्याणक है। 2014 लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनाव में अकाली दल और कांग्रेस के अलावा तीसरे गुट ‘आप’ उम्मीदवारों के बीच हुए मुकाबले के बाद यह बात सामने आई कि इस लोकसभा क्षेत्र के अधीन आते 9 विधानसभा हलकों में ‘आप’ किसी भी सीट से जीत तो नहीं सकी, लेकिन जीत-हार के लिए निर्णायक वोट इस पार्टी के पास मौजूद हैं।
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2014 के आम चुनाव में मुख्य मुकाबला अकाली दल प्रत्याशी शेर सिंह घुबाया और कांग्रेस के सुनील जाखड़ में था। शेर सिंह घुबाया को 4,87,932 वोट मिले थे, जबकि सुनील जाखड़ को कुल 4,56,512 वोट मिले थे और ‘आप’ के सतनाम राय कंबोज को 1,13,417 वोट पड़े थे। जाखड़ 31,420 वोटों के अंतर से हार गए थे। 

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Lok Sabha elections 2019, Ground Report of Punjab's Firozpur Lok Sabha seat
सुखबीर सिंह बादल (फाइल फोटो)

2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने फिरोजपुर शहरी, फिरोजपुर देहाती, गुरुहरसहाय, फाजिल्का, बल्लूआना व मलोट 6 सीटों पर जीत प्राप्त की थी जबकि अकाली दल-भाजपा ने जलालाबाद, श्री मुक्तसर साहिब व अबोहर 3 सीटों पर जीत हासिल की और ‘आप’ का हाथ खाली रहा, लेकिन वह लोकसभा से दोगुनी से अधिक वोट ले जाने में कामयाब रही। हरजिंदर सिंह सरां आप से इस बार उम्मीदवार है। हालांकि टक्कर अकाली दल व कांग्रेस में है।

फिरोजपुर लोकसभा हलके का इतिहास
1957 व 1962 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी इकबाल सिंह जाखड़ जीते थे। 1967 एडीएस के उम्मीदवार ने कांग्रेस के जे. नाथ को करीब 12 हजार वोटों से पराजित किया। दो वर्ष बाद भंग हुई लोकसभा के 1969 में हुए चुनाव में शिरोमणि अकाली दल (ब) के गुरदास बादल जीते थे। 

1971 में कांग्रेस के मोहिंद्र सिंह गिल, 1977 में शिअद (ब) के मोहिंद्र सिंह साईयांवाला, 1980 में कांग्रेस के बलराम जाखड़, 1985 में कांग्रेस के गुरदियाल सिंह ढिल्लो, 1989  में शिअद (अ) के ध्यान सिंह मंड, 1992 व 1996  में बहुजन समाज पार्टी के मोहन सिंह फलियांवाला, दो वर्ष बाद दोबारा चुनाव हुए जिसमें शिअद (ब) के जोरा सिंह मान, एक वर्ष बाद 1999 में दोबारा हुए चुनाव में फिर शिअद (ब) के जोरा सिंह मान, 2004 में शिअद (ब) के जोरा सिंह मान, 2009 व 2014 में शिअद (ब) के शेर सिंह घुबाया चुनाव जीते हैं।

फिरोजपुर में  मुद्दे

1. नशा
2. क्षेत्र में उद्योग स्थापित करना
3. सेहत सुविधा नहीं।
4. बढ़िया शिक्षा के साधन नहीं।
5. शुद्ध पीने का पानी।
6. कैंसर
7. हुसैनीवाला बार्डर व्यापार के लिए खोलना।
8. फिरोजपुर-अमृतसर के बीच नई रेल पटरी बिछाना।

कुल मतदाता : 15 लाख 87 हजार 296 
पुरुष मतदाता : 8,45,907 
महिला मतदाता : 7,41,350 
थर्डजेंडर : 39

मुद्दे गायब निजी आरोप प्रत्यारोप शुरू
कांग्रेस के शेर सिंह घुबाया का कहना है कि वह अकाली दल में थे लेकिन उनके काम नहीं किए जा रहे थे, उनका हलका पिछड़ रहा था। इसलिए वह कांग्रेस में आ गए। केंद्र सरकार ने उनके सारे काम रोक दिये क्योंकि उनका बेटा दविंदर घुबाया कांग्रेस में आ गया था। 

हमने घुबाया को सांसद बनाया.... 
सुखबीर बादल शेर सिंह घुबाया पर निशाना साध रहे हैं कि उनकी पार्टी ने घुबाया को सांसद बनाया लेकिन पार्टी के लिए घुबाया ने वफादारी नहीं निभाई।

सुखबीर सिंह बादल, शिअद (ब))

मजबूती- अकाली दल के अध्यक्ष व जलालाबाद से लगातार दो बार विधानसभा चुनाव जीते
हैं, जलालाबाद के विधायक हैं। जलालाबाद में कई विकास कार्य किए हैं। कई
कांग्रेसियों को अकाली दल में शामिल करने में सफलता हासिल की है।

कमजोरी- 2014 से लेकर 2017 तक राज्य में हुई बेअदबी की घटनाएं। जलालाबाद से चुनाव
जीतने के बाद स्थानीय नेताओं के हवाले हलका छोड़ दिया।

शेर सिंह घुबाया (कांग्रेस)
मजबूती- फिरोजपुर लोकसभा हलके से दो बार सांसद बने हैं। जलालाबाद के विधायक भी
रहे। राय सिख बिरादरी को अपना वोट बैंक मानते हैं।

कमजोरी- लोगों के मुद्दों को संसद में नहीं उठाया। दस साल में हलके में कोई बड़ा
उद्योग तक नहीं लाए। कई वीडियो वायरल हुए। कई कांग्रेसी
घुबाया का विरोध कर रहे हैं।

हरजिंदर सिंह काका (आम आदमी पार्टी)
मजबूती- हरजिंदर सिंह काका किसान के बेटे हैं और आम जनता की काका तक पहुंच है। आप
के वालंटियर दिन-रात काका का गांव-गांव प्रचार कर रहे हैं।

कमजोरी- काका ने कभी कोई चुनाव नहीं लड़ा है। पहली बार लोकसभा चुनाव में मैदान में उतरे हैं। कई सीनियर वालंटियर और विधायक का चुनाव लड़ने वाले नेता आप छोड़ अकाली दल में शामिल हो गए हैं।

हंसराज गोल्डन (पीडीए)
मजबूती- हंसराज गोल्डन भारती कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव है। कई यूनियन व
जत्थेबंदियां गोल्डन के साथ जुड़ी हैं। गोल्डन ने धरना प्रदर्शन कर कई
किसानों को इंसाफ दिलवाने में सफलता हासिल की है।

कमजोरी- गोल्डन ने इससे पहले कोई चुनाव नहीं लड़ा है। कोई बड़ा नेता भी चुनाव
प्रचार के लिए पहुंचा है।

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