ग्राउंड रिपोर्टः अकालियों के लिए कांग्रेस के किले को ध्वस्त करना बड़ी चुनौती
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जालंधर लोकसभा सीट पर 1999 के लोकसभा चुनाव से कांग्रेस का ध्वज इस सीट पर लहराता रहा है। प्रसिद्ध लोकगायक हंसराज हंस से लेकर पूर्व पीएम इंद्र कुमार गुजराल के बेटे नरेश गुजराल हार का मुंह देख चुके हैं। जालंधर सीट दो बार अकाली दल और 13 बार कांग्रेस की झोली में जा चुकी है। इस बार चुनाव में अकाली दल जहां कैप्टन सरकार के विरुद्ध वोट मांग रहा है वहीं कांग्रेस की तरफ से नोटबंदी और जीएसटी के बाद व्यापार की बर्बादी को मुद्दा बनाया जा रहा है।
अकाली दल टूटी सड़कों से लेकर कैप्टन सरकार के तमाम वादों को लेकर जनता की कचहरी में है। वहीं इन सबके बीच बसपा का हाथी भी मैदान में है और पीडीए का उम्मीदवार भी दोनों रिवायती पार्टियों के उम्मीदवारों को कड़ी चुनौती दे रहा है। जीत हार का फैसला अनुसूचित जाति का वोट बैंक करेगा और तमाम राजनीतिक दल अनुसूचित जाति वोट को अपनी तरफ खींचने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं।
कांग्रेस के संतोख सिंह चौधरी ने अकाली दल के पवन कुमार टीनू को 70,981 वोटों से हराया था। कांग्रेस के चौधरी संतोख सिंह को 3,80,479 मत और अकाली दल के टीनू को कुल 3,09,498 मत प्राप्त हुए थे। तीसरे नंबर पर 2,54,121 वोट लेकर आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार ज्योति मान थीं। इस बार आप ने यहां से बेअदबी कांड की जांच करने वाले जस्टिस जोरा सिंह को मैदान में उतारा है।
जालंधर लोकसभा हलका में 9 विधानसभा सीटों में चार सुरक्षित सीट हैं, जहां पर बहुसंख्यक वोट अनुसूचित जाति का है। जहां शिअद उम्मीदवार चरणजीत सिंह अटवाल शहरों में मोदी के नाम पर वोट मांग रहे हैं वहीं गांवों में कैप्टन सरकार के खिलाफ बोलकर वोटरों को अपनी तरफ खींच रहे हैं।
वहीं कांग्रेस के उम्मीदवार चौधरी संतोख सिंह शहरों में जीएसटी व नोटबंदी के बाद व्यापार पर हुए असर को लेकर वोट मांग रहे हैं। साथ ही मोदी सरकार द्वारा जालंधर में कोई बड़ा प्रोजेक्ट न देने की बात उठा रहे हैं। गांवों में कांग्रेस के न्याय को लेकर वह लगातार प्रचार कर रहे हैं।
जालंधर कुल वोटर-16,15,171
पुरुष - 8,41,845
महिला - 7,73,306
थर्ड जेंडर - 20
चौ. संतोख सिंह (कांग्रेस)
मजबूती : कांग्रेस की सुरक्षित सीट मानी जाती है, रविदासिया समाज से हैं, जिसका 33 फीसदी वोट है
कमजोर : शहरों में विकास और कैप्टन सरकार के वादे पूरे न होने के कारण लोगों में नाराजगी
चरणजीत सिंह अटवाल (शिअद)
मजबूती : मोदी नाम का सहारा
कमजोरी : बाहरी प्रत्याशी, लोगों में अकाली दल के प्रति नाराजगी
बलविंदर कुमार (पीडीए)
मजबूती : पढ़े लिखे व युवा रविदासिया समाज से, रविदासिया समाज का बहुसंख्यक वोट
कमजोरी : बसपा का 1.5 फीसदी तक गिरा हुआ वोट बैंक
जस्टिस जोरा सिंह (आम आदमी पार्टी)
मजबूती : हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस, बेअदबी की जांच करने वाले आयोग के प्रमुख
कमजोरी : बाहरी प्रत्याशी और आप का बिखरा हुआ जनाधार